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Wednesday, 10 June 2026
विश्व

अराघची तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे, ट्रंप नाखुश

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Komal
संवाददाता
📅 28 April 2026, 7:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
अराघची तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे, ट्रंप नाखुश
📷 aarpaarkhabar.com

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पिछले 48 घंटों में तीसरी बार पाकिस्तान की धरती पर उतरे हैं। यह दौरा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। अराघची के बार-बार पाकिस्तान आने का मतलब है कि दक्षिण एशिया में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक खेल चल रहा है।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान की होर्मुज जलडमरूमध्य संबंधी शर्तों से नाखुश दिख रहे हैं। यह स्थिति विश्व राजनीति में एक नई जटिलता ला रही है, जहां हर देश अपने हितों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है। ईरान का यह आक्रामक कूटनीतिक दृष्टिकोण पश्चिमी देशों को चिंतित कर रहा है।

ईरान-अमेरिका संघर्ष का नया दौर

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर यह तनाव अब नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। ईरान का यह क्षेत्र नियंत्रित करना मतलब है विश्व अर्थव्यवस्था पर दबाव डालने की शक्ति रखना।

ट्रंप की नीति हमेशा से ही अमेरिकी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की रही है। ईरान के साथ परमाणु समझौते से पीछे हटना, कड़े प्रतिबंध लगाना, और अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की नियंत्रण संबंधी शर्तों को न मानना - ये सब उसी नीति का हिस्सा हैं। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को किसी भी देश की शर्तें स्वीकार नहीं करनी चाहिए।

दूसरी ओर, ईरान अपनी प्रादेशिक संप्रभुता को लेकर बेहद संवेदनशील है। होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के तटीय क्षेत्र के बेहद पास है, और ईरान का मानना है कि इस क्षेत्र में उसका पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए। यह मुद्दा सिर्फ भौगोलिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय गर्व का भी सवाल है।

पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका

पाकिस्तान इस पूरे संकट में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अराघची के बार-बार दौरे का मतलब है कि ईरान पाकिस्तान को अपने पक्ष में लाना चाहता है। पाकिस्तान भी अपने पड़ोसी मुल्कों के साथ एक संतुलित नीति अपनाना चाहता है, लेकिन यह काम बेहद मुश्किल हो गया है।

पाकिस्तान का अपना अर्थव्यवस्था पर संकट है। वह सऊदी अरब और खाड़ी के देशों की मदद पर निर्भर है, जो अमेरिका के सहयोगी हैं। दूसरी ओर, ईरान के साथ उसकी सीमा है और आर्थिक रिश्ते भी हैं। ऐसे में पाकिस्तान को एक पतली कतार पर चलना पड़ रहा है।

अराघची के पाकिस्तान दौरों की संख्या बढ़ना इस बात का संकेत है कि ईरान पाकिस्तान से किसी खास तरह की मदद चाहता है। यह मदद राजनीतिक समर्थन की हो सकती है, या फिर किसी अन्य तरीके से ईरान को अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचाने के लिए।

भारत सहित पूरे क्षेत्र पर असर

इस पूरी स्थिति का असर सिर्फ ईरान-अमेरिका पर नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ रहा है। भारत भी इस मामले में गहरी दिलचस्पी रखता है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत की अधिकांश ऊर्जा आपूर्ति आती है। यदि यह क्षेत्र अस्थिर हो जाए तो भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हो सकता है।

भारत ने हमेशा से ईरान के साथ अच्छे संबंध रखे हैं, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है। भारत ने ईरान के साथ व्यापार को कम किया है ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों का शिकार न हो जाए। लेकिन अब नई परिस्थितियों में भारत को अपनी नीति फिर से देखनी पड़ सकती है।

ट्रंप के नाखुशी का मतलब है कि अमेरिका भविष्य में और भी सख्त रुख अपनाने वाला है। इसका मतलब है कि ईरान से जुड़ी किसी भी तरह की गतिविधि पर अमेरिका की नजर रहेगी। ऐसे में पाकिस्तान, भारत और खाड़ी के देशों को भी सावधानी से अपनी नीति बनानी पड़ेगी।

अराघची के पाकिस्तान दौरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में एक नई राजनीतिक गतिविधि का संकेत हैं। आने वाले समय में यह क्षेत्र और भी जटिल होने वाला है, जहां हर देश को अपने राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच संतुलन बनाना होगा।