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Wednesday, 19 August 2026
विश्व

ट्रंप की ईरान को धमकी, लेबनान में हिज्बुल्लाह रोको

author
Komal
संवाददाता
📅 22 June 2026, 6:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
ट्रंप की ईरान को धमकी, लेबनान में हिज्बुल्लाह रोको
📷 aarpaarkhabar.com

स्विट्जरलैंड में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और उसके सहयोगी संगठन हिज्बुल्लाह को लेकर बेहद सख्त चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है कि यदि ईरान लेबनान में अपने प्रॉक्सी को नियंत्रित नहीं करेगा तो अमेरिका कड़े कदम उठाने में नहीं हिचकिचाएगा। राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है और वहां से गुजरने वाले तेल पर टोल भी वसूलेगा।

ट्रंप की यह धमकी मध्य पूर्व के परिस्थितियों को लेकर तेजी से बढ़ते तनाव का संकेत है। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान सीधे तौर पर इस बात को दर्शाता है कि वाशिंगटन ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों से काफी नाराज है। विशेषकर लेबनान में हिज्बुल्लाह की बढ़ती सैन्य शक्ति और आतंकवादी गतिविधियों को लेकर अमेरिका चिंतित है।

लेबनान में हिज्बुल्लाह की मजबूती

लेबनान में हिज्बुल्लाह का कद हाल के वर्षों में काफी बढ़ गया है। यह संगठन ईरान द्वारा समर्थित और वित्त पोषित है। हिज्बुल्लाह न केवल एक राजनीतिक दल है बल्कि एक शक्तिशाली सैन्य संगठन भी है जिसके पास उन्नत हथियार और रॉकेट हैं। लेबनान की राजनीति में इसका प्रभाव लगातार बढ़ा है और यह लेबनानी सरकार के भीतर एक समांतर शक्ति के रूप में काम करता है।

हिज्बुल्लाह के पास हजारों सक्रिय लड़ाके हैं और इसके पास इराक और सीरिया से होकर ईरान से सीधी आपूर्ति लाइन है। इसके शस्त्रागार में ईरान से आने वाली मिसाइलें और अन्य आधुनिक हथियार शामिल हैं। इस संगठन की मजबूती न केवल लेबनान के लिए बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र के स्थिरता के लिए खतरा बनी हुई है। इजरायल भी इसे अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है।

लेबनान की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और देश भारी कर्ज में डूबा हुआ है। इस हालात में हिज्बुल्लाह ने स्थानीय आबादी के बीच अपना नेटवर्क मजबूत किया है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में काम करता है जिससे आम लोगों में इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। राजनीतिक स्तर पर भी इसने लेबनानी संसद में काफी प्रतिनिधित्व हासिल किया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी कब्जे की धमकी

ट्रंप की सबसे महत्वपूर्ण धमकी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण की है। यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। दैनिक आधार पर लगभग 20 प्रतिशत विश्व का तेल इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसका महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं।

अमेरिका द्वारा इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और टोल वसूलने की धमकी को विश्व अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है। यदि अमेरिका ऐसा करता है तो तेल की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि हो सकती है। इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। भारत जैसे देश जो तेल के लिए आयातकारी हैं, उन्हें विशेष नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण का अर्थ है कि अमेरिका को ऊर्जा बाजार पर अभूतपूर्व प्रभाव मिल जाएगा। यह न केवल ईरान को बल्कि अन्य देशों को भी अमेरिकी नीतियों का पालन करने के लिए मजबूर कर सकता है। यह एक प्रकार का आर्थिक ब्लैकमेल है जो विश्व व्यवस्था के नियमों के विपरीत है।

स्विट्जरलैंड में वार्ता और बातचीत का दौर

वर्तमान में स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है। इन वार्ताओं का उद्देश्य परमाणु समझौते और अन्य मुद्दों पर सहमति तक पहुंचना है। हालांकि, ट्रंप की धमकी भरे बयानें इस बात को दर्शाते हैं कि अमेरिका कठोर रुख अपनाए हुए है। ट्रंप की नीति मुख्य रूप से ईरान को अधिकतम दबाव में रखने की है।

बातचीत के इसी दौर में ट्रंप का यह बयान एक रणनीतिक पदक्षेप लगता है। अमेरिका ईरान को यह संदेश देना चाहता है कि यदि वह अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को नियंत्रित नहीं करेगा तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यह ईरान को वार्ता की मेज पर अधिक समझौतावादी रुख अपनाने के लिए बाध्य करने का प्रयास है।

हालांकि, ईरान भी इसी तरह की प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार है। ईरान के नेताओं ने भी कई बार कहा है कि वे अमेरिकी दबाव से डरते नहीं हैं। इस परिस्थिति में स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ताएं काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। यह देखना होगा कि क्या दोनों देश किसी समझौते तक पहुंच पाते हैं या फिर तनाव और बढ़ता है।

ट्रंप की धमकी भरे बयान और ईरान की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं मध्य पूर्व में एक विस्फोटक परिस्थिति पैदा कर रही हैं। आने वाले दिन और भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं जब इस विवाद का कोई हल निकलेगा।