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Wednesday, 22 April 2026
राजनीति

दिल्ली स्कूलों में Water Bell योजना शुरू

author
Komal
संवाददाता
📅 22 April 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 596 views
दिल्ली स्कूलों में Water Bell योजना शुरू
📷 aarpaarkhabar.com

दिल्ली में बढ़ती गर्मी और हीटवेव के खतरनाक असर को देखते हुए शिक्षा विभाग ने एक अनोखी और महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इस योजना के तहत दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में हर 45 से 60 मिनट के अंतराल पर 'वॉटर बेल' बजाया जाएगा। यह बेल बच्चों को नियमित रूप से पानी पीने की याद दिलाएगी और गर्मी के मौसम में उनके स्वास्थ्य की रक्षा करेगी।

इस साल दिल्ली में तेज गर्मी और लू का प्रकोप असाधारण रहा है। तापमान कई दिनों तक 50 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई। डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं से बचाव के लिए शिक्षा विभाग ने यह प्रभावी कदम उठाया है। वॉटर बेल योजना बिल्कुल नई और अभूतपूर्व है, जिसका उद्देश्य बच्चों को सही समय पर पर्याप्त पानी पीने के लिए प्रेरित करना है।

दिल्ली के स्कूलों में वॉटर बेल योजना की शुरुआत

दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि यह छात्रों के समग्र स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। गर्मी के मौसम में अक्सर बच्चे अपनी प्यास को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और पढ़ाई में तल्लीन रहते हैं, जिससे वे डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं। वॉटर बेल एक नियमित अनुस्मारक के रूप में काम करेगी।

इस योजना को लागू करने के लिए सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने परिसर में पर्याप्त मात्रा में ठंडा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएं। वॉटर कूलर, डिस्पेंसर और अन्य सुविधाएं स्कूल के विभिन्न कोनों में लगाई गई हैं। स्कूल प्रबंधन ने भी सुनिश्चित किया है कि हर बेल के बाद कम से कम पंद्रह से बीस मिनट का समय बच्चों को पानी पीने और आराम करने के लिए मिले।

बडी सिस्टम से छात्र एक-दूसरे की सेहत पर नजर रखेंगे

यह योजना केवल बेल बजाने तक सीमित नहीं है। दिल्ली के स्कूलों में 'बडी सिस्टम' भी लागू किया गया है, जिसके तहत बड़ी कक्षाओं के छात्र छोटी कक्षाओं के बच्चों की देखभाल करेंगे। इस सिस्टम में हर बड़ा बच्चा अपने से छोटे बच्चों को पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करेगा और उनके स्वास्थ्य पर निगरानी रखेगा।

बडी सिस्टम का उद्देश्य केवल पानी पीना सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि बड़े बच्चों में जिम्मेदारी और देखभाल की भावना पैदा करना भी है। यह एक पीयर-टू-पीयर लर्निंग मॉडल है जो सामाजिक कौशल विकसित करता है। स्कूल प्रबंधन ने इन बडियों को विशेष प्रशिक्षण दिया है ताकि वे सही तरीके से हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के लक्षणों को पहचान सकें।

यदि किसी बच्चे में थकान, चक्कर आना, सिरदर्द या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के संकेत दिखें, तो बडी तुरंत शिक्षकों या स्वास्थ्य कर्मचारियों को सूचित करेंगे। इस तरह हर बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

गर्मी के मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित अन्य उपाय

दिल्ली के स्कूलों में केवल वॉटर बेल और बडी सिस्टम ही नहीं, बल्कि कई अन्य सावधानियां भी बरती जा रही हैं। कक्षाओं में एयर कंडीशनिंग और उचित वेंटिलेशन सुनिश्चित किया गया है। खेल के समय और शारीरिक व्यायाम को प्रातःकाल या शाम को स्थानांतरित कर दिया गया है, ताकि छात्रों को दोपहर की तेज गर्मी में बाहर निकलना न पड़े।

स्कूलों ने भी विशेष कक्षा आयोजित की हैं जहां छात्रों को गर्मी और हीटवेव से बचाव के बारे में शिक्षा दी जाती है। पोषण संबंधी सलाह भी दी जाती है कि गर्मी के मौसम में क्या खाएं और क्या न खाएं।

स्कूलों ने अभिभावकों को भी सूचित किया है कि वे घर पर भी अपने बच्चों को पर्याप्त पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चों के बस्ते में पानी की बोतल रखना अनिवार्य कर दिया गया है।

दिल्ली की यह पहल बेहद सराहनीय है और देश के अन्य शहरों के लिए एक मिसाल बन सकती है। गर्मी के इस असहनीय मौसम में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। वॉटर बेल योजना एक सरल लेकिन प्रभावी तरीका है जिससे बच्चे नियमित रूप से पानी पीने की आदत डाल सकते हैं। यह योजना निश्चित ही स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाएगी और हीटवेव से संबंधित घटनाओं को कम करेगी।