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Wednesday, 19 August 2026
राजनीति

चंडीगढ़: सरकारी स्कूल के छात्र स्टार्टअप से कमाई

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों के किशोर छात्र स्टार्टअप चलाकर हर माह हजारों रुपये की कमाई कर रहे हैं। जानिए कैसे उन्हें मिली नवाचार की समझ।

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Komal
संवाददाता
📅 19 August 2026, 7:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 821 views
चंडीगढ़: सरकारी स्कूल के छात्र स्टार्टअप से कमाई
📷 aarpaarkhabar.com

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में एक अद्भुत परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यहाँ के छात्र-छात्राएं केवल किताबें पढ़ नहीं रहे, बल्कि अपने सपनों को व्यावहारिक रूप देकर स्टार्टअप चला रहे हैं। इन किशोर उद्यमियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वे महीने में हजारों रुपये की कमाई कर रहे हैं। यह सफलता की कहानी न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में होने वाले सकारात्मक बदलाव का भी संकेत है।

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में लगभग 301 बच्चे ऐसे हैं जो वर्तमान में अपने स्वयं के स्टार्टअप को संचालित कर रहे हैं। ये किशोर युवा अपनी रचनात्मकता और उद्यमशील मानसिकता का उपयोग करके विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। डिजिटल मार्केटिंग से लेकर हस्तशिल्प, ट्यूशन सेवाओं से लेकर ई-कॉमर्स तक, ये छात्र अपने-अपने क्षेत्रों में माहिर बन गए हैं।

शिक्षा से व्यवसायिक सफलता की यात्रा

चंडीगढ़ के विभिन्न सरकारी स्कूलों में स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। शिक्षकों द्वारा छात्रों को उद्यमशीलता के बारे में पढ़ाया जाता है और उन्हें अपने विचारों को व्यावहारिक रूप देने के लिए प्रेरित किया जाता है। स्कूल प्रशासन ने एक ऐसा माहौल तैयार किया है जहाँ असफलता को सीखने का अवसर माना जाता है, न कि पराजय।

एक छात्र राज कुमार, जो दसवीं कक्षा में पढ़ता है, ने अपने स्कूल के ही कुछ सहपाठियों के साथ मिलकर एक छोटा सॉफ्टवेयर डिवेलपमेंट व्यवसाय शुरू किया है। वह बताता है कि शुरुआत में उसे बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन स्कूल के शिक्षकों और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों ने उसे सही रास्ता दिखाया। आज वह प्रतिमाह 15,000 से 20,000 रुपये तक की आय कर रहा है। उसके प्रयासों से न केवल वह आत्मनिर्भर बन गया है, बल्कि उसने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार किया है।

इसी तरह, एक अन्य छात्रा नीता ने हस्तशिल्प के क्षेत्र में अपना स्टार्टअप शुरू किया है। वह पारंपरिक भारतीय कलाओं को आधुनिक डिजाइनों के साथ मिलाकर सुंदर उत्पाद बनाती है और उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचती है। उसका मासिक मुनाफा 10,000 से 12,000 रुपये तक पहुँच गया है। नीता का कहना है कि स्कूल में शुरू किए गए इस कार्यक्रम ने उसे अपनी प्रतिभा को पहचानने और उसका सदुपयोग करने में मदद की है।

नवाचार की समझ कैसे मिली इन किशोरों को

चंडीगढ़ के शिक्षा विभाग ने बहुत ही सूझबूझ से स्कूली पाठ्यक्रम में उद्यमशीलता संबंधी विषय को शामिल किया है। कक्षा 9 से ही छात्रों को बिजनेस मैनेजमेंट, फाइनेंशियल प्लानिंग और डिजिटल मार्केटिंग की बेसिक शिक्षा दी जाती है। प्रत्येक स्कूल में एक स्टार्टअप क्लब की स्थापना की गई है, जहाँ छात्र अपने विचारों को साझा करते हैं और उन्हें क्रियान्वित करने की योजना बनाते हैं।

इसके अलावा, विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठन और तकनीकी कंपनियों ने भी इन स्कूलों में अपने विशेषज्ञ भेजकर सेमिनार और वर्कशॉप का आयोजन किया है। इन कार्यक्रमों में छात्रों को सफल उद्यमियों की कहानियाँ सुनाई जाती हैं, जो उन्हें अपने सपनों का पीछा करने के लिए प्रेरित करती हैं। मेंटरशिप प्रोग्राम के माध्यम से अनुभवी व्यावसायी छात्रों को गाइडेंस प्रदान करते हैं।

चंडीगढ़ के स्कूल शिक्षा निदेशक का कहना है कि उनका उद्देश्य ऐसे नागरिक तैयार करना है जो न केवल नौकरी की तलाश करें, बल्कि स्वयं के और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करें। इस दृष्टिकोण के तहत, स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके छात्रों को अपने व्यावहारिक कौशल विकसित करने की सुविधा दी जाती है।

सामाजिक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएँ

यह स्टार्टअप आंदोलन केवल व्यक्तिगत आय तक सीमित नहीं है। इन युवा उद्यमियों ने अपने समुदाय में भी सकारात्मक प्रभाव डाला है। कई छात्रों ने अपने गाँवों में सामाजिक विकास परियोजनाएँ शुरू की हैं। कुछ ने महिलाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम चलाए हैं, तो कुछ बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

एक प्रमुख सामाजिक प्रभाव यह है कि इस अभियान ने अन्य राज्यों के स्कूलों में भी इसी तरह की पहल करने के लिए प्रेरित किया है। शिक्षा विभाग अब इस मॉडल को देश भर में लागू करने की योजना बना रहा है। सरकार का विश्वास है कि यदि स्कूली स्तर पर ही उद्यमशीलता की संस्कृति को मजबूत किया जाए, तो भारत के भविष्य को दिशा देने वाले नवाचारी और आत्मनिर्भर नागरिक तैयार हो सकते हैं।

चंडीगढ़ के इन किशोर स्टार्टअप संस्थापकों की सफलता केवल संख्याओं में नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और समस्या समाधान की योग्यता में भी परिलक्षित होती है। वे सिद्ध कर रहे हैं कि उम्र कोई बाधा नहीं है यदि आपके पास दृढ़ संकल्प और सही दिशा-निर्देश हो। यह आंदोलन भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जहाँ सीखना और सृजन एक साथ चलते हैं।