अमेरिका का U-टर्न, रूसी तेल पर दी गई छूट
अमेरिका का अचानक बदलाव और रूसी तेल पर छूट
दुनिया की सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्था अमेरिका ने एक बार फिर से अपनी नीति में बड़ा परिवर्तन किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट के बीच अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। यह निर्णय पिछली नीति के सीधे विपरीत है, जहां अमेरिका ने 11 अप्रैल के बाद रूसी तेल आयात पर किसी भी तरह की छूट देने से साफ इनकार कर दिया था। लेकिन हालात बदलते ही अमेरिकी प्रशासन ने अपना रुख मोड़ दिया और अब इस छूट को 16 मई तक के लिए बढ़ाने का निर्णय ले लिया है।
यह कदम अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए माना जा रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने नए नोटिफिकेशन के माध्यम से यह घोषणा की है कि भारत और अन्य देश रूसी तेल का आयात जारी रख सकते हैं। यह निर्णय आर्थिक तथा भू-राजनीतिक कारणों का एक जटिल मिश्रण प्रतीत होता है।
अमेरिका की यह नीति में उतार-चढ़ाव दरअसल वैश्विक ऊर्जा बाजार की नाजुक स्थिति को दर्शाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता पूरी दुनिया के लिए खतरे का कारण बन सकती है। अमेरिका, इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए, तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से बचना चाहता है।
रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध की पृष्ठभूमि
रूस-यूक्रेन संकट के बाद से अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों में तेल और गैस जैसी प्रमुख वस्तुओं पर भी प्रतिबंध शामिल थे। अमेरिका ने रूसी तेल आयात पर सबसे सख्त रुख अपनाया और कई अन्य देशों को भी इसके लिए दबाव डाला। हालांकि, भारत जैसे देशों ने अपनी आर्थिक जरूरतों को देखते हुए रूसी तेल का आयात जारी रखा।
इस बीच, अमेरिका ने कुछ देशों को छूट भी दी थी। यह छूट अस्थायी थी और नियमित अंतराल पर समीक्षा की जाती थी। पहली बार जब अमेरिका ने इस छूट को आगे न बढ़ाने का संकेत दिया, तो वैश्विक बाजार में हलचल मच गई। लेकिन अब जब होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट गहरा गया है, तो अमेरिका ने अपनी रणनीति बदली है।
भारत समेत कई देश इस छूट से काफी हद तक राहत महसूस कर रहे हैं। भारत का तेल आयात बड़े हिस्से में रूस पर निर्भर हो गया है। इस छूट के कारण भारत सस्ते दामों पर तेल खरीद सकता रहेगा और अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रख सकता है।
होर्मुज संकट और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग एक-तिहाई तेल व्यापार का रास्ता है। इस संकीर्ण मार्ग पर किसी भी तरह की अस्थिरता तेल की कीमतों में भारी उछाल लाती है। हाल के महीनों में इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव में इजाफा हुआ है। ईरान से संबंधित विभिन्न घटनाओं के कारण यह संकट और गहरा गया है।
अमेरिका को डर है कि अगर तेल की आपूर्ति में बाधा आए, तो पेट्रोल की कीमतें आसमान छू जाएंगी। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है और महंगाई में बढ़ोतरी हो सकती है। इसी वजह से अमेरिका ने रूसी तेल पर लगाई गई प्रतिबंध की कड़ाई में कुछ ढील दी है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए यह कदम सकारात्मक साबित हो सकता है। तेल की आपूर्ति में निरंतरता बनी रहने से कीमतें स्थिर रह सकती हैं। यह भारत जैसे विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां महंगी ऊर्जा की कीमतें महंगाई को बढ़ाती हैं।
अमेरिका की यह नीति परिवर्तन साफ करता है कि व्यावहारिक राजनीति और आर्थिक हित अक्सर विचारधारा से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। अमेरिका अपने सरकारी हित और वैश्विक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है। यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि भू-राजनीतिक संकटों के बीच भी व्यावहारिक समाधान संभव हैं।
16 मई तक की यह छूट एक अस्थायी व्यवस्था है। इसके बाद क्या होगा, यह होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और वैश्विक राजनीति पर निर्भर करेगा। लेकिन फिलहाल यह कदम तेल आयात करने वाले देशों को कुछ राहत देता है और वैश्विक बाजार में स्थिरता लाने में मदद कर सकता है।




