🔴 ब्रेकिंग
TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|
Saturday, 04 July 2026
समाचार

AMCA विमान: GE ने बढ़ाई इंजन की कीमत, नए विकल्प

author
Komal
संवाददाता
📅 25 June 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 997 views
AMCA विमान: GE ने बढ़ाई इंजन की कीमत, नए विकल्प
📷 aarpaarkhabar.com

भारत के महत्वाकांक्षी पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान परियोजना एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) को एक बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी इंजन निर्माता जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) ने एफ414 इंजन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की मांग की है। इस कदम से भारतीय रक्षा मंत्रालय चिंतित हो गया है और वह अब वैकल्पिक विकल्पों की तलाश में जुट गया है।

जीई द्वारा की गई कीमत में वृद्धि के साथ ही भारत को अब अन्य देशों से इंजन की आपूर्ति के विकल्पों पर गंभीरता से विचार करना पड़ रहा है। यह परियोजना भारतीय वायु सेना के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। एएमसीए भारत द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया जाने वाला उन्नत लड़ाकू विमान है।

एफ414 इंजन की कीमत में बढ़ोतरी का कारण

अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक ने इंजन की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए कई कारण बताए हैं। वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति शृंखला में आए संकट को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद से ही इस क्षेत्र में कई चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी फैक्टरियों में उत्पादन की बढ़ी हुई लागत भी इसके पीछे की मुख्य वजह है।

जीई की मांग में एक और बड़ी बात यह है कि कंपनी भारत में एक समर्पित एफ414 असेंबली और स्थानीय उत्पादन लाइन स्थापित करने के लिए लगभग छः हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि माँग रही है। यह राशि न केवल बड़ी है बल्कि एएमसीए परियोजना के समग्र बजट को भी प्रभावित कर सकती है। भारतीय रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार यह स्थिति बेहद गंभीर है।

लोकल मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली लाइन की स्थापना का विचार तो अच्छा था, लेकिन जीई की अत्यधिक कीमत की मांग भारत की वहन क्षमता से अधिक लग रही है। भारत पहले से ही रक्षा खर्च में भारी निवेश कर रहा है। इसलिए किसी भी अतिरिक्त खर्च की गुंजाइश सीमित है।

अन्य इंजन विकल्पों पर विचार

जीई की कीमत की बढ़ोतरी से भारतीय रक्षा मंत्रालय को अब अन्य विकल्पों को गंभीरता से देखना पड़ रहा है। भारत ने विभिन्न देशों से इंजन आपूर्ति के संबंध में प्रारंभिक बातचीत शुरू कर दी है। रूस, यूरोपीय देश और कुछ अन्य देशों के इंजन निर्माता इस संभावना में शामिल हो सकते हैं।

यूरोपीय देशों में एडोर कंपनी और अन्य निर्माता भी इसी तरह के इंजन बनाते हैं। रूस के पास भी अपनी इंजन प्रौद्योगिकी है, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह विकल्प जटिल हो सकता है। भारत के पास विकल्पों की कमी नहीं है, लेकिन प्रत्येक विकल्प के अपने फायदे और नुकसान हैं।

भारतीय रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार एएमसीए परियोजना की सफलता के लिए सही इंजन का चयन बेहद महत्वपूर्ण है। इंजन विमान की कार्यक्षमता, गति और दक्षता को सीधे प्रभावित करता है। इसलिए सस्ता विकल्प चुनना सही नहीं होगा। गुणवत्ता और प्रदर्शन को ध्यान में रखना आवश्यक है।

एएमसीए परियोजना का महत्व

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भारतीय वायु सेना के भविष्य का मुख्य आधार होगा। यह विमान पाँचवीं पीढ़ी की तकनीक से लैस होगा और वर्तमान समय के सभी खतरों से निपटने में सक्षम होगा। भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाने के लिए यह परियोजना आवश्यक है।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ मिलकर भारत इस परियोजना को आगे बढ़ा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस परियोजना पर काफी प्रगति हुई है। डिजाइन और विकास के चरण लगभग पूर्ण हो चुके हैं। अब उत्पादन के चरण में जाने की तैयारी की जा रही है।

अगर इंजन की समस्या हल हो जाती है, तो 2030 के दशक के मध्य में प्रथम प्रोटोटाइप तैयार हो सकता है। पूरे परियोजना में अनुमानित खर्च लगभग 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। भारत सरकार इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता मान रही है।

जीई की कीमत की बढ़ोतरी वाकई चिंताजनक है, लेकिन भारत इसे अपनी रणनीतिक योजना के हिसाब से हल करेगा। रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच नियमित बैठकें हो रही हैं ताकि सबसे उत्तम समाधान निकाला जा सके। भारत के पास अपनी तकनीकी क्षमता और विश्वव्यापी संपर्क हैं जो इस चुनौती को पार करने में मदद कर सकते हैं।