सीबीएसई 12वीं पुनर्मूल्यांकन में गोरखधंधा, दलाल सक्रिय
सीबीएसई की बारहवीं परीक्षा के परिणामों के बाद देश भर में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। पुनर्मूल्यांकन के नाम पर चल रहे इस जालसाजी में अभिभावकों को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। अमर उजाला की स्टिंग ऑपरेशन में यह मामला उजागर हुआ है कि कैसे संगठित नेटवर्क के दलाल सीयूईटी परीक्षा केंद्रों के बाहर अभिभावकों को अपना शिकार बना रहे हैं।
पुनर्मूल्यांकन के नाम पर बड़ा धोखाधड़ी
जो छात्र सीबीएसई की बारहवीं परीक्षा में अपेक्षा के अनुरूप अंक नहीं ला पाते हैं, वे पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करते हैं। यह एक वैध प्रक्रिया है जो सीबीएसई द्वारा संचालित होती है। लेकिन अब इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके जालसाज अभिभावकों को ठग रहे हैं।
इन दलालों का कहना है कि वे विशेष संपर्क रखते हैं जिनके माध्यम से पुनर्मूल्यांकन में अंक बढ़वाए जा सकते हैं। वे हजारों से लेकर लाखों रुपये तक वसूल करते हैं। अमर उजाला की जांच में पता चला है कि ये दलाल चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और अन्य प्रमुख शहरों में सक्रिय हैं।
इन जालसाजों की रणनीति बेहद चालाकी भरी है। वे सीयूईटी परीक्षा के केंद्रों के बाहर घूमते हैं जहां हजारों की संख्या में अभिभावक और छात्र आते हैं। वे व्यक्तिगत रूप से अभिभावकों से संपर्क करते हैं और अपनी काल्पनिक शक्तिशाली कनेक्शन के बारे में बताते हैं। कुछ दलाल तो परीक्षा केंद्र के पास खुद को अर्धसरकारी अधिकारी भी बताते हैं।
दलालों का संगठित नेटवर्क
अमर उजाला की छानबीन में यह तथ्य उजागर हुआ कि ये दलाल पूरी तरह से संगठित हैं। एक केंद्रीय नेतृत्व है जो अलग-अलग शहरों में अपने एजेंटों को नियुक्त करता है। प्रत्येक एजेंट को एक निर्धारित क्षेत्र दिया गया है। वे अपने क्षेत्र से अधिकतम संख्या में पीड़ितों को लूटने की जिम्मेदारी लेते हैं।
ये दलाल विभिन्न नकली दस्तावेज भी बनवाते हैं। वे अभिभावकों को दिखाते हैं कि सीबीएसई से पुनर्मूल्यांकन की अनुमति मिल गई है। कुछ मामलों में तो ये जालसाज नकली सीबीएसई पत्र भी तैयार करते हैं। अभिभावक को यह विश्वास दिलाया जाता है कि उनके बेटे या बेटी के अंक तीस से पचास प्रतिशत तक बढ़ाए जा सकते हैं।
यह घोटाला केवल गरीब और मध्यम वर्गीय अभिभावकों को ही नहीं, बल्कि संपन्न अभिभावकों को भी अपना शिकार बना रहा है। पैसे की लालच में लोग इन दलालों को आसानी से विश्वास कर लेते हैं। एक अभिभावक ने बताया कि उसने तीन लाख रुपये दिए थे, लेकिन उसके बेटे की कॉपी का कोई पुनर्मूल्यांकन नहीं हुआ।
सीयूईटी परीक्षा केंद्रों पर चल रहा खेल
सीयूईटी परीक्षा के लिए देश भर में परीक्षा केंद्र खोले गए हैं। ये केंद्र विश्वविद्यालयों में स्थित हैं। हर दिन हजारों छात्र इन केंद्रों में परीक्षा देते हैं। इन केंद्रों के बाहर का माहौल एक बाजार जैसा हो जाता है। दलाल, कोचिंग सेंटर के प्रतिनिधि और अन्य दुष्ट तत्व यहां अभिभावकों को अपना शिकार बनाते हैं।
अमर उजाला की स्टिंग ऑपरेशन में यह बात सामने आई है कि इन दलालों के पास परीक्षा केंद्रों के प्रबंधकों के साथ भी तालमेल है। कुछ मामलों में तो केंद्र के कर्मचारी भी इन जालसाजों को अभिभावकों से मिलवाने में मदद करते हैं। यह एक विश्वासघात की बात है जो शिक्षा व्यवस्था को कलंकित करती है।
इन दलालों का शिकार ज्यादातर वे अभिभावक होते हैं जिनके बच्चों के अंक कम आए हैं। ऐसे में अभिभावक बेताब रहते हैं और किसी भी उम्मीद पर पकड़ने के लिए तैयार होते हैं। ये जालसाज इसी मनोविज्ञान का लाभ उठाते हैं।
सीबीएसई की प्रक्रिया को समझना जरूरी
सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी है। अगर किसी छात्र को अपने अंकों में संदेह है, तो वह सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए एक निर्धारित राशि का भुगतान करना पड़ता है।
पुनर्मूल्यांकन के लिए एक स्वतंत्र परीक्षक को नियुक्त किया जाता है। यह परीक्षक कॉपी की फिर से जांच करता है और अंक देता है। यदि अंक बढ़ते हैं तो फर्क भर दिया जाता है। यदि अंक कम आते हैं तो मूल अंक ही रखे जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी दलाल या बिचौलिये की कोई भूमिका नहीं होती।
इसलिए किसी भी अभिभावक को ऐसे दलालों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए जो पुनर्मूल्यांकन में अंक बढ़ाने का वादा करते हैं। यह पूरी तरह से नकली और धोखाधड़ी वाली बात है। अभिभावकों को चाहिए कि वे सीधे सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट से संपर्क करें।
अमर उजाला की यह स्टिंग ऑपरेशन एक महत्वपूर्ण कदम है जो शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे इस घोटाले को उजागर करता है। अब जरूरत है कि सीबीएसई और पुलिस प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लें और इन जालसाजों को गिरफ्तार करें। साथ ही, अभिभावकों को सचेत किया जाना चाहिए ताकि वे ऐसे दलालों का शिकार न बनें।




