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Wednesday, 19 August 2026
विश्व

जन विश्वास बिल पास: 1000+ अपराध कार्य हुए डिक्रिमिनलाइज्ड

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Komal
संवाददाता
📅 04 April 2026, 1:38 PM ⏱ 1 मिनट 👁 899 views
जन विश्वास बिल पास: 1000+ अपराध कार्य हुए डिक्रिमिनलाइज्ड
📷 aarpaarkhabar.com

जन विश्वास बिल से 1000+ कृत्य हुए डिक्रिमिनलाइज्ड, व्यापार जगत को मिली राहत


भारतीय संसद ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। इस महत्वपूर्ण विधेयक के तहत 79 कानूनों के 1,000 से अधिक प्रावधानों को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया गया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे अभूतपूर्व सुधार बताते हुए कहा है कि इतने बड़े स्तर पर कानूनी बदलाव पहले कभी नहीं हुआ है।



यह विधेयक खासतौर पर व्यापारियों, उद्यमियों और आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। अब तक जिन कामों के लिए लोगों को जेल की सजा या भारी जुर्माना भुगतना पड़ता था, वे अब सिविल मामले बन जाएंगे।


पीयूष गोयल का बयान: इतिहास में पहली बार इतना बड़ा सुधार


केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस विधेयक को पारित करने के बाद कहा कि यह भारतीय कानूनी इतिहास में एक मील का पत्थर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पैमाने पर बदलाव का उदाहरण न तो भारत में और न ही दुनिया के किसी अन्य देश में देखने को मिला है।



मंत्री गोयल के अनुसार, यह विधेयक सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने और व्यापारिक गतिविधियों में आने वाली अनावश्यक बाधाओं को दूर करने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि अब व्यापारी और उद्यमी बिना डर के अपना कारोबार कर सकेंगे।


किन क्षेत्रों में मिलेगी राहत


जन विश्वास विधेयक के तहत विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को व्यापक राहत मिलेगी। इसमें छोटे व्यापारी, दुकानदार, ऑटो रिक्शा चालक, ट्रक ड्राइवर, और छोटे उद्यमी शामिल हैं। पहले जिन छोटी-मोटी गलतियों या नियमों के उल्लंघन के लिए लोगों को आपराधिक मामलों का सामना करना पड़ता था, अब वे सिर्फ सिविल मामले होंगे।



विशेष रूप से कृषि, वन, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा, और मोटर वाहन कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इससे किसान भाइयों को भी काफी राहत मिलने की उम्मीद है। अब तक जिन कामों के लिए उन्हें पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाने पड़ते थे, वे समस्याएं अब सिविल प्रक्रिया के तहत हल होंगी।


व्यापार जगत में खुशी की लहर


इस विधेयक के पारित होने के बाद व्यापार जगत में खुशी की लहर दिखी है। उद्योग संगठनों ने इसे व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद साबित होगा।



व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अब उद्यमी अपना पूरा ध्यान व्यापार पर लगा सकेंगे, बजाय इसके कि वे कानूनी झंझटों में उलझे रहें। इससे नए स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


कानूनी विशेषज्ञों की राय


कानूनी विशेषज्ञों ने इस विधेयक को न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। उनका मानना है कि इससे न्यायालयों पर पड़ने वाला बोझ कम होगा और वास्तविक आपराधिक मामलों पर बेहतर तरीके से ध्यान दिया जा सकेगा।



कई वकीलों का कहना है कि पहले जो मामले आपराधिक प्रकृति के नहीं थे, लेकिन फिर भी आपराधिक कानून के तहत आते थे, अब वे सही जगह यानी सिविल कानून के दायरे में आ गए हैं। इससे न्याय मिलने की प्रक्रिया भी तेज होगी।


भविष्य की योजनाएं


सरकार ने संकेत दिया है कि यह केवल शुरुआत है। आने वाले समय में और भी कई कानूनों की समीक्षा की जाएगी और अनावश्यक आपराधीकरण को हटाया जाएगा। इसका मकसद एक ऐसा माहौल बनाना है जहां ईमानदार नागरिक और व्यापारी बिना किसी डर के अपना काम कर सकें।



केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आश्वासन दिया है कि सरकार नागरिकों की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जन विश्वास विधेयक इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।



यह विधेयक निश्चित रूप से भारतीय न्याय व्यवस्था और व्यापारिक माहौल में एक नया अध्याय शुरू करेगा। इससे न केवल आम नागरिकों को राहत मिलेगी बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में भी तेजी आएगी।