राम मंदिर चंदा चोरी: जेवरातों का हिसाब न देना
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट में हुई चंदा चोरी का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में चढ़ाए गए कीमती जेवरातों का सही हिसाब न मिलने से ट्रस्ट प्रशासन में खलबली मच गई है। अभी तक करोड़ों की नकदी गायब होने की जांच चल रही थी, लेकिन अब सोने, चांदी और हीरे से बने जेवरातों में भी अनियमितता का खुलासा हुआ है।
राम मंदिर के ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जब चढ़ावे के जेवरातों का विवरण मांगा गया, तो वे सही दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इस स्थिति ने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। मंदिर प्रशासन के आंतरिक लेखा-जोखा में बड़ी खामियां सामने आई हैं। भारी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन राम मंदिर में आते हैं और सोने के गहने, हार, अंगूठी और अन्य कीमती वस्तुएं चढ़ाते हैं। इन सभी वस्तुओं का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए, लेकिन ऐसा प्रतीत नहीं होता कि यह काम सही तरीके से किया जा रहा है।
जेवरातों की लापरवाही और दस्तावेजों का अभाव
राम मंदिर में जमा होने वाले जेवरातों का प्रबंधन बेहद लचर तरीके से किया जा रहा है। ट्रस्ट के प्रबंधकों के पास न तो पूरी सूची है और न ही सभी जेवरातों का विवरण उपलब्ध है। जब प्रशासनिक अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी की मांग की, तो पदाधिकारी सटीक जवाब नहीं दे सके।
जांच में पता चला है कि कई साल पुरानी चढ़ावे की सूची भी मंदिर के रिकॉर्ड में नहीं है। जो सूचियां मौजूद हैं, उनमें भी बहुत सारी असंगतियां हैं। कुछ जेवरातों का वजन और मूल्य दर्ज नहीं है, तो कुछ की तस्वीरें भी संरक्षित नहीं की गई हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। मंदिर के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने कहा कि जेवरातों के प्रबंधन के लिए कोई निश्चित प्रणाली नहीं है। कभी-कभी नए पदाधिकारी आते हैं और पुरानी जानकारी खोने लगती है।
श्रद्धालुओं का विश्वास और भावना हर जेवरात में निहित होती है। जब वे अपनी मेहनत की कमाई से सोने की चेन या हार चढ़ाते हैं, तो उनकी आशा रहती है कि वह वस्तु मंदिर के भंडार में सुरक्षित रहेगी। लेकिन अगर उस वस्तु का ही सही हिसाब नहीं रहे, तो श्रद्धालुओं को गहरा दुख पहुंचता है।
ट्रस्ट की जमीन खरीद की भी पड़ताल
जेवरातों के मामले के अलावा, राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में ट्रस्ट ने काफी जमीन खरीदी है, लेकिन उन जमीनों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं दिखाई दी। अधिकारियों को यह बताना मुश्किल हो रहा है कि जमीन कितने दामों पर खरीदी गई और किन परिस्थितियों में यह खरीद की गई।
जांचकर्ताओं ने पाया है कि कुछ जमीनों को बाजार भाव से अधिक दामों पर खरीदा गया। इसका अर्थ यह हो सकता है कि किसी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। अयोध्या में जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन ट्रस्ट ने कुछ जमीनें काफी महंगे दामों पर खरीदीं। इस बारे में विस्तृत जांच की जरूरत है।
एक अन्य चिंता यह भी है कि ट्रस्ट की संपत्ति का विवरण जनता को सूचित नहीं किया जा रहा है। धार्मिक संस्थाओं को अपने आर्थिक लेनदेन के बारे में स्पष्ट रहना चाहिए। राम मंदिर देश का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर है और करोड़ों लोगों की भावनाओं का केंद्र है। इसलिए इसके प्रबंधन में सर्वोच्च स्तर की ईमानदारी और पारदर्शिता होनी चाहिए।
जांच एजेंसियां सक्रिय हो रहीं
इन सभी मामलों की जांच के लिए प्रशासनिक एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। विभिन्न विभागों ने अपनी टीमें गठित की हैं जो ट्रस्ट के रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। पुलिस को भी इस मामले में समन्वय करने के लिए कहा गया है।
जांच में देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि हर दिन कीमती साक्ष्य गायब हो सकते हैं। ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों से सख्ती से जवाबदेही की मांग की जानी चाहिए। अगर किसी को दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
राम मंदिर ट्रस्ट को अपनी कार्यप्रणाली में तुरंत सुधार करना चाहिए। एक आधुनिक लेखा प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए जिसमें हर जेवरात और हर लेनदेन का सटीक रिकॉर्ड रहे। भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए कड़े नियम बनाए जाने चाहिए।
श्रद्धालुओं का विश्वास ही मंदिर की सबसे बड़ी संपत्ति है। राम मंदिर ट्रस्ट को यह समझना चाहिए कि जब तक वह पारदर्शी और जवाबदेह नहीं रहेगा, तब तक लोगों में संदेह बना रहेगा। इसलिए जरूरी है कि इस मामले की तुरंत और निष्पक्ष जांच की जाए और सभी तथ्य जनता के सामने रखे जाएं।




