आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई, 36 सीए की जांच
उत्तर प्रदेश में आयकर विभाग ने फर्जी ट्रस्ट और शेल कंपनियों के जरिए विदेश भेजी रकम के मामले में 36 सीए समेत 394 संदिग्ध इकाइयों की जांच शुरू की है।
उत्तर प्रदेश में आयकर विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी चैरिटेबल ट्रस्ट और शेल कंपनियों के माध्यम से कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के धन को विदेश भेजने के मामले में जांच शुरू की है। इस बड़े घोटाले में 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत कुल 394 संदिग्ध इकाइयां जांच के घेरे में आ गई हैं। विभाग के अनुसार, मथुरा के एक ट्रस्ट पर अकेले तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप है। यह घोटाला काफी समय से चल रहा था और इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।
आयकर विभाग की जांच और गंभीरता
आयकर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए देशव्यापी तैयारी की गई है और कई क्षेत्रों में एक साथ जांच कार्य संपन्न किए जा रहे हैं। मथुरा का यह ट्रस्ट बड़ी कंपनियों से दान लेता था और उसे सामाजिक कल्याण कार्यों के नाम पर विदेश भेज देता था। लेकिन गहन जांच से पता चला कि इसमें कई शेल कंपनियां और फर्जी बिचौलिये काम कर रहे थे।
विभाग के अनुसार, यह नेटवर्क काफी परिष्कृत था। कंपनियां सीएसआर के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये का दान देती थीं, जिसे ये ट्रस्ट और शेल कंपनियां आगे विदेश भेज देती थीं। इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंटों की भूमिका अहम थी। उन्होंने फर्जी डॉक्यूमेंट तैयार किए और इन अवैध लेनदेन को कानूनी जामा पहना दिया। 36 सीए की जांच से पता चलता है कि यह आर्थिक अपराध काफी बड़ी संरचना का हिस्सा था।
फर्जी ट्रस्ट और शेल कंपनियों का जाल
आयकर विभाग की जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि फर्जी ट्रस्ट और शेल कंपनियों का एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा था। इन संस्थाओं के कागजी ढांचे तो बिल्कुल सही दिख रहे थे लेकिन वास्तविक कार्य पूरी तरह गैरकानूनी थे। मथुरा स्थित मुख्य ट्रस्ट के अलावा, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की संस्थाएं पहचानी गई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे घोटालों में आमतौर पर एक मुख्य ट्रस्ट होता है जो बड़ी कंपनियों से सीएसआर फंड लेता है और फिर छोटी-मोटी शेल कंपनियों के माध्यम से इसे विदेश भेज दिया जाता है। इसी क्रम में विभिन्न अंतरराष्ट्रिक हवाला नेटवर्क का भी उपयोग किया जाता है। मथुरा के मामले में पाया गया कि लगभग 3000 करोड़ रुपये से अधिक राशि इसी तरीके से विदेश स्थानांतरित की गई थी।
चार्टर्ड अकाउंटेंटों की भूमिका इस घोटाले में बेहद महत्वपूर्ण रही है। ये पेशेवर ऐसे दस्तावेज तैयार करते थे जो पूरी तरह वैध दिख रहे थे। वे कर रिटर्न फाइल करते थे, बही-खातों को सही तरीके से दिखाते थे और इन सभी अवैध लेनदेन को छिपाने में मदद करते थे। आयकर विभाग के लिए यह संकेत था कि पेशेवर सलाहकारों की एक सुसंगठित टीम इस घोटाले में शामिल थी।
व्यापक जांच और भविष्य की कार्रवाई
आयकर विभाग ने इस मामले में व्यापक स्तर पर जांच का फैसला किया है। 394 संदिग्ध इकाइयों में कंपनियां, ट्रस्ट, एनजीओ, निजी संस्थाएं और व्यक्तिगत आयकरदाता शामिल हैं। प्रत्येक इकाई के लेनदेन की विस्तृत जांच की जाएगी। विभाग के अनुसार, इस जांच से न केवल विदेश भेजी गई राशि की वसूली संभव हो सकेगी, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को समाप्त करने में भी मदद मिलेगी।
विभाग की योजना है कि सभी जांच पूरी होने के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अगर इन 36 चार्टर्ड अकाउंटेंटों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिल जाते हैं तो उन्हें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एक्ट के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी भेजा जा सकता है। साथ ही, आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकते हैं।
यह जांच सीएसआर के कानून में एक महत्वपूर्ण अध्याय होगी। कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व एक्ट 2013 में कंपनियों को अपने लाभ का एक निर्धारित प्रतिशत सामाजिक कल्याण कार्यों में लगाना अनिवार्य है। लेकिन इसका दुरुपयोग करके काली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाले लोगों के खिलाफ यह कार्रवाई एक सख्त संदेश है। आयकर विभाग की इस बड़ी कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में सीएसआर फंड के दुरुपयोग में कमी आएगी।
इस मामले के अलावा भी देश में कई अन्य हिस्सों में इसी तरह की संदिग्ध गतिविधियां पहचानी गई हैं। आयकर विभाग के इस कड़े रुख से यह संदेश गया है कि काला धन और अवैध विदेश स्थानांतरण के खिलाफ सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।




