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Thursday, 05 November 2026
समाचार

भरत तिवारी की मां का दावा: एसपी का धमकी भरा बयान

author
Komal
संवाददाता
📅 27 June 2026, 6:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 537 views
भरत तिवारी की मां का दावा: एसपी का धमकी भरा बयान
📷 aarpaarkhabar.com

भरत तिवारी की मां आशा देवी ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि स्थानीय एसपी ने उन्हें धमकाया और कहा कि चुप रहो नहीं तो तुम्हारे साथ भी वही होगा जो तुम्हारे बेटे के साथ हुआ। यह बयान काफी संवेदनशील मामले को लेकर आया है जो पूरे क्षेत्र में हलचल मचा गया है।

आशा देवी ने बताया कि जब वह अपने बेटे के लिए न्याय की मांग करने जाती हैं, तो उन्हें विभिन्न तरीकों से दबाया जा रहा है। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन उनके साथ सहानुभूति नहीं दिखा रहा है, बल्कि उल्टे उनके मुंह बंद करने की कोशिश की जा रही है। यह स्थिति किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय होती है, जो अपने बच्चे के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हों।

एसपी के खिलाफ आशा देवी का आरोप

आशा देवी का कहना है कि उन्हें पुलिस अधीक्षक द्वारा सार्वजनिक रूप से धमकाया गया था। उन्होंने अपने बयान में कहा कि एसपी ने उनसे कहा कि अगर वह चुप नहीं रहती हैं और अपने बेटे के लिए न्याय की मांग करती रहती हैं, तो उनके साथ भी वही हाल होगा जो भरत तिवारी के साथ हुआ। यह एक प्रत्यक्ष धमकी है जो किसी सरकारी अधिकारी द्वारा दी गई है।

यह आरोप बहुत ही गंभीर है क्योंकि यह न केवल एक माता-पिता के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि यह संवैधानिक अधिकारों का भी हनन करता है। भारतीय संविधान के अनुसार, प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी शिकायत सुनने का अधिकार है। किसी को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

आशा देवी का कहना है कि वह अकेली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनके साथ ऐसी कई महिलाएं हैं जो अपने बेटों के लिए न्याय की मांग कर रही हैं, लेकिन उन्हें भी इसी तरह की धमकियां दी जा रही हैं। यह एक प्रणालीगत समस्या है जो पूरे तंत्र को प्रभावित कर रही है।

मुख्यमंत्री को दी गई चेतावनी

आशा देवी ने स्पष्ट कहा है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो इसकी जवाबदेही सीधे सरकार की होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें भी अपने कार्यों का जवाब देना होगा। यह एक बहुत ही साहसिक बयान है जो माता-पिता के आक्रोश को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री को यह संदेश भेजना महत्वपूर्ण है कि सरकार की दायित्व है कि वह अपने नागरिकों को न्याय प्रदान करे। जब पुलिस स्वयं ही न्याय की प्रक्रिया में बाधा बनती है, तो राज्य का दायित्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

आशा देवी ने कहा कि वह हार नहीं मानेंगी। भले ही उन्हें धमकाया जा रहा है, भले ही उन्हें दबाव दिया जा रहा है, लेकिन वह अपने बेटे के लिए न्याय की लड़ाई लड़ती रहेंगी। यह दृढ़ता और साहस ही है जो उन्हें इस कठिन समय में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।

न्याय व्यवस्था पर सवाल

यह पूरा मामला भारतीय न्याय व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब पुलिस अधीक्षक स्वयं ही किसी को धमकाते हैं, तो आम नागरिक के अधिकारों का क्या होता है? यह एक चिंताजनक स्थिति है।

न्याय के लिए आवश्यक है कि न्यायिक और पुलिस व्यवस्था पारदर्शी और जवाबदेह हो। जब तक यह व्यवस्था पूरी तरह से निष्पक्ष नहीं होगी, तब तक आम आदमी को सच्चा न्याय नहीं मिल सकता। आशा देवी की लड़ाई केवल उनके बेटे के लिए नहीं है, बल्कि यह पूरी न्याय व्यवस्था को सुधारने की लड़ाई है।

आशा देवी के बयान के बाद, सवाल यह है कि सरकार इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करेगी। क्या मुख्यमंत्री इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे? क्या आसपास के एसपी के खिलाफ कोई जांच होगी? ये सभी सवाल अहम हैं और जनता को इनके उत्तर की प्रतीक्षा है।

कुल मिलाकर, यह मामला सरकार, पुलिस प्रशासन और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर एक बड़ा दाग है। आशा देवी जैसी माताओं को न्याय मिलना चाहिए, और उन्हें किसी भी तरह की धमकी नहीं दी जानी चाहिए। यही वह आशा है जिसके लिए यह संघर्ष जारी है।