मथुरा में नकली पनीर फैक्ट्री पर बड़ी कार्रवाई
मथुरा के छाता में खाद्य सुरक्षा विभाग ने नकली पनीर फैक्ट्री पर छापा मारा। 500 किलो दूषित पनीर नष्ट किया गया और रिफाइंड सोयाबीन ऑयल बरामद हुआ।
मथुरा शहर के छाता इलाके में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली पनीर बनाने वाली अवैध फैक्ट्री पर छापेमारी की है। इस ऑपरेशन में अधिकारियों ने 500 किलोग्राम तक का दूषित और नकली पनीर जब्त किया और उसे नष्ट करवाया है। साथ ही, फैक्ट्री से रिफाइंड सोयाबीन ऑयल और टीनोपाल जैसे हानिकारक केमिकल की भारी मात्रा बरामद की गई है। इस मामले में अब तक प्राथमिकी दर्ज कर दी गई है और अधिकारियों की तरफ से आगे की जांच पड़ताल की जा रही है।
यह घटना आम जनता के लिए चिंता का विषय है क्योंकि नकली पनीर का सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इस तरह की अवैध फैक्ट्रियां बिना किसी पर्यवेक्षण के असुरक्षित परिस्थितियों में खाद्य पदार्थ तैयार करती हैं और इनमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। मथुरा की इस छापेमारी से पता चलता है कि बाजार में नकली पनीर की समस्या कितनी गंभीर है।
छाता इलाके में चलाई गई कार्रवाई
मथुरा के छाता इलाके में यह छापेमारी एक समन्वित प्रयास था जिसमें खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की एक विशेष टीम ने भाग लिया। इस ऑपरेशन को अंजाम देते समय अधिकारियों को फैक्ट्री में अत्यंत असुरक्षित और अस्वच्छ परिस्थितियां मिलीं। फैक्ट्री का संचालन पूरी तरह से अनधिकृत तरीके से हो रहा था और वहां कोई भी स्वास्थ्य और स्वच्छता के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था।
जब्त किए गए 500 किलोग्राम पनीर को तुरंत नष्ट कर दिया गया ताकि यह किसी भी तरह से बाजार में न पहुंच सके और किसी को नुकसान न पहुंचाए। यह फैक्ट्री विभिन्न दुकानों और रिटेल आउटलेट्स को यह नकली और दूषित पनीर सप्लाई कर रही थी। अधिकारियों को जब्त किए गए रेकॉर्ड और दस्तावेजों से यह भी पता चला कि फैक्ट्री काफी समय से इस धंधे में संलिप्त थी।
रिफाइंड सोयाबीन ऑयल और केमिकल की खोज
इस छापेमारी की सबसे चिंताजनक खोज यह थी कि फैक्ट्री में रिफाइंड सोयाबीन ऑयल और टीनोपाल नामक जहरीले केमिकल का विशाल स्टॉक मिला। टीनोपाल एक व्हाइटनिंग एजेंट है जिसे कपड़ों को सफेद करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, न कि खाद्य पदार्थों के लिए। इसका सेवन करना मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है और यह विभिन्न बीमारियों का कारण बन सकता है।
अधिकारियों को यह भी पता चला कि नकली पनीर बनाने के लिए सस्ते और निम्न गुणवत्ता के सामान का उपयोग किया जा रहा था। असली पनीर दूध से बनता है लेकिन यहां सोयाबीन प्रोटीन, स्टार्च और इन हानिकारक रसायनों का मिश्रण इस्तेमाल किया जा रहा था। इस तरीके से बनाया गया पनीर न केवल पोषण मूल्य से रहित होता है बल्कि यह बेहद खतरनाक भी होता है।
खाद्य सुरक्षा की बढ़ती चिंता
मथुरा में इस कार्रवाई से खाद्य सुरक्षा के मुद्दे की गंभीरता उजागर हुई है। पिछले कुछ सालों में भारत में नकली और दूषित खाद्य पदार्थों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। मुनाफे की लालच में अधिकांश अवैध फैक्ट्रियां जनता की सेहत से कोई फिक्र नहीं करती हैं। इससे बहुत सारे लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।
पनीर एक लोकप्रिय और रोजमर्रा के भोजन में इस्तेमाल होने वाला खाद्य पदार्थ है। देश के सभी हिस्सों में लोग पनीर का सेवन करते हैं। ऐसे में नकली पनीर का बाजार में फैलना बेहद चिंताजनक है। इससे आम आदमी को पता नहीं चल पाता कि वह असली पनीर खरीद रहा है या नकली।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे केवल विश्वसनीय और लाइसेंसप्राप्त दुकानों से ही पनीर खरीदें। उन्हें यह भी सलाह दी गई है कि पनीर को ध्यान से देखें और परखें। असली पनीर में आमतौर पर कुछ नमी होती है और इसका स्वाद विशेष होता है। नकली पनीर बहुत ज्यादा सफेद और बेस्वाद होता है।
मथुरा में की गई इस कार्रवाई से आशा है कि अन्य जिलों में भी खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें इसी तरह की सख्त कार्रवाई करेंगी। जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सरकार को ऐसी अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ कठोर कानून बनाने चाहिए और नियमित निरीक्षण करने चाहिए। केवल इसी तरह के सख्त कदमों से ही बाजार में नकली पदार्थों की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।




