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Sunday, 05 July 2026
समाचार

बजरंग सेतु में दरारें, उद्घाटन से पहले ही संकट

author
Komal
संवाददाता
📅 11 April 2026, 6:17 AM ⏱ 1 मिनट 👁 431 views
बजरंग सेतु में दरारें, उद्घाटन से पहले ही संकट
📷 aarpaarkhabar.com

ऋषिकेश में एक बार फिर से बजरंग सेतु को लेकर चिंता का माहौल बन गया है। इस अत्याधुनिक पुल में तीसरी बार दरारें आई हैं, जिसके बाद प्रशासन को आवाजाही को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा है। करीब 69 करोड़ की लागत से बन रहे इस सेतु का अभी तक आधिकारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है, लेकिन इसकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बजरंग सेतु को ऋषिकेश की पहचान बनाने की तैयारी की जा रही थी और यह लक्ष्मण झूला का एक बेहतरीन विकल्प माना जा रहा था। इस पुल में गंगा के दोनों किनारों को जोड़ने वाला एक अद्भुत डिजाइन और आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इसमें कांच का फुटपाथ भी बनाया गया था जो पर्यटकों के लिए एक अनोखा अनुभव देने वाला था। लेकिन इसी कांच के फुटपाथ में बार-बार दरारें आना एक गंभीर मुद्दा बन गया है।

निर्माण में लगातार समस्याएं

बजरंग सेतु के निर्माण में एक के बाद एक समस्याएं सामने आ रही हैं। पहली दरार जब आई थी, तब निर्माणकर्ताओं का कहना था कि यह एक छोटी सी खामी है जो ठीक कर दी जाएगी। लेकिन दूसरी बार जब दरारें फिर से दिखाई दीं, तो चिंता का स्तर बढ़ गया। और अब तीसरी बार की दरारें आने के बाद तो प्रशासन को भी इस पुल की संरचनात्मक मजबूती को लेकर गंभीर संदेह हो गया है।

आवाजाही को रोकने के बाद अब इंजीनियरों की एक टीम को इस समस्या की जांच के लिए नियुक्त किया गया है। विशेषज्ञों को यह पता लगाना है कि आखिरकार बार-बार दरारें क्यों आ रही हैं। क्या यह निर्माण सामग्री में कोई खामी है, या फिर डिजाइन में ही कोई समस्या है। इन सभी सवालों के जवाब खोजने की जिम्मेदारी अब संबंधित अधिकारियों के ऊपर आ गई है।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों में निराशा

बजरंग सेतु को लेकर ऋषिकेश के पर्यटकों और स्थानीय लोगों में काफी उत्साह था। यह पुल न केवल आधुनिक था, बल्कि यह ऋषिकेश की सुंदरता को भी और बढ़ाने वाला था। पर्यटक इस पुल पर चलते हुए गंगा की सुंदरता को देख सकते थे और कांच के फुटपाथ पर चलने का अनुभव ले सकते थे। लेकिन अब इन दरारों के कारण यह सब अधूरा रह गया है।

स्थानीय व्यापारियों को भी इस पुल से काफी उम्मीदें थीं क्योंकि इससे पर्यटकों का आना बढ़ने वाला था। लेकिन यह समस्याएं उनकी उम्मीदों को धराशायी कर गई हैं। अब सवाल उठ रहा है कि आखिरकार इस पुल का उद्घाटन कब होगा और इसे कितनी और मजबूती की जरूरत है।

जांच और सुधार का सफर

सरकारी अधिकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इस पुल की पूरी जांच नहीं हो जाती और यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक इसका उद्घाटन नहीं किया जाएगा। इस फैसले से यह साफ हो गया है कि जनता की सुरक्षा सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों की टीम अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आखिरकार क्या समस्या है। कांच के फुटपाथ में दरारें आने के कारण को समझना जरूरी है। क्या यह तापमान में बदलाव के कारण हो रहा है, या फिर निर्माण में कोई गलती हुई है। ये सब बातें अभी तय की जानी हैं।

69 करोड़ की लागत से बने इस पुल की गुणवत्ता को लेकर पूरी तरह संतुष्टि होना चाहिए। निर्माणकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह पुल न केवल सुंदर है, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत भी है। ऋषिकेश के लिए यह पुल एक महत्वपूर्ण परियोजना है और इसका सही तरीके से पूरा होना बहुत जरूरी है।

इस पूरी घटना से सीखने योग्य बात यह है कि सरकारी परियोजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बजरंग सेतु की इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाए जा रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है। आशा है कि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान हो जाएगा और ऋषिकेश को इस आधुनिक पुल पर गर्व करने का मौका मिलेगा।