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Thursday, 20 August 2026
समाचार

असम प्लेन क्रैश: भोजपुर के शहीद दानिश आलम को राजकीय सम्मान

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Komal
संवाददाता
📅 15 June 2026, 5:32 AM ⏱ 1 मिनट 👁 534 views
असम प्लेन क्रैश: भोजपुर के शहीद दानिश आलम को राजकीय सम्मान
📷 aarpaarkhabar.com

भोजपुर जिले के कायमनगर गांव में गहरी उदासी का माहौल है। माताओं की चीख और बहनों की सिसकियां इस गांव की गलियों में गूंज रही हैं। असम के जोराहाट में वायुसेना के AN-32 विमान में हुई दुर्घटना में भोजपुर का एक वीर सपूत शहीद हो गया है। अग्निवीर जवान दानिश आलम की मातृभूमि के लिए कुरबानी को अब पूरा देश सलाम कर रहा है। सोमवार को उसे पैतृक गांव कायमनगर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

दानिश आलम मात्र 21 साल का एक नवयुवक था जिसने अग्निवीर के तहत भारतीय वायुसेना में शामिल होकर अपनी जिंदगी देश के नाम कर दी थी। उसकी पोस्टिंग जोराहाट में वायुसेना स्टेशन पर थी। जोराहाट स्थित वायुसेना बेस पर AN-32 विमान का संचालन किया जाता है जो परिवहन और गश्ती कार्यों के लिए उपयोग होता है। गत बुधवार को यह विमान दुर्भाग्यवश दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान पर सवार सभी लोग मारे गए। दानिश आलम भी इसी विमान में मौजूद थे।

असम में हुई भीषण दुर्घटना

असम के जोराहाट जिले में वायुसेना का AN-32 विमान विमान दुर्घटना एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना रही है। यह विमान एक परिवहन विमान है जिसका इस्तेमाल सेना के कर्मियों और सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए होता है। इस विमान में कुल 13 लोग सवार थे। हादसे के बाद से सभी लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है।

दानिश आलम के माता-पिता और परिवार के सदस्य इस दर्दनाक खबर को सुनकर टूट गए। भोजपुर के कायमनगर गांव में जब यह समाचार पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। पड़ोसियों ने परिवार के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मां की पीड़ा की कोई सीमा नहीं रह गई। बहनें अपने भाई की यादों में रो रहीं हैं। दानिश आलम का सपना देश की सेवा करना था और उसने अपना सपना पूरा किया, लेकिन इस रूप में नहीं कि परिवार चाहता था।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

सोमवार को दानिश आलम को भोजपुर के कायमनगर गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। वायुसेना के सैनिकों ने उसके पार्थिव शरीर को ध्वज से ढंका। सैनिकों ने राइफल सलामी दी। तिरंगे को शरीर से हटाकर सम्मान के साथ तह किया गया। पूरा गांव इस समय में एकजुट था।

परिवार के सदस्यों के अलावा प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सैकड़ों गांववासी दानिश आलम को अंतिम विदाई देने के लिए मौजूद थे। वायुसेना के अधिकारियों ने परिवार को समवेदना दी। स्थानीय प्रशासन की ओर से भी आवश्यक सहायता प्रदान की गई। यह पल एक ऐसा पल था जो दानिश आलम के परिवार को जीवनभर के लिए याद रहेगा।

भारतीय वायुसेना ने अपने इस वीर सपूत को नमन किया। सोशल मीडिया पर भी दानिश आलम की शहादत को लेकर काफी संवेदनाएं व्यक्त की जा रहीं हैं। लोगों ने महसूस किया कि भारत के नौजवान किस तरह अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सेवा करते हैं।

शहीद की विरासत और राष्ट्र की कृतज्ञता

दानिश आलम के लिए देश में काफी सम्मान की बातें कही जा रहीं हैं। वह केवल एक सैनिक नहीं थे, बल्कि वह एक राष्ट्र प्रेमी थे। अग्निवीर योजना के तहत भर्ती होकर उन्होंने अपनी युवा शक्ति को देश के सुरक्षा कवच को मजबूत करने के लिए समर्पित कर दी थी। यह योजना युवाओं को सेना में शामिल होने का मौका देती है।

दानिश आलम की शहादत से देश को यह संदेश मिलता है कि हमारे सैनिक किस तरह हर पल मरने-मारने के लिए तैयार रहते हैं। उनकी निष्ठा, उनकी कर्तव्यबोध और उनका साहस सबकी सराहना के योग्य है। परिवार वालों के लिए यह बहुत बड़ी कीमत है, लेकिन देश के लिए यह एक अमूल्य कुरबानी है।

सरकार की ओर से दानिश आलम के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी। वायुसेना के अधिकारियों ने परिवार को भरोसा दिलाया है कि वह उनके साथ हमेशा खड़े रहेंगे। दानिश आलम की शहादत को भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। भोजपुर का यह बेटा हमेशा के लिए अमर हो गया है।