🔴 ब्रेकिंग
रांची छात्रों का हाई कोर्ट में विरोध, सीएम का पुतला फूंकेंगे|बक्करवाला एनकाउंटर: भाऊ गैंग के दो शूटर गिरफ्तार|आज की टॉप न्यूज: सीमा सुरक्षा और खाप समाचार|गोविंदा दूसरी शादी करने वाले थे: सुनीता आहूजा का खुलासा|पाकिस्तान से खतरा, चीन से असली टक्कर: नरवणे|यूपी शहीद परिवार छात्राओं को स्कूटी योजना|हरियाणा खाप लिव-इन रिलेशन के खिलाफ लव मैरिज समर्थक|ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और चीन की भूमिका|प्याज का रस से बालों का झड़ना रोकें – जावेद हबीब का नुस्खा|UP में 9 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, 7 जिलों के SP-SSP बदले|रांची छात्रों का हाई कोर्ट में विरोध, सीएम का पुतला फूंकेंगे|बक्करवाला एनकाउंटर: भाऊ गैंग के दो शूटर गिरफ्तार|आज की टॉप न्यूज: सीमा सुरक्षा और खाप समाचार|गोविंदा दूसरी शादी करने वाले थे: सुनीता आहूजा का खुलासा|पाकिस्तान से खतरा, चीन से असली टक्कर: नरवणे|यूपी शहीद परिवार छात्राओं को स्कूटी योजना|हरियाणा खाप लिव-इन रिलेशन के खिलाफ लव मैरिज समर्थक|ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और चीन की भूमिका|प्याज का रस से बालों का झड़ना रोकें – जावेद हबीब का नुस्खा|UP में 9 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, 7 जिलों के SP-SSP बदले|
Saturday, 03 October 2026
समाचार

होर्मुज नाकेबंदी पर चीन की अमेरिका को चेतावनी

author
Komal
संवाददाता
📅 14 April 2026, 7:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 989 views
होर्मुज नाकेबंदी पर चीन की अमेरिका को चेतावनी
📷 aarpaarkhabar.com

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। सोमवार को चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने अमेरिका को खुली चेतावनी दी है कि वह इस मामले में दखल न दें। चीन का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की नाकेबंदी एक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा है और अमेरिका को इसमें अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

चीन के रक्षा मंत्री की इस चेतावनी के पीछे एक बड़ा संदर्भ है। हाल ही में अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी को मजबूत किया है। अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में नियमित गश्त लगा रही है और विभिन्न सैन्य अभियान चला रही है। चीन का मानना है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करके क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है। इस जलडमरूमध्य से विश्व का लगभग 21 प्रतिशत तेल का व्यापार होता है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और इसका कुल विस्तार लगभग 54 किलोमीटर है। सबसे संकीर्ण बिंदु पर यह केवल 21 किलोमीटर चौड़ा है।

इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल का बड़ा हिस्सा एशिया के देशों, विशेषकर चीन, भारत और जापान को जाता है। इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरे एशिया के लिए महत्वपूर्ण है। चीन के लिए यह जलमार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके ऊर्जा आयातों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।

एडमिरल डोंग जून की चेतावनी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। चीन का कहना है कि किसी भी देश को, भले ही वह अमेरिका हो, इस क्षेत्र में एकतरफा कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। यह एक अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग है और इसे सभी देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए संचालित किया जाना चाहिए।

अमेरिकी सैन्य उपस्थिति की चिंता

चीन को अमेरिकी नौसेना की बढ़ती उपस्थिति से गहरी चिंता है। अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में नियमित रूप से अपने विमान वाहक समूह और नष्ट करने वाले जहाजों को तैनात करता है। अमेरिका का कहना है कि वह अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए ऐसा करता है। लेकिन चीन इसे अपने क्षेत्रीय हितों पर एक चुनौती के रूप में देखता है।

चीन की नौसेना भी इस क्षेत्र में तेजी से अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है। चीन ने हाल के वर्षों में अपनी नौसैनिक क्षमता में भारी वृद्धि की है। उसके पास अब कई आधुनिक विमान वाहक, पनडुब्बियां और अन्य उन्नत नौसैनिक जहाज हैं। चीन इन्हीं शक्तियों को इस क्षेत्र में लगातार तैनात किए जा रहा है।

चीन का तर्क है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी सैन्य मौजूदगी को लेकर जो न्यायोचित ठहराता है, वही तर्क चीन के लिए भी लागू होना चाहिए। यदि अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपनी नौसेना को तैनात कर सकता है, तो चीन को भी ऐसा करने का अधिकार है।

द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव

चीन की यह चेतावनी दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का एक हिस्सा है। चीन और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध, प्रौद्योगिकी प्रतिबंध, और साइबर सुरक्षा जैसे कई मुद्दे पहले से ही विवाद का कारण बने हुए हैं। अब होर्मुज जलडमरूमध्य भी इसी विवाद की सूची में जुड़ गया है।

एडमिरल डोंग जून की चेतावनी से यह स्पष्ट है कि चीन मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति को लेकर बिल्कुल गंभीर है। चीन अपने नागरिकों और अपने आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र में एक मजबूत नौसैनिक बल बनाए रखना चाहता है। चीन का मानना है कि केवल एक मजबूत सैन्य उपस्थिति ही होर्मुज जलडमरूमध्य में उसके हितों की रक्षा कर सकती है।

अमेरिका के लिए यह चेतावनी एक मजबूत संकेत है कि चीन इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को लेकर कितना संजीदा है। अगर दोनों देश इस क्षेत्र में अपनी सैन्य प्रतिद्वंद्विता को नियंत्रित नहीं करते हैं, तो भविष्य में गंभीर संघर्ष की स्थिति भी बन सकती है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए यह जरूरी है कि वह दोनों शक्तियों को संवाद के लिए प्रेरित करे और होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए एक सहमत-सहमति का माहौल बनाए।