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Wednesday, 19 August 2026
विश्व

ईरान के बाद अब यूक्रेन पर ध्यान: ट्रंप

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Komal
संवाददाता
📅 16 June 2026, 7:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
ईरान के बाद अब यूक्रेन पर ध्यान: ट्रंप
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने G-7 शिखर सम्मेलन में एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान का मामला निपटने के बाद वह यूक्रेन की समस्या पर ध्यान केंद्रित करेंगे। ट्रंप ने यह बातें ऐसे समय कही हैं, जब रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने की सभी कूटनीतिक कोशिशें विफल हो चुकी हैं। इस बीच यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की G-7 सम्मेलन में पश्चिमी देशों से अधिक राजनीतिक और सैन्य सहायता प्राप्त करने की उम्मीद लगाए हुए पहुंचे हैं।

ट्रंप का यह बयान अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपनी विदेश नीति को नए सिरे से परिभाषित करने जा रहे हैं। ईरान के साथ तनाव को कम करना और फिर यूक्रेन की ओर अपना ध्यान लगाना - यह दृष्टिकोण काफी चिंताजनक है।

ईरान और यूक्रेन संकट पर ट्रंप का रुख

ट्रंप का यह बयान बताता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी प्राथमिकताओं को किस तरह से तय कर रहे हैं। ईरान के साथ तनाव को सुलझाना और फिर यूक्रेन पर ध्यान देना - यह क्रम दिखाता है कि ट्रंप किस तरह से अपनी विदेश नीति को संचालित करना चाहते हैं। हालांकि, यह भी सवाल उठाता है कि क्या ईरान के मामले को निपटाना पहले से अधिक महत्वपूर्ण है।

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में ईरान परमाणु समझौते से संयुक्त राज्य अमेरिका को वापस ले लिया था। इस कदम से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया था। अब जब वह फिर से राष्ट्रपति बनने की ओर बढ़ रहे हैं, तो ईरान के साथ समझौते की संभावना बढ़ गई है। लेकिन यूक्रेन की समस्या इतनी आसानी से हल नहीं हो सकती।

रूस-यूक्रेन युद्ध तीन साल से अधिक समय तक चल चुका है। इस संघर्ष में लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। हजारों सैनिक मारे गए हैं। इसके बावजूद, शांति समझौते की संभावनाएं बहुत धुंधली रहीं हैं। ट्रंप की ये बातें सुनकर जेलेंस्की को शायद कुछ उम्मीद मिली है कि अमेरिकी समर्थन जारी रहेगा।

जेलेंस्की की पश्चिमी समर्थन की उम्मीद

जेलेंस्की G-7 शिखर सम्मेलन में अपनी देश के लिए अधिक सैन्य और आर्थिक सहायता की मांग करने पहुंचे हैं। वह जानते हैं कि बिना पश्चिमी देशों के समर्थन के यूक्रेन इस लंबे युद्ध को जीत नहीं सकता। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों का समर्थन यूक्रेन के लिए जीवन रक्त साबित हुआ है।

अब तक अमेरिका ने यूक्रेन को करोड़ों डॉलर की सैन्य सहायता प्रदान की है। लेकिन कुछ अमेरिकी राजनेताओं का मानना है कि इस संघर्ष में अमेरिका की भूमिका सीमित होनी चाहिए। ट्रंप ने अपने बयान से एक नई बहस शुरू कर दी है - क्या अमेरिका को यूक्रेन में इतनी गहराई से शामिल होना चाहिए।

यूरोपीय संघ के देशों को भी यह संदेश समझ में आ गया है कि अमेरिकी समर्थन शाश्वत नहीं हो सकता। इसलिए वे अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने में अधिक ध्यान दे रहे हैं। जेलेंस्की को यह भी एहसास है कि उन्हें अपने देश के लिए लंबे समय का समर्थन नीति तैयार करनी होगी।

रूस-यूक्रेन संघर्ष का भविष्य और कूटनीतिक चुनौतियां

रूस-यूक्रेन का संघर्ष केवल दो देशों का मामला नहीं रह गया है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय संकट बन चुका है। हर देश इसमें अपना-अपना हित देख रहा है। चीन इस युद्ध से अपने लिए लाभ निकालने की कोशिश कर रहा है। भारत जैसे देश तटस्थ रहने की कोशिश कर रहे हैं।

ट्रंप ने जो बयान दिया है, वह दर्शाता है कि अमेरिका अपनी प्राथमिकताओं को फिर से परिभाषित कर रहा है। ईरान के साथ समझौता करना, यूक्रेन में शांति लाना - ये सब दिखता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति विश्व राजनीति में एक नया संतुलन स्थापित करना चाहते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में रूस की भूमिका अग्रणी बनी रहेगी।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए यूक्रेन एक महत्वपूर्ण मामला है। वह अपनी भू-राजनीतिक शक्ति को बनाए रखना चाहते हैं। इसलिए रूस यूक्रेन से कभी भी पूरी तरह से पीछे नहीं हटेगा। यह एक दीर्घकालीन संघर्ष बन गया है। ट्रंप के बयान के बाद भी इस युद्ध को समाप्त करना बेहद मुश्किल दिखता है। कूटनीति की इन पेचीदा चाल में यूक्रेन और उसके लोग सबसे अधिक पीड़ित हैं। G-7 देशों को अब सोच-समझकर अपने कदम उठाने चाहिए क्योंकि विश्व शांति का मसला इसी पर निर्भर करता है।