भारत नक्सल-मुक्त: शाह का दावा बस्तर दौरे पर
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के दौरे पर एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि भारत अब नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो चुका है और वह सीना तान कर यह बात कह सकते हैं। शाह के अनुसार, आने वाले पांच सालों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बन जाएगा। उन्होंने सुरक्षा बलों और ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट को नक्सलवाद पर नियंत्रण पाने का प्रमुख कारण बताया है।
बस्तर का दौरा करते समय शाह ने सुरक्षा बलों के साथ भी बातचीत की और उनके योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि भारतीय सुरक्षा बल नक्सलवाद से निपटने में अत्यंत सफल रहे हैं और उनकी कड़ी मेहनत ने नक्सली समस्या को काबू में लाया है। शाह ने यह भी कहा कि सरकार आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।
ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट की सफलता
ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलवाद से निपटने के लिए शुरू किया गया एक प्रमुख अभियान है। इस अभियान के तहत सुरक्षा बलों ने बस्तर और अन्य नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में कड़ी कारवाई की है। इस अभियान ने नक्सलियों के नेटवर्क को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शाह के अनुसार, इस ऑपरेशन के कारण नक्सली गतिविधियों में काफी कमी आई है। पिछले कुछ सालों में नक्सली हमलों की संख्या में भी गिरावट देखी गई है। सुरक्षा बलों ने बड़े-बड़े नक्सली नेताओं को पकड़ा है और उन्हें न्याय के सामने लाया है। इस कारण नक्सलवादी आंदोलन कमजोर पड़ गया है।
बस्तर क्षेत्र में पिछले कुछ साल में आदिवासी समुदाय की सुरक्षा में भी सुधार आया है। सुरक्षा बलों की मजबूत उपस्थिति के कारण आम नागरिकों को आत्मविश्वास मिला है। अब लोग अपने क्षेत्रों में शांतिपूर्ण तरीके से अपना काम-काज कर सकते हैं। बाजारों और सड़कों पर भी बेहतर सुरक्षा की व्यवस्था की गई है।
बस्तर का विकास और भविष्य
शाह ने आश्वासन दिया है कि बस्तर क्षेत्र को आने वाले पांच सालों में देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार विभिन्न विकास परियोजनाओं पर काम कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और कृषि के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बस्तर में आदिवासी आबादी काफी अधिक है। इस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। आदिवासी बच्चों के लिए छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सरकार ने काम किया है। बस्तर के विभिन्न गांवों में स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। आदिवासी महिलाओं और बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
कृषि और पशुपालन बस्तर की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। सरकार ने किसानों के लिए बेहतर बीज, खाद और आधुनिक कृषि तकनीक उपलब्ध कराने का काम किया है। पशुपालन के क्षेत्र में भी प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी जा रही है।
सुरक्षा बलों का महत्वपूर्ण योगदान
शाह ने सुरक्षा बलों की निस्वार्थ सेवा को सलाम किया है। केंद्रीय परामर्शदाता बल (सीआरपीएफ), भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सलवाद से निपटने में अहम भूमिका निभाई है। इन बलों के जवानों ने अपनी जानों की परवाह किए बिना बस्तर और अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित की है।
पिछले कुछ सालों में सुरक्षा बलों के ऑपरेशन से कई बड़े नक्सली नेताओं को पकड़ा गया है। उनके हथियारों के भंडार को नष्ट किया गया है। नक्सली समूहों के आपसी संघर्ष और कमजोरी को देखते हुए कहा जा सकता है कि सुरक्षा बलों का रणनीति सफल साबित हुआ है।
शाह ने कहा कि नक्सलवाद से पूरी तरह निपटने के लिए सुरक्षा के साथ-साथ विकास भी जरूरी है। सरकार इसी दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है। आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करके लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। इससे नक्सलवाद की मुख्य जड़ें कमजोर पड़ रही हैं।
बस्तर का यह दौरा शाह के दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है कि सरकार इस क्षेत्र के विकास को कितना महत्व दे रही है। आदिवासी समुदाय की समृद्धि और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। आने वाले समय में बस्तर निश्चित रूप से एक समृद्ध और विकसित क्षेत्र बन सकता है।




