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Saturday, 13 June 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट का गूगल-एप्पल को सख्त निर्देश

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Komal
संवाददाता
📅 14 May 2026, 7:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 320 views
दिल्ली हाईकोर्ट का गूगल-एप्पल को सख्त निर्देश
📷 aarpaarkhabar.com

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गूगल, एप्पल और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (सीईआरटी) को अश्लील और हानिकारक एप्लीकेशन हटाने के सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत की यह कार्रवाई युवा पीढ़ी की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करती है। न्यायमूर्ति ने अपनी टिप्पणी में कहा कि हम पूरी पीढ़ी को बर्बाद नहीं होने दे सकते और इसलिए ऐसी सभी 'गंदगी' को तुरंत हटाया जाना चाहिए।

यह फैसला एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है जिसमें विभिन्न संगठनों ने मोबाइल एप्स स्टोर पर उपलब्ध अनुचित सामग्री को लेकर शिकायत दर्ज की थी। अदालत ने माना कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी सामग्री का प्रसार भारतीय संविधान और कानून दोनों का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ये कंपनियां 2021 के सूचना प्रौद्योगिकी नियमों का सख्ती से पालन करें। इन नियमों में विशेष रूप से अश्लील और हानिकारक सामग्री को प्रतिबंधित करने के प्रावधान हैं। अदालत ने जुलाई में होने वाली अगली सुनवाई तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की यह जिम्मेदारी है कि वे किस तरह की सामग्री को अपने प्लेटफॉर्म पर मेजबानी दें। अदालत ने कहा कि ये कंपनियां केवल यांत्रिक सेवा प्रदाता नहीं हैं, बल्कि उन्हें सामग्री पर नियंत्रण और देखभाल करनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि भारत में लाखों बच्चे और किशोर इन एप्स का उपयोग करते हैं। ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री उम्र के अनुरूप और नैतिकता के मानदंडों को पूरा करने वाली हो। अदालत की टिप्पणी से यह भी पता चलता है कि पहले इस दिशा में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई थी।

हाईकोर्ट ने सीईआरटी को भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कहा है। सीईआरटी को चाहिए कि वह नियमित आधार पर इन एप्लीकेशन्स की जांच करें और संदिग्ध सामग्री की रिपोर्ट करें। अदालत का मानना है कि सरकारी एजेंसियां, प्राइवेट कंपनियां और सामाजिक संगठनों का मिलकर काम करना आवश्यक है।

भारतीय नियमों का कार्यान्वयन

2021 के सूचना प्रौद्योगिकी नियम भारत में डिजिटल सामग्री के संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं। ये नियम विशेष रूप से ऐसी सामग्री को प्रतिबंधित करते हैं जो:

बच्चों के लिए हानिकारक हो
यौन शोषण को दर्शाती हो
हिंसा और अपराध को प्रोत्साहित करती हो
महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करती हो
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनती हो

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ये नियम केवल कागज पर नहीं रह सकते। इन्हें वास्तविक रूप से लागू किया जाना चाहिए। अदालत ने गूगल और एप्पल से विशिष्ट प्रश्न उठाए हैं कि उन्होंने अब तक कितने एप्स को हटाया है, कितनी नई सामग्री की जांच की गई है, और भविष्य में गुणवत्ता नियंत्रण के लिए क्या उपाय किए जाएंगे।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ये कंपनियां आदेश का पालन नहीं करती हैं तो कठोर कदम उठाए जाएंगे। इसमें जुर्माना, लाइसेंस रद्द करना, या अन्य कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है।

युवा पीढ़ी की सुरक्षा और आगे की दिशा

यह फैसला भारतीय न्यायपालिका का एक साहसिक कदम है जो डिजिटल नैतिकता को लेकर गंभीर है। अदालत का स्पष्ट संदेश है कि कोई भी बहुराष्ट्रीय कंपनी भारत के कानूनों से ऊपर नहीं है। गूगल और एप्पल को भारतीय समाज के मूल्यों और कानूनी आवश्यकताओं का सम्मान करना होगा।

हाईकोर्ट की इस कार्रवाई से अभिभावकों और शिक्षकों को भी एक सशक्त सुरक्षा का अनुभव होगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। समाज को एक व्यापक डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम की आवश्यकता है जहां बच्चों को समझाया जाए कि इंटरनेट पर कौन सी सामग्री उपयोगी है और कौन सी हानिकारक।

अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और बच्चों के डिजिटल उपयोग पर नजर रखनी चाहिए। अगली सुनवाई में अदालत को सभी पक्षों से संतोषजनक रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। यह मामला न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर डिजिटल जिम्मेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण स्थापित करेगा।