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Thursday, 20 August 2026
विश्व

पाकिस्तान ने सर्जियो गोर की कश्मीर टिप्पणी पर जताया विरोध

पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की कश्मीर संबंधी टिप्पणी पर कड़ा विरोध जताया। इस्लामाबाद में अमेरिकी राजनयिक को तलब किया गया।

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Komal
संवाददाता
📅 20 August 2026, 5:32 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
पाकिस्तान ने सर्जियो गोर की कश्मीर टिप्पणी पर जताया विरोध
📷 aarpaarkhabar.com

इस्लामाबाद - पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की कश्मीर से संबंधित टिप्पणियों पर जोरदार विरोध प्रकट किया है। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने इस्लामाबाद में अमेरिकी राजनयिक को तलब कर आधिकारिक रूप से अपना आपत्ति दर्ज किया है। इस घटना ने भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में अमेरिकी नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़े किए हैं।

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताने वाली टिप्पणी की थी, जिससे पाकिस्तान में तीव्र प्रतिक्रिया हुई। पाकिस्तानी सरकार के लिए यह टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है क्योंकि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर अपना विरोधी दृष्टिकोण बनाए हुए है। पाकिस्तान का मानना है कि कश्मीर एक विवादास्पद क्षेत्र है और इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के माध्यम से होना चाहिए।

पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने आधिकारिक बयान में कहा है कि अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी अनुचित और अपमानजनक है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देने से पहले सावधानी बरते। पाकिस्तान का मानना है कि अमेरिका को इस तरह की टिप्पणियों से बचना चाहिए जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।

अमेरिकी राजदूत की विवादास्पद टिप्पणी

सर्जियो गोर ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जम्मू-कश्मीर एक आंतरिक भारतीय मामला है और वह भारत का अभिन्न अंग है। इस बयान ने पाकिस्तान में तूल मचा दिया। पाकिस्तान के राजनीतिक नेता, सरकारी अधिकारी और जनता इस टिप्पणी पर नाराज हो गई। पाकिस्तान का दावा है कि कश्मीर एक विवादास्पद प्रदेश है जहां संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से जनमत संग्रह होना चाहिए।

अमेरिकी राजदूत की यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका आमतौर पर कश्मीर मुद्दे पर तटस्थ रहता है। हालांकि, हाल के वर्षों में अमेरिकी विदेश नीति में परिवर्तन देखा गया है। अमेरिका ने भारत के साथ अपने संबंधों को गहरा करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसका असर अमेरिकी राजनयिकों की बयानबाजी पर भी दिखाई दे रहा है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सर्जियो गोर की टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के विरुद्ध है। पाकिस्तान यह मानता है कि कश्मीर का मुद्दा एक अंतरराष्ट्रीय विवाद है और इसे विश्व मंच पर हल किया जाना चाहिए। अमेरिका को अपनी तटस्थ नीति को बनाए रखना चाहिए और किसी भी पक्ष का पक्षपात नहीं करना चाहिए।

पाकिस्तान की कूटनीतिक कार्रवाई

पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने इस्लामाबाद में अमेरिकी राजनयिक को औपचारिक रूप से तलब किया। इस बैठक में पाकिस्तान के अधिकारियों ने अमेरिकी प्रतिनिधि को जनाब सर्जियो गोर की टिप्पणी के प्रति पाकिस्तान का सख्त विरोध व्यक्त किया। पाकिस्तान ने अमेरिका को औपचारिक डिप्लोमेटिक नोट भी सौंपा है।

इस घटना ने दिखाया है कि पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे पर कितना संवेदनशील है। भले ही पाकिस्तान और भारत के बीच राजनयिक संबंध तनावपूर्ण हों, लेकिन पाकिस्तान यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय कश्मीर को एक विवादास्पद क्षेत्र के रूप में मान्यता दे।

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने अपने बयान में कहा है कि अमेरिका को कश्मीर जैसे संवेदनशील और विवादास्पद मुद्दों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। पाकिस्तान यह भी कहता है कि अमेरिकी राजनयिकों को अपनी बयानबाजी में संतुलन बनाना चाहिए और किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं करना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के व्यापक निहितार्थ

यह घटना दक्षिण एशिया के राजनीतिक परिदृश्य में अमेरिकी भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। अमेरिका ने हाल के वर्षों में भारत के साथ अपने संबंधों को सामरिक स्तर तक ले जाया है। इस वजह से अमेरिकी नीति में भारत के पक्ष में झुकाव दिखाई दे रहा है।

पाकिस्तान का मानना है कि अमेरिका को अपनी तटस्थता बनाए रखनी चाहिए और दक्षिण एशिया में शांति स्थापना में भूमिका निभानी चाहिए। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है। अमेरिकी नीति स्पष्ट रूप से भारत की ओर झुकी हुई है।

इस मामले में पाकिस्तान की कूटनीतिक कार्रवाई एक संकेत है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर के मुद्दे पर अपनी आवाज उठाता रहेगा। पाकिस्तान यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि विश्व समुदाय को यह याद रहे कि कश्मीर एक विवादास्पद क्षेत्र है और इसका समाधान केवल द्विपक्षीय वार्ता या अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के माध्यम से हो सकता है।

आने वाले दिनों में इस विवाद का आगे का विकास देखना दिलचस्प होगा। पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक मेहनत जारी रखेगा और कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जीवंत रखेगा। साथ ही, भारत-अमेरिका संबंधों का यह विकास क्षेत्रीय राजनीति में नई चुनौतियां ला सकता है।