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Tuesday, 18 August 2026
समाचार

17 लाख उपग्रह और अंतरिक्ष दर्पण: वैज्ञानिकों की चेतावनी

author
Komal
संवाददाता
📅 04 July 2026, 5:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 231 views
17 लाख उपग्रह और अंतरिक्ष दर्पण: वैज्ञानिकों की चेतावनी
📷 aarpaarkhabar.com

पृथ्वी की कक्षा में छोड़े जाने वाले लाखों उपग्रहों और अंतरिक्ष दर्पणों का एक नया संकट खड़ा हो गया है। यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी (ईएसओ) की ताजा रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि पृथ्वी की निचली कक्षा में 17 लाख उपग्रह और अंतरिक्ष दर्पण तैनात किए गए तो यह खगोल विज्ञान के लिए एक भीषण आपदा साबित हो सकता है। इन उपग्रहों से निकलने वाली रोशनी रात के आकाश को इतना प्रकाशित कर देगी कि धरती से तारों को देखना लगभग असंभव हो जाएगा।

पृथ्वी की कक्षा में बढ़ता दबाव

वर्तमान समय में अंतरिक्ष में हजारों उपग्रह पहले से ही तैनात हैं। स्पेसएक्स की स्टारलिंक परियोजना सबसे बड़ी है जिसने पहले ही हजारों उपग्रह तैनात कर दिए हैं। लेकिन भविष्य में और भी बड़ी परियोजनाएं आने वाली हैं। कुल मिलाकर विभिन्न कंपनियों और देशों की ओर से 17 लाख उपग्रह लॉन्च करने की योजनाएं हैं। इसके अलावा अंतरिक्ष सूर्य ऊर्जा संयंत्रों के लिए बड़े दर्पण भी स्थापित करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं।

यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की विशाल संख्या में उपग्रह तैनात करने से पृथ्वी का पूरा आकाश प्रभावित होगा। ये उपग्रह सूर्य की रोशनी को परावर्तित करेंगे और रात के अंधकार को दूषित करेंगे। परिणामस्वरूप जहां धरती से तारे दिखते हैं, वहां उपग्रहों की रोशनी से तारे नजर नहीं आएंगे।

खगोलीय अनुसंधान पर गंभीर प्रभाव

रात के आकाश में यह प्रदूषण सबसे ज्यादा खगोल विज्ञान के क्षेत्र में नुकसान पहुंचाएगा। दूरबीनों और अन्य खगोलीय उपकरणों के जरिए जब खगोलशास्त्री रात को आकाश को देखते हैं तो उन्हें दूर की आकाशगंगाओं, सितारों और ग्रहों के बारे में महत्वपूर्ण डेटा मिलता है। लेकिन यदि पूरा आकाश ही प्रकाशित हो जाए तो यह संभव नहीं रह जाएगा।

विशेष रूप से दूरस्थ आकाशगंगाओं की खोज और ब्रह्मांड की संरचना को समझने के लिए किए जाने वाले अनुसंधान पर भारी असर पड़ेगा। पृथ्वी जैसे ग्रहों की खोज के प्रोजेक्ट भी बाधित होंगे। वैज्ञानिकों ने बताया है कि अगले एक दशक में दुनिया भर में बहुत सारी नई दूरबीनें तैनात की जाने वाली हैं जो ब्रह्मांड को समझने में मदद देंगी। लेकिन यदि आकाश ही प्रदूषित हो जाए तो ये सभी प्रयास विफल हो जाएंगे।

ईएसओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपियन एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप (ईएलटी) और अन्य बड़ी दूरबीनें जो चिली में स्थापित की जा रही हैं, उन पर भी यह प्रभाव गंभीर होगा। ये दूरबीनें ब्रह्मांड के इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली थीं।

वैज्ञानिकों की सुझाव और भविष्य की चिंता

ईएसओ के शोधकर्ताओं ने एक तरफ तो चेतावनी दी है लेकिन दूसरी तरफ कुछ संभावित समाधान भी सुझाए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि उपग्रहों को गहरे रंग से बनाया जाए और उन्हें इस तरह डिजाइन किया जाए कि वे सूर्य की रोशनी को कम परावर्तित करें तो नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही उपग्रहों की कक्षा को इस तरह निर्धारित किया जाए कि वे सूर्यास्त के बाद तेजी से पृथ्वी की छाया में चले जाएं।

लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि ये समाधान पूर्ण नहीं हैं। जब तक उपग्रहों की संख्या ही कम नहीं की जाती तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नीति बनाने की मांग की है जो उपग्रहों की संख्या को नियंत्रित करे।

यह मुद्दा केवल विज्ञान का नहीं है बल्कि मानवता के भविष्य से भी जुड़ा है। ब्रह्मांड को समझना और दूर की दुनिया को जानना मनुष्य की जिज्ञासा का हिस्सा रहा है। लेकिन अगर हम अपने व्यावहारिक हितों के लिए आकाश को ही प्रदूषित कर दें तो यह एक बहुत बड़ी कीमत होगी। इसलिए यह आवश्यक है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस समस्या पर गंभीरता से विचार किया जाए और एक संतुलित समाधान निकाला जाए जो तकनीकी प्रगति और वैज्ञानिक अनुसंधान दोनों को आगे बढ़ने दे।