🔴 ब्रेकिंग
विराट कोहली जॉर्डन कॉक्स का मेंटर, फोन पर सदा मिलते हैं|शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026: साढ़ेसाती से राहत|पुरानी जींस से बनाएं प्रोडक्ट्स और कमाएं पैसे|लखनऊ सिपाही को नाम के कारण गिरफ्तार किया गया|विनेश फोगाट का BJP पर तीखा हमला, बृजभूषण को बताया गुंडा|नेतन्याहू का ममदानी पर बड़ा राजनीतिक वार|सोने की खदान धंसी, 30 खनिकों की मौत|दिल्ली की हवा और यमुना प्रदूषण पर समिति की रिपोर्ट|ईरान-ओमान समझौता: ट्रंप की धमकी क्यों?|असीम और अनुज लुगुन की कविता – मेरी बाँहें आसमान|विराट कोहली जॉर्डन कॉक्स का मेंटर, फोन पर सदा मिलते हैं|शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026: साढ़ेसाती से राहत|पुरानी जींस से बनाएं प्रोडक्ट्स और कमाएं पैसे|लखनऊ सिपाही को नाम के कारण गिरफ्तार किया गया|विनेश फोगाट का BJP पर तीखा हमला, बृजभूषण को बताया गुंडा|नेतन्याहू का ममदानी पर बड़ा राजनीतिक वार|सोने की खदान धंसी, 30 खनिकों की मौत|दिल्ली की हवा और यमुना प्रदूषण पर समिति की रिपोर्ट|ईरान-ओमान समझौता: ट्रंप की धमकी क्यों?|असीम और अनुज लुगुन की कविता – मेरी बाँहें आसमान|
Wednesday, 19 August 2026
समाचार

असीम और अनुज लुगुन की कविता – मेरी बाँहें आसमान

असीम और अनुज लुगुन की खूबसूरत कविता 'मेरी बाँहें आसमान को समेटे हुए हैं' को पढ़ें। आज का शब्द अमर उजाला पर।

author
Komal
संवाददाता
📅 19 August 2026, 7:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 891 views
असीम और अनुज लुगुन की कविता – मेरी बाँहें आसमान
📷 aarpaarkhabar.com

आज के समय में काव्य और साहित्य केवल किताबों तक सीमित नहीं रह गए हैं। डिजिटल माध्यमों ने कविताओं को सभी तक पहुँचाना आसान बना दिया है। अमर उजाला ने भी अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश भर के कवियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया है। आज हम बात कर रहे हैं असीम और अनुज लुगुन की एक शानदार कविता के बारे में जिसका शीर्षक है - "मेरी बाँहें आसमान को समेटे हुए हैं"।

यह कविता उन रचनाओं में से एक है जो पाठकों के दिल को छू जाती है। इसमें कवि ने अपनी भावनाओं को बेहद सुंदर तरीके से प्रकट किया है। आसमान को समेटने की बात करना - यह तो मानवीय भावनाओं की अनंतता को दर्शाता है। असीम और अनुज लुगुन ने इस कविता में प्रेम, आशा और जीवन के प्रति एक गहरा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।

अमर उजाला एप पर कविता भेजने की प्रक्रिया

अगर आप भी अपनी कविता लोगों तक पहुँचाना चाहते हैं तो अमर उजाला का एप्लिकेशन आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है। अमर उजाला ने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह से डिज़ाइन किया है कि नए और पुराने दोनों लेखक अपनी रचनाएँ आसानी से शेयर कर सकें।

अमर उजाला एप के माध्यम से कविता भेजना बेहद आसान है। आपको सबसे पहले अमर उजाला का एप अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड करना होगा। एप डाउनलोड करने के बाद आपको अपना अकाउंट बनाना होगा। अकाउंट बनाते समय आपको अपना नाम, ईमेल और अन्य आवश्यक जानकारी देनी होगी।

जब आपका अकाउंट तैयार हो जाए तो आप सीधे अपनी कविता सबमिट कर सकते हैं। एप पर एक विशेष सेक्शन है जहाँ आप अपनी रचनाएँ अपलोड कर सकते हैं। आपकी कविता को एक शीर्षक, विवरण और कविता का पूरा पाठ देना होगा। इसके बाद आप सबमिट करें और अपनी रचना को दुनिया के साथ साझा करें।

डिजिटल माध्यमों का साहित्य पर प्रभाव

डिजिटल युग ने साहित्य जगत को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहाँ कवियों को अपनी रचनाएँ प्रकाशित करवाने के लिए बड़े प्रकाशकों के चक्कर लगाने पड़ते थे, अब वह सीधे अपने मोबाइल फोन से अपनी कविताएँ शेयर कर सकते हैं।

अमर उजाला जैसे प्लेटफॉर्मों ने साहित्य को लोकतांत्रिक बना दिया है। हर कोई अपने विचार, अपनी भावनाएँ और अपनी कविताएँ साझा कर सकता है। इससे एक ऐसा समुदाय बनता है जहाँ हर किसी की आवाज़ सुनी जाती है।

डिजिटल माध्यमों ने न केवल कवियों के लिए बल्कि पाठकों के लिए भी एक बड़ा बदलाव लाया है। अब कोई भी व्यक्ति कभी भी, कहीं से भी अपने पसंद की कविताएँ पढ़ सकता है। इससे साहित्य का प्रचार-प्रसार बहुत बढ़ गया है।

अमर उजाला एप का बेहतर अनुभव

अमर उजाला के एप का इंटरफेस बहुत ही सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल है। इसे किसी भी उम्र के व्यक्ति द्वारा आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। एप की खूबसूरती यह है कि यह अपने यूजर्स को पूरा नियंत्रण देता है।

एप पर आप अपनी कविता को विभिन्न कैटेगरी में रख सकते हैं। चाहे प्रेम कविता हो, देशभक्ति हो, सामाजिक मुद्दों पर कविता हो या कोई और विषय - सब कुछ के लिए यहाँ जगह है। इसके अलावा आप अपनी कविता में इमेज और अन्य मल्टीमीडिया तत्वों को भी जोड़ सकते हैं।

अमर उजाला एप पर आपकी कविता को सीधा एक्सेस किया जा सकता है। आप अपनी कविता को अपने दोस्तों और परिवार के साथ सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं। एप में एक बिल्ट-इन शेयरिंग फीचर है जो काम को और भी आसान बना देता है।

अगर आप अपनी रचनात्मकता को दिखाना चाहते हैं और अपनी कविताओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना चाहते हैं तो अमर उजाला का एप सबसे अच्छा विकल्प है। असीम और अनुज लुगुन की कविता "मेरी बाँहें आसमान को समेटे हुए हैं" इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है। यह कविता हर किसी को प्रेरणा देती है कि अपने सपनों का पीछा करो और अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करो। डिजिटल माध्यमों ने इसे संभव बना दिया है।