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Wednesday, 19 August 2026
विश्व

ईरान जंग में यूरोप ने नहीं दिया साथ, ट्रंप भड़के

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Komal
संवाददाता
📅 25 June 2026, 7:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 465 views
ईरान जंग में यूरोप ने नहीं दिया साथ, ट्रंप भड़के
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तनावपूर्ण परिस्थितियों में यूरोपीय देशों की ओर से मिली निराशाजनक प्रतिक्रिया पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। NATO के प्रमुख मार्क रूट के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया कि संकट की घड़ी में अमेरिका के सहयोगी देशों ने उसके विश्वास को तोड़ा है। इस विवाद ने न सिर्फ पश्चिमी गठबंधन को कमजोर किया है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक नई खटास भी ला दी है।

ट्रंप की आलोचना का निशाना मुख्य रूप से ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि ये सभी देश ईरान संकट के समय अमेरिका की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। जब वाशिंगटन को इन देशों के समर्थन की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब ये देश पीछे हट गए। यह रवैया न केवल ट्रंप को निराश करता है, बल्कि NATO जैसे संगठन की भी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

यूरोपीय देशों की कमजोर प्रतिक्रिया

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच जब अमेरिका ने एक कठोर रुख अपनाया, तो यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया काफी हल्की-फुल्की रही। ब्रिटेन, जो ऐतिहासिक रूप से अमेरिका का सबसे पुराना सहयोगी माना जाता है, ने भी इस मुद्दे पर ट्रंप को वह समर्थन नहीं दिया जिसकी अपेक्षा थी। फ्रांस और जर्मनी तो पहले से ही ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) को बनाए रखने के लिए प्रयासरत थे, जिससे अमेरिका की नीतियों से उनका असहमति स्पष्ट था।

इटली और स्पेन जैसे देश भी इस संकट में मुख्य भूमिका निभाने से बचते नजर आए। ये देश अपने क्षेत्रीय हितों और आर्थिक समझौतों को लेकर ज्यादा चिंतित थे। जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाने की बात की, तो यूरोपीय देश इससे अलग ही रुख अपनाना चाहते थे। इस असमन्वय ने NATO की एकता को चोट पहुंचाई है।

NATO प्रमुख के साथ ट्रंप का विस्फोटक संवाद

NATO के महासचिव मार्क रूट के साथ अपनी बैठक में ट्रंप ने बिना लाग-लपेट के अपनी नाराजगी व्यक्त की। ट्रंप का कहना था कि NATO का मूल उद्देश्य ही सदस्य देशों के बीच एकता और सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन यूरोपीय देश इस जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं। अमेरिका हमेशा से NATO के लिए सबसे बड़ा सैन्य और आर्थिक योगदानकर्ता रहा है, लेकिन जरूरत के समय इसका बदला नहीं मिल रहा।

ट्रंप ने साफ कर दिया कि यदि यूरोपीय सहयोगी अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाने में असमर्थ हैं, तो अमेरिका को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। यह बयान NATO की भविष्य की भूमिका के बारे में गंभीर संदेश भेजता है। मार्क रूट को ट्रंप के इस तीक्ष्ण रुख का सामना करना पड़ा, जो काफी शर्मनाक भी साबित हुआ।

अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर असर

यह विवाद केवल अमेरिका और यूरोप के बीच का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके व्यापक भू-राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। जब पश्चिमी दुनिया आंतरिक मतभेद से जूझ रही हो, तो ईरान, रूस और चीन जैसी शक्तियां इसका फायदा उठा सकती हैं। NATO की कमजोर होती एकता दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व में भी सुरक्षा के नए संकट पैदा कर सकती है।

ट्रंप की यह आलोचना दरअसल एक बड़े संघर्ष की ओर इशारा करती है - विश्व व्यवस्था में अमेरिकी नेतृत्व पर सवाल। यूरोपीय देशों की यह कमजोरी साबित करती है कि वे अब अपनी स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना चाहते हैं, भले ही इसका मतलब अमेरिका से दूरी हो।

ट्रंप और NATO प्रमुख के बीच हुआ यह विवाद अगले कुछ महीनों में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाला है। यूरोपीय देशों को अब अपनी नीतियों को पुनर्परिभाषित करना होगा और अमेरिका के साथ अपने रिश्ते को नए सिरे से तैयार करना होगा। इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच, विश्व शांति और सुरक्षा की चिंताएं और गहरी हो गई हैं। पश्चिमी एकता को बहाल करने के लिए तत्काल प्रयास करने होंगे, अन्यथा इसके परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं।