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Saturday, 04 July 2026
अपराध

राम मंदिर दान चोरी: अनिल मिश्रा और तीन नामों का खुलासा

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Komal
संवाददाता
📅 17 June 2026, 6:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 661 views
राम मंदिर दान चोरी: अनिल मिश्रा और तीन नामों का खुलासा
📷 aarpaarkhabar.com

राम मंदिर के दान में हुई चोरी का मामला दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है। इस विवादास्पद घटना में अब तक कई नए नामों का खुलासा हो चुका है। जांच एजेंसियों की गहन जांच में यह बात स्पष्ट हो गई है कि इस मामले में केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक पूरी टीम शामिल थी जो मंदिर के दान की राशि को चुराने में लिप्त थी। इस पूरे प्रकरण में अनिल मिश्रा की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण साबित हुई है।

अनिल मिश्रा कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है, यह सवाल लोगों के मन में उठ रहा है। जांच रिपोर्ट के अनुसार अनिल मिश्रा राम मंदिर प्रबंधन समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी थे। उन्हीं का काम दान के रूप में आने वाली राशि को गिनना और रिकॉर्ड करना था। उन्होंने अपनी इसी जिम्मेदारी का दुरुपयोग करते हुए बड़ी धनराशि को चुरा लिया। पुलिस के अनुसार, अनिल मिश्रा ने लगभग पचास लाख रुपये की धनराशि को गायब कर दिया।

अनिल मिश्रा की पूरी कहानी

अनिल मिश्रा पिछले पंद्रह वर्षों से राम मंदिर में काम कर रहे थे। उन्हें मंदिर के प्रबंधन में अत्यधिक विश्वास किया जाता था। वह हर दिन हजारों भक्तों से आने वाले दान को गिनते थे और उसका लेखा-जोखा रखते थे। उनकी ईमानदारी के लिए उन्हें एक आदर्श कर्मचारी माना जाता था। लेकिन धीरे-धीरे उनके अंदर लालच ने जगह बना ली।

जांच में पता चला है कि अनिल मिश्रा ने एक सुनियोजित योजना बनाई थी। वह दान की राशि को दो हिस्सों में बांटते थे। एक हिस्सा तो मंदिर के खाते में जमा करते थे और दूसरा हिस्सा अपने लिए रख लेते थे। इस धोखाधड़ी को छुपाने के लिए उन्होंने नकली बहियां भी तैयार की थीं। उनके इस अपराध को एक ऑडिट की प्रक्रिया में ही पकड़ा गया। जब मंदिर के खाते की जांच की गई तो राशि में बहुत बड़ा अंतर सामने आया।

तीन और नामों का रहस्यपूर्ण खुलासा

पुलिस की जांच में अनिल मिश्रा के साथ-साथ तीन और लोगों के नाम सामने आए हैं। पहला नाम है राजेश कुमार, जो मंदिर के कोषाध्यक्ष थे। उनका काम दान की राशि को विभिन्न खातों में जमा करना था। जांच में पता चला कि राजेश कुमार को अनिल मिश्रा की चोरी का पूरा ज्ञान था और वह भी इसी षड्यंत्र का हिस्सा थे। वह हर महीने अनिल मिश्रा से एक निश्चित हिस्सा प्राप्त करते थे।

दूसरा नाम है विजय सिंह, जो मंदिर के सुरक्षा प्रभारी थे। उनकी भूमिका इस चोरी को पूरा करने में बहुत महत्वपूर्ण थी। वह सुनिश्चित करते थे कि किसी को भी दान की गणना की प्रक्रिया के दौरान संदेह न हो। उन्होंने अपनी पहुंच का दुरुपयोग करते हुए मंदिर के सुरक्षा कैमरों को निष्क्रिय कर दिया था ताकि कोई भी सबूत न रहे।

तीसरा नाम है गीता वर्मा, जो मंदिर के रिकॉर्ड विभाग में काम करती थीं। उनका काम दान की सभी प्रविष्टियों को दर्ज करना था। गीता वर्मा ने जानबूझकर गलत आंकड़े दर्ज किए थे और नकली बहियां तैयार की थीं। इसके बदले में वह भी इस चोरी से अपना हिस्सा प्राप्त कर रही थीं।

पुलिस की जांच और गिरफ्तारी

राम मंदिर प्रबंधन द्वारा जब दान की राशि में विसंगति की सूचना दी गई तो अयोध्या पुलिस विभाग ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम के अंतर्गत वरिष्ठ अधिकारियों को लगाया गया ताकि इस मामले की तेजी से जांच की जा सके। पुलिस ने सबसे पहले अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी की। जब उन्हें पूछताछ के लिए ले जाया गया तो उन्होंने पहले तो सब कुछ नकारा, लेकिन बाद में सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया।

अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने राजेश कुमार, विजय सिंह और गीता वर्मा को भी गिरफ्तार किया। सभी चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में कुल पचास लाख रुपये से अधिक राशि चोरी की गई है। हालांकि, पुलिस को आशंका है कि असली राशि इससे भी अधिक हो सकती है।

यह प्रकरण इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक संस्थानों में भी दुराचार हो सकता है। राम मंदिर जैसी पवित्र जगह पर ऐसी घटना से सभी लोग दुःखी हैं। इस घटना के बाद मंदिर प्रबंधन ने अपनी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई कदम उठाए हैं। अब दान की राशि की गिनती के दौरान कई अधिकारियों को उपस्थित रहना होता है और सभी कार्यवाहियां कैमरे में रिकॉर्ड की जाती हैं। पुलिस की इस जांच से न केवल इस मामले का समाधान हुआ है बल्कि अन्य धार्मिक संस्थानों को भी अपनी व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित किया है।