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Wednesday, 19 August 2026
समाचार

जूनागढ़ में मां की बेरहमी, बेलन-तार से पीटती थी बच्ची को

जूनागढ़ में छह साल की बच्ची के साथ मां की बेरहमी का मामला। बेलन और बिजली के तार से पीटने का आरोप। पड़ोसियों ने बचाया।

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Komal
संवाददाता
📅 19 August 2026, 6:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 514 views
जूनागढ़ में मां की बेरहमी, बेलन-तार से पीटती थी बच्ची को
📷 aarpaarkhabar.com

जूनागढ़ जिले में एक भयानक घटना सामने आई है जो हर किसी के मन को झकझोर कर रख गई है। छह साल की एक मासूम बच्ची को उसकी ही मां द्वारा बेरहमी से पीटा जा रहा था। इस क्रूरता का अंत तब हुआ जब पड़ोसियों ने बच्ची की दर्दभरी चीखें सुनीं और तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़े आए। यह घटना हमारे समाज में बाल प्रताड़ना की गंभीर समस्या को उजागर करती है और यह सवाल उठाती है कि क्या हमारे बच्चे सुरक्षित हैं?

जूनागढ़ की इस घटना में आरोपी मां का नाम नज़ीमा सोलंकी है। पड़ोसियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जानकारी के अनुसार, नज़ीमा अपनी छह साल की बेटी को नियमित रूप से घरेलू सामानों से पीटती थी। सबसे डरावनी बात यह थी कि वह बेलन का उपयोग करके बच्ची को मारती थी और कभी-कभी बिजली के तार का भी इस्तेमाल करती थी। ये कार्य केवल एक बार नहीं हुए थे बल्कि कई बार की गई यातना का हिस्सा थे। यह पूरा दृश्य इतना भयानक था कि पड़ोसियों को रोज सुबह बच्ची की चीखों और रोने की आवाज सुनाई देती थी।

पड़ोसियों की समझदारी बनी बच्ची की रक्षक

इस पूरे मामले में सबसे सराहनीय भूमिका पड़ोसियों की रही। जब उन्होंने बच्ची की तकलीफ भरी चीखें सुनीं, तो वे खामोश नहीं रहे। उन्होंने तुरंत पड़ोस के घर में घुसने का साहस दिखाया और बच्ची को मां के हाथों से बचाने के लिए आगे आए। पड़ोसियों की इस मानवीय संवेदनशीलता ने बच्ची की जान बचाई। मामले को गंभीरता से लेते हुए, पड़ोसियों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया। साथ ही उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन को भी संपर्क किया ताकि बच्ची को सभी संभावित सहायता मिल सके। इस घटना ने साबित कर दिया कि समाज की सतर्कता और सामूहिक जिम्मेदारी ही बाल प्रताड़ना को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है।

जब पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन के कार्यकर्ता बच्ची के पास पहुंचे, तो उन्होंने उसके शरीर पर भयानक चोट के निशान देखे। बच्ची के शरीर पर बेलन और तार से पड़े छाप स्पष्ट थे। ये निशान बताते थे कि बच्ची को कितनी क्रूरता से मारा गया था। चिकित्सा परीक्षण ने भी इसी बात की पुष्टि की। बच्ची के शारीरिक घाव तो ठीक हो सकते हैं, लेकिन मानसिक आघात को भरना कहीं अधिक कठिन होगा। छह साल की उम्र में ऐसी यातना झेलना किसी भी बच्चे के मनोविज्ञान को तहस-नहस कर सकता है।

चाइल्ड हेल्पलाइन और कानूनी कार्रवाई की महत्ता

चाइल्ड हेल्पलाइन इस प्रकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह संगठन 24 घंटे बाल प्रताड़ना के मामलों में हस्तक्षेप करता है। बच्ची को पुलिस द्वारा तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। चाइल्ड हेल्पलाइन ने बच्ची के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का आकलन किया। उसे चिकित्सा सुविधा दी गई और साथ ही मनोवैज्ञानिक परामर्श भी दिया जा रहा है। कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है ताकि ऐसी क्रूरता के खिलाफ उचित दंड दिया जा सके। भारतीय कानून में बाल प्रताड़ना के लिए कठोर सजा का प्रावधान है और यह मामला उसी के अंतर्गत दर्ज किया गया है।

समाज में जागरूकता की जरूरत

इस घटना से हमें यह समझ आता है कि बाल प्रताड़ना केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं है बल्कि समाज की एक गंभीर समस्या है। माता-पिता को अपने क्रोध को नियंत्रित करना चाहिए और सकारात्मक तरीके से बच्चों को अनुशासित करना चाहिए। हिंसा कभी भी समाधान नहीं है। समाज को भी बाल प्रताड़ना के प्रति और अधिक जागरूक होना चाहिए। जूनागढ़ के इस मामले में पड़ोसियों की भूमिका प्रशंसनीय है। हर पड़ोसी को ऐसी ही जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। बच्चे हमारे भविष्य हैं और उन्हें सुरक्षा, प्रेम और देखभाल देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 को हर किसी को याद रखना चाहिए और यदि कोई बाल प्रताड़ना का मामला दिखे तो तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए। केवल सामूहिक प्रयासों से ही हम अपने बच्चों को सुरक्षित और सुखी बचपन दे सकते हैं।