शिकागो का वीडियो: दिल्ली-गुरुग्राम की बनिस्बत बेहतर सड़कें
अमेरिका के शिकागो शहर में रहने वाले भारतीय सेना के पूर्व सैनिक यशपाल सिंह मोर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो गया है। इस वीडियो में उन्होंने तूफान और भारी बारिश के बाद भी शिकागो की सड़कों और शहरी व्यवस्था को दिखाया है। उनके इस वीडियो ने भारत के प्रमुख शहरों दिल्ली और गुरुग्राम की बुनियादी ढांचे की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यशपाल सिंह मोर के इस वीडियो में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है। उन्होंने दिखाया कि शिकागो में भारी तूफान और बारिश के बाद भी सड़कें पूरी तरह सुरक्षित हैं। न तो कोई गड्ढा दिखता है, न ही सड़कों पर पानी भरा है। शहर की पूरी व्यवस्था बिल्कुल सामान्य तरीके से काम कर रही है। लेकिन जब भारत के दिल्ली और गुरुग्राम जैसे शहरों की बात आती है, तो स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई देती है।
भारतीय शहरों में बारिश की तबाही
भारत में जब भी बारिश का मौसम आता है, तो देश के प्रमुख शहरों में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। दिल्ली और गुरुग्राम जैसे शहरों में बारिश के कुछ घंटों बाद ही सड़कों पर पानी भर जाता है। कहीं तो सड़कें पूरी तरह टूट जाती हैं, तो कहीं विशाल गड्ढे बन जाते हैं। यह स्थिति सिर्फ मानसून के मौसम तक सीमित नहीं है, बल्कि साल भर चलती रहती है।
दिल्ली की सड़कों की हालत देश के सभी शहरों में सबसे खराब मानी जाती है। राजीव चौक से लेकर कश्मीरी गेट तक, हर जगह सड़कों पर टूट-फूट देखने को मिलती है। वहीं गुरुग्राम में भी स्थिति कुछ बेहतर नहीं है। इस शहर की सड़कें भी बारिश के मौसम में पूरी तरह खराब हो जाती हैं। पानी की निकासी की व्यवस्था इतनी खराब है कि कई इलाकों में दिनों तक पानी भरा रहता है।
जब यशपाल सिंह मोर के वीडियो को देखते हैं, तो भारतीय शहरों की तुलना में अंतर बिल्कुल स्पष्ट दिख जाता है। शिकागो में चाहे कितनी भी भारी बारिश क्यों न हो, शहर की पूरी व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहती है। इसका कारण है कि वहां के नागरिक निकाय और सरकार बुनियादी ढांचे में निवेश करते हैं और उसे बनाए रखते हैं।
अवसंरचना में अंतर
भारतीय शहरों और विकसित देशों की सड़कों में जो अंतर दिखता है, वह बुनियादी ढांचे में निवेश के अंतर के कारण है। शिकागो जैसे शहरों में सड़कें बनाने के लिए सर्वोत्तम सामग्री का उपयोग किया जाता है। ड्रेनेज सिस्टम इतना मजबूत होता है कि भारी बारिश में भी पानी जल्दी से निकल जाता है। सड़कों की देखभाल नियमित रूप से की जाती है।
दिल्ली और गुरुग्राम में स्थिति इसके ठीक विपरीत है। यहां सड़कें तेजी से खराब हो जाती हैं। ड्रेनेज सिस्टम में भी बड़ी खामियां हैं। जब बारिश होती है, तो पानी सड़कों पर ही रुक जाता है। इसके अलावा, कई जगहों पर तो सड़कों की मरम्मत में महीनों-साल भर का समय लग जाता है।
यशपाल सिंह मोर के वीडियो में यह संदेश साफ है कि विकसित देश अपने शहरों के बुनियादी ढांचे में कितना निवेश करते हैं। भारत को भी अपने शहरों के अवसंरचना में इसी तरह का ध्यान देने की जरूरत है। दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य भारतीय शहरों में सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम और पानी की निकासी की व्यवस्था को बेहतर बनाने की तत्काल आवश्यकता है।
भारत को क्या सीखना चाहिए
यशपाल सिंह मोर के इस वीडियो से भारत के लिए कई महत्वपूर्ण सीख हैं। पहली सीख यह है कि बुनियादी ढांचे में निवेश कभी बेकार नहीं जाता। अगर आज भारत के शहरों में सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम और पानी की निकासी में सुधार किया जाए, तो भविष्य में बहुत सारी समस्याओं से बचा जा सकता है।
दूसरी सीख यह है कि नियमित रखरखाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में अक्सर यह देखा जाता है कि नई सड़कें बनने के बाद उनकी देखभाल नहीं की जाती। इसी वजह से वे जल्दी खराब हो जाती हैं। अगर नियमित रूप से सड़कों की मरम्मत की जाए, तो उनकी उम्र बढ़ सकती है।
तीसरी सीख यह है कि शहरी योजना को गंभीरता से लेना चाहिए। जब भी किसी शहर को विकसित किया जाए, तो पहले से ही सड़कों, ड्रेनेज और पानी की निकासी की व्यवस्था को ध्यान में रखना चाहिए। भारत में कई शहरों को देखें, तो पता चलता है कि वहां की योजना ही ठीक से नहीं बनी थी।
यशपाल सिंह मोर का वीडियो अब भारतीय सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि भारत को अपने शहरों में इसी तरह की व्यवस्था कब मिलेगी। यह एक सकारात्मक संदेश है जो सरकार के सामने भी सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि क्या भारत के शहरी प्रबंधन अधिकारी इस संदेश को सुनते हैं और अपने शहरों को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाते हैं।




