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Tuesday, 21 April 2026
धर्म

अक्षय तृतीया 2026: 19 या 20 अप्रैल, सही तारीख जानें

author
Komal
संवाददाता
📅 16 April 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 408 views
अक्षय तृतीया 2026: 19 या 20 अप्रैल, सही तारीख जानें
📷 aarpaarkhabar.com

अक्षय तृतीया भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक बेहद महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि साल 2026 में अक्षय तृतीया कब मनाई जाएगी? क्या यह 19 अप्रैल को होगी या 20 अप्रैल को? आइए इस विषय पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं और समझते हैं कि इस पवित्र दिन का क्या महत्व है।

अक्षय तृतीया 2026 की सही तारीख

अक्षय तृतीया साल 2026 में 20 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह तारीख वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के अनुसार निर्धारित की गई है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर तय की जाती है। इस बार अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को सुबह से शुरू होकर 21 अप्रैल की सुबह तक रहेगी। लेकिन पूजा और शुभ कार्य 20 अप्रैल के दिन ही किए जाएंगे क्योंकि इसी दिन तृतीया तिथि का प्रभाव सर्वाधिक होगा।

हिंदू धर्म में तारीखों और तिथियों का निर्धारण बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है। चंद्र मास की गणना के अनुसार वैशाख माह साल का दूसरा महीना होता है। इसी माह में कई महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं। महात्मा बुद्ध का जन्म भी वैशाख माह में ही हुआ था। इसलिए यह माह हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में खास महत्व रखता है।

अक्षय तृतीया का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन को अक्षय नवमी भी कहा जाता है। 'अक्षय' शब्द का अर्थ है कभी खत्म न होने वाला या शाश्वत। इस दिन किए गए सभी पुण्य कार्यों का फल जीवन भर बना रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन को बहुत महत्व देते हैं और विभिन्न शुभ कार्य करते हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु ने परशुराम को एक परशु (कुल्हाड़ी) दिया था। इसी दिन महाभारत की रचना भी शुरू हुई थी। साथ ही, यह माना जाता है कि इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इसलिए यह दिन विष्णु भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

अक्षय तृतीया पर खरीदारी का भी बहुत महत्व है। इस दिन सोना, चांदी और अन्य कीमती चीजें खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन खरीदी गई चीजें कभी नष्ट नहीं होती। इसीलिए भारत में अक्षय तृतीया को सोने और गहनों की खरीदारी का सबसे बड़ा दिन माना जाता है।

अक्षय तृतीया पर किए जाने वाले कार्य और परंपराएं

अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दिन दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है और माना जाता है कि यह पुण्य सदा के लिए मिलता है। लोग इस दिन गरीबों को अनाज, कपड़े, पैसे और अन्य चीजें दान करते हैं। मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

इस दिन जप-तप, यज्ञ और पितृ-तर्पण का भी विशेष महत्व है। कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। परिवार के सदस्यों को तिल का प्रसाद भी दिया जाता है। कुछ लोग इस दिन नई परियोजना या व्यापार की शुरुआत करते हैं क्योंकि माना जाता है कि अक्षय तृतीया पर शुरू किए गए कार्य सफल होते हैं।

भारत के विभिन्न हिस्सों में अक्षय तृतीया को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। दक्षिण भारत में इस दिन को अक्षय तृतीयम कहा जाता है। उत्तर भारत में लोग इस दिन को रामनवमी के साथ मनाते हैं। गुजरात में इसे रिड्डि सिद्धि दिवस भी कहा जाता है।

अक्षय तृतीया की तैयारी लोग महीनों पहले से ही शुरू कर देते हैं। सोने की दुकानों में इस दिन की तैयारी बहुत होती है। बैंक और गहनों की दुकानें भी विशेष व्यवस्था करती हैं। इस दिन की खरीदारी को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहता है।

अंत में, अक्षय तृतीया एक ऐसा पवित्र दिन है जो हिंदू परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। साल 2026 में यह महत्वपूर्ण दिन 20 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन को पूरे देश में लाखों लोग बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। इसलिए 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाने की तैयारी आज से ही शुरू कर दें और इस पवित्र दिन को सार्थक बनाएं।