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Saturday, 04 July 2026
समाचार

डार्क ट्रायड पर्सनैलिटी क्या है? सिया केस को समझें

author
Komal
संवाददाता
📅 27 June 2026, 7:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 790 views
डार्क ट्रायड पर्सनैलिटी क्या है? सिया केस को समझें
📷 aarpaarkhabar.com

डार्क ट्रायड पर्सनैलिटी: एक परिचय

जब हम किसी व्यक्ति को देखते हैं तो उनकी सतही छवि से ही हमारी राय बना लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ लोगों के अंदर तीन ऐसी खतरनाक विशेषताएं होती हैं जो उन्हें असल में कौन बनाती हैं? मनोविज्ञान में इसे 'डार्क ट्रायड' कहा जाता है। यह तीन विशेषताएं हैं - नार्सिसिज्म, मैकियावेलिज्म और साइकोपैथी। पुणे की बीस साल की लड़की सिया गोयल के मामले ने इस मनोवैज्ञानिक अवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

डार्क ट्रायड की खोज सबसे पहले मनोवैज्ञानिकों ने की थी जब वे कुछ लोगों में ऐसी विशेषताएं देखीं जो समाज के लिए खतरनाक साबित होती हैं। ये लोग बाहर से सामान्य दिखते हैं, लेकिन उनके मन में अँधेरे छिपे होते हैं। सिया के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ लगता है। वह बीस साल की एक सामान्य लड़की थी, लेकिन उसके अंदर की छिपी हुई वृत्तियों ने उसे एक भयानक अपराध करने के लिए प्रेरित किया।

जो लोग डार्क ट्रायड के शिकार होते हैं, वे अपने आसपास के लोगों को आसानी से धोखा दे सकते हैं। वे कभी पछतावा महसूस नहीं करते, उन्हें सहानुभूति नहीं होती और वे अपने लक्ष्य को पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह विशेषताएं उन्हें समाज में एक अलग ही प्रकार का व्यक्ति बना देती हैं।

नार्सिसिज्म, साइकोपैथी और मैकियावेलिज्म: तीन खतरनाक लक्षण

डार्क ट्रायड की पहली विशेषता है नार्सिसिज्म। नार्सिसिस्ट लोग अपने आप से बेहद प्यार करते हैं। वे खुद को बहुत महत्वपूर्ण समझते हैं और दूसरों को अपने से कम आंकते हैं। ये लोग निरंतर प्रशंसा की चाहत रखते हैं और अगर किसी ने उनकी आलोचना कर दी तो वे बहुत क्रोधित हो जाते हैं। सिया के बारे में देखा गया कि वह अपने बारे में बहुत ऊँचा सोचती थी और दूसरों को हीन समझती थी। यह नार्सिसिज्म का एक स्पष्ट संकेत है।

दूसरी विशेषता है मैकियावेलिज्म। यह नाम इतालवी राजनीतिज्ञ निकोलो मैकियावेली के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने कहा था कि सत्ता पाने के लिए कोई भी साधन सही है। मैकियावेलिस्ट लोग बहुत चालाक होते हैं। वे दूसरों को हेराफेरी करने और धोखा देने में माहिर होते हैं। वे अपने हितों के लिए किसी को भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि सिया भी इसी तरह की चालबाजी करती थी। वह अपनी योजनाएं काफी सूझबूझ से बनाती थी।

तीसरी विशेषता है साइकोपैथी। साइकोपैथ वे लोग होते हैं जिनमें सहानुभूति की भावना बिल्कुल नहीं होती। वे दूसरों के दर्द को महसूस नहीं कर सकते और उन्हें किसी का खून-खराबा देखकर भी कोई भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं होती। ऐसे लोग अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए हिंसा का सहारा ले सकते हैं। सिया के मामले में भी यह बात सामने आई कि वह अपने कृत्य के लिए कोई पछतावा नहीं दिखाती थी।

सिया केस और डार्क ट्रायड का संबंध

पुणे की सिया गोयल का मामला आधुनिक भारत में डार्क ट्रायड पर्सनैलिटी का एक ज्वलंत उदाहरण बन गया है। बीस साल की इस लड़की के अंदर नार्सिसिज्म, मैकियावेलिज्म और साइकोपैथी की सभी विशेषताएं दिखाई दीं। वह अपने आप को बहुत महत्वपूर्ण समझती थी, दूसरों को धोखा देती थी और अपने अपराध के लिए कोई पछतावा नहीं दिखाती थी।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि डार्क ट्रायड की जड़ें अक्सर बचपन में ही दिखाई देने लगती हैं। जो बच्चे अपने माता-पिता से पर्याप्त प्यार और ध्यान नहीं पाते, वे बाद में ऐसी समस्याओं का शिकार हो सकते हैं। वैकल्पिक रूप से, कुछ बच्चे अत्यधिक लाड़-प्यार पाते हैं, जिससे उन्हें यह विश्वास हो जाता है कि वे सब कुछ करने के लिए स्वतंत्र हैं।

सिया के बचपन की जानकारी से पता चलता है कि उसके माता-पिता बहुत व्यस्त थे और उसे पर्याप्त समय नहीं दे सकते थे। लेकिन साथ ही साथ उसे सामग्री संसाधनों में कोई कमी नहीं थी। इस तरह का असंतुलन एक बच्चे के व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचा सकता है। वह आत्मकेंद्रित हो जाता है और दूसरों के प्रति सहानुभूति खोने लगता है।

डार्क ट्रायड पर्सनैलिटी वाले लोग समाज में खतरे का स्रोत बन सकते हैं। ये लोग अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए किसी को भी चोट पहुंचा सकते हैं। सिया के मामले ने यह दिखाया कि ऐसे व्यक्ति कितने खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम इस तरह की मनोवैज्ञानिक स्थितियों को समझें और उनकी पहचान करें।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि डार्क ट्रायड की पहचान करना काफी मुश्किल हो सकता है। ये लोग बहुत अच्छे अभिनेता होते हैं। वे लोगों के सामने एक अलग ही व्यक्तित्व प्रस्तुत करते हैं। लेकिन थोड़ा ध्यान देने से कुछ संकेत मिल सकते हैं - जैसे कि वे कभी गलती स्वीकार नहीं करते, दूसरों को हेराफेरी करते हैं, और सहानुभूति की कमी दिखाते हैं।

सिया का मामला हमें सीख देता है कि हमें अपने बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें सुरक्षा के साथ-साथ सहानुभूति और नैतिकता की शिक्षा भी देनी चाहिए। समाज को भी ऐसी मनोवैज्ञानिक समस्याओं के प्रति जागरूक होना चाहिए ताकि हम समय पर पहचान कर सकें और उपचार करा सकें।