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Thursday, 20 August 2026
राजनीति

वंदे मातरम पर कांग्रेस का फैसला, भाजपा का हमला

कांग्रेस ने वंदे मातरम के केवल दो अंतरे गाने का फैसला किया। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने तीखा हमला बोला और राष्ट्रवाद पर सवाल उठाए।

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Komal
संवाददाता
📅 20 August 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
वंदे मातरम पर कांग्रेस का फैसला, भाजपा का हमला
📷 aarpaarkhabar.com

नई दिल्ली - भारतीय राजनीति में एक बार फिर से एक विवादास्पद मुद्दा सामने आया है जिसने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति ने एक फैसला लिया है जो राष्ट्रीय गान और भारतीय संस्कृति से जुड़ा है। पार्टी ने अपने सभी कार्यक्रमों में भविष्य में केवल वंदे मातरम के पहले दो अंतरे ही गाने का निर्णय लिया है। इस फैसले के तुरंत बाद से भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इस मुद्दे को लेकर बहुत ही गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कांग्रेस से सीधे पूछा है कि क्या यह पार्टी अब राष्ट्र से भी बड़ी हो गई है? त्रिवेदी के अनुसार कांग्रेस ने पुरानी मानसिकता को फिर से अपना लिया है जो 1937 में दिखाई दी थी। उन्होंने यह भी कहा है कि कांग्रेस का यह रवैया मुस्लिम लीग के पुराने विचारधारा से मेल खाता है।

यह पूरा विवाद भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है क्योंकि वंदे मातरम भारतीय राष्ट्रीयता और संस्कृति का प्रतीक है। इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अंग रहा है। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक यह गीत राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बना हुआ है।

भाजपा का तीखा प्रहार और आरोप

भाजपा ने कांग्रेस के इस फैसले को लेकर बहुत ही कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि यह फैसला केवल एक राजनीतिक कदम नहीं है बल्कि यह राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति अपमान है। उन्होंने कांग्रेस की नीतियों को सवाल के घेरे में खड़ा किया है और पूछा है कि क्या कांग्रेस का एजेंडा राष्ट्र से ऊपर है? भाजपा के प्रवक्ता का मानना है कि यह सिर्फ वंदे मातरम का मुद्दा नहीं है बल्कि यह भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीयता का सवाल है।

भाजपा की पार्टी की मानें तो कांग्रेस का यह कदम 1937 की उसी मानसिकता को दर्शाता है जब पार्टी ने धार्मिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अलग-अलग रुख अपनाए थे। त्रिवेदी के अनुसार कांग्रेस ने हमेशा ही अल्पसंख्यकों के नाम पर राष्ट्रीय मूल्यों को दरकिनार किया है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस को पूरे वंदे मातरम गीत को सम्मान के साथ प्रस्तुत करना चाहिए था।

इतिहास और सांस्कृतिक महत्व

वंदे मातरम गीत का भारतीय राजनीति और संस्कृति में गहरा महत्व है। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान युवाओं को प्रेरणा देता था। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के इस अमर संगीत ने देशवासियों के दिलों में आजादी का सपना जगाया था। स्वामी विवेकानंद, रवीन्द्रनाथ टैगोर और अन्य महान व्यक्तित्वों ने इस गीत के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया था।

लेकिन यह भी सच है कि इस गीत को लेकर विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच अलग-अलग विचार रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इस गीत के कुछ अंश धार्मिक प्रकृति के हैं जिसकी वजह से कुछ समुदाय इसका विरोध करते हैं। हालांकि भारतीय संविधान में भी वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान महत्व दिया गया है।

राजनीतिक विवाद और भविष्य

कांग्रेस का यह फैसला सिर्फ एक पार्टी के आंतरिक निर्णय से ज्यादा कुछ और प्रतीत हो रहा है। यह भारतीय राजनीति में एक बड़े विभाजन को दर्शाता है जहां भाजपा राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक मूल्यों की बात करती है जबकि कांग्रेस अल्पसंख्यकों की संवेदनशीलता को प्राथमिकता देती है। इस विवाद से आगामी चुनावों में भी गंभूर प्रभाव पड़ सकता है।

कांग्रेस के इस कदम को लेकर अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ पार्टियां इसे धार्मिक संवेदनशीलता का सम्मान मानती हैं तो कुछ इसे राष्ट्रीय मूल्यों में कटौती मानती हैं। यह विवाद भारतीय राजनीति के मूल प्रश्नों को फिर से सामने ले आया है कि क्या राष्ट्र सर्वोच्च है या धार्मिक मूल्य?

भारतीय जनता पार्टी का यह हमला कांग्रेस को सीधे चुनौती देता है और भारतीय जनमानस को भी इस मुद्दे पर सोचने के लिए बाध्य करता है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहरे होने की संभावना है क्योंकि राष्ट्रीय गान और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर भारतीय समाज बहुत ही संवेदनशील है। कांग्रेस को भी अपने इस फैसले को स्पष्ट करना होगा और यह बताना होगा कि उसका आशय क्या है।