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Monday, 14 September 2026
धर्म

अधिकमास 2026: 17 मई से शुरू, क्या करें और न करें

author
Komal
संवाददाता
📅 04 May 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
अधिकमास 2026: 17 मई से शुरू, क्या करें और न करें
📷 aarpaarkhabar.com

अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास का आगमन हर तीन साल में एक बार होता है। इस साल 17 मई से लेकर 15 जून तक चलने वाले इस पवित्र समय को हिंदू धर्म में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब वर्ष में एक अतिरिक्त महीना आता है, तो उसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इसी महीने में भगवान विष्णु की विशेष पूजा, दान और साधना का भी विधान है। आइए जानते हैं कि इस पवित्र समय में क्या काम करने चाहिए और क्या नहीं करने चाहिए।

अधिकमास क्या होता है और इसका धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में अधिकमास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसा महीना होता है जो हर तीन साल में एक बार आता है। सूर्य और चंद्रमा की गति के अंतर के कारण हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसी अतिरिक्त महीने को अधिकमास कहते हैं।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अधिकमास को भगवान विष्णु का महीना माना जाता है। इसी महीने में भगवान विष्णु ने अपने विभिन्न अवतार लिए थे। इसलिए इस महीने को सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में विश्वास है कि इस महीने में की गई पूजा, दान और तपस्या का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है।

वैदिक ग्रंथों में अधिकमास को "चंद्र मास" भी कहा गया है। इसी महीने में सभी तीर्थों का आत्मा वास करती है। तीर्थ यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह महीना बेहद शुभ होता है। कहा जाता है कि इस महीने में किए गए पुण्य कर्मों से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

अधिकमास में करने योग्य कार्य

अधिकमास में कुछ विशेष कार्य करने की परंपरा है। ये कार्य करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

सबसे पहली बात यह है कि इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। भगवान के विभिन्न रूपों जैसे राम, कृष्ण और नारायण की पूजा करने से मन में शांति और सुख आता है। घर में हर दिन दीप जलाने की परंपरा है। इस महीने में दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

दान देना इस महीने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। गरीबों को अनाज, वस्त्र और पैसे का दान देना चाहिए। गायों को चारा और जरूरतमंदों को भोजन देना भी बेहद पुण्य का काम माना जाता है। इस महीने में व्रत और उपवास करना भी बहुत फलदायक होता है। हल्का भोजन करके अपने शरीर को शुद्ध रखना चाहिए।

मंदिर जाकर प्रार्थना करना, भगवान के सामने अपने मन की बातें कहना, पवित्र ग्रंथों का पाठ करना ये सब काम इस महीने में जरूर करने चाहिए। तुलसी के पेड़ की पूजा करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। अगर संभव हो तो तीर्थ स्थलों पर जाना चाहिए।

अधिकमास में न करने योग्य कार्य

हिंदू धर्म में अधिकमास में कुछ कार्य वर्जित माने गए हैं। इन कार्यों को करने से बचना चाहिए क्योंकि इनसे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

इस महीने में विवाह का आयोजन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि अधिकमास में किए गए विवाह खुशहाल नहीं होते। इसी तरह इस महीने में नए घर में प्रवेश करना भी अशुभ माना जाता है। किसी नई चीज की खरीद-फरोख्त या बड़ी संपत्ति के लेन-देन से भी बचना चाहिए।

इस महीने में अपशब्द कहना, झूठ बोलना और किसी को दुःख पहुंचाना वर्जित है। शराब और मांस का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर आप व्रत रख रहे हैं तो प्याज और लहसुन का भी सेवन न करें।

इस महीने में किसी से झगड़ा नहीं करना चाहिए और हमेशा प्रसन्न रहने की कोशिश करनी चाहिए। नकारात्मक विचारों को मन से निकालकर सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। परिवार के लोगों के साथ प्रेम और स्नेह से रहना चाहिए।

अधिकमास का महीना आत्मा को शुद्ध करने और मन को पवित्र करने का सुनहरा अवसर है। इस महीने में सही कार्य करने से न केवल आध्यात्मिक विकास होता है, बल्कि जीवन में भी सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। इसलिए अधिकमास को पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस महीने को सही तरीके से व्यतीत करें और जीवन को आध्यात्मिकता की ओर ले जाएं।