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Saturday, 03 October 2026
विश्व

अल-नीनो का खतरा: मॉनसून कमजोर होगा – WMO

author
Komal
संवाददाता
📅 03 June 2026, 7:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 475 views
अल-नीनो का खतरा: मॉनसून कमजोर होगा – WMO
📷 aarpaarkhabar.com

विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी वर्ल्ड मेटेरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने हाल ही में एक गंभीर चेतावनी जारी की है। इस संगठन ने पुष्टि की है कि इस वर्ष एक मजबूत और खतरनाक अल-नीनो की घटना विकसित हो रही है। इस परिस्थिति से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को विभिन्न प्रकार के जलवायु खतरों का सामना करना पड़ सकता है। भारत के संदर्भ में यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि यह हमारे मॉनसून को कमजोर कर सकती है।

अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण होती है। जब यह घटना घटित होती है तो विश्वभर में मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव आते हैं। इस बार WMO के विशेषज्ञों ने माना है कि अल-नीनो की यह घटना काफी शक्तिशाली साबित हो सकती है। इसके परिणाम स्वरूप विश्व के विभिन्न हिस्सों में तापमान में वृद्धि, असामान्य वर्षा, सूखा और अन्य मौसमी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।

मॉनसून पर अल-नीनो का असर

भारत के लिए मॉनसून का महत्व बेहद ज्यादा है। देश की कृषि, जल संसाधन और संपूर्ण आर्थिक व्यवस्था मॉनसून पर निर्भर है। WMO की चेतावनी के अनुसार इस बार आने वाले अल-नीनो से भारत का मॉनसून कमजोर हो सकता है। जब मॉनसून कमजोर होता है तो वर्षा कम होती है, जिससे सूखे की परिस्थितियां बनती हैं।

ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें तो अल-नीनो के दौरान भारत में वर्षा में कमी का पैटर्न स्पष्ट दिखाई देता है। पिछली शताब्दी में जब भी मजबूत अल-नीनो आया है, भारत में मॉनसून का प्रदर्शन औसत से कमजोर रहा है। इससे किसानों को फसलों का नुकसान होता है, जल स्तर गिरता है और सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है। इस बार की चेतावनी को देखते हुए भारत के मौसम विभाग और कृषि संबंधी विभागों को पहले से ही तैयारी करनी चाहिए।

वैश्विक स्तर पर संभावित प्रभाव

अल-नीनो का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। यह एक वैश्विक घटना है जो पूरे विश्व के मौसम पर प्रभाव डालती है। WMO की रिपोर्ट के अनुसार इस बार की अल-नीनो घटना से विश्वभर में तापमान में वृद्धि देखने को मिल सकती है। विश्व के कई हिस्सों में असामान्य गर्मी, बाढ़, सूखा और तूफान जैसी घटनाएं हो सकती हैं।

अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के कुछ भागों को विशेष रूप से सूखे का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर, पेरू और दक्षिणी अमेरिका के अन्य हिस्सों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ की संभावना है। विश्व की खाद्य उत्पादन क्षमता पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है। अनाज, चीनी, कॉफी और अन्य महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

जलवायु परिवर्तन के इस दौर में अल-नीनो जैसी घटनाओं का महत्व और भी बढ़ जाता है। जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि मानवीय गतिविधियों से उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों के कारण इस तरह की घटनाएं अधिक तीव्र और बार-बार होने लगी हैं।

तैयारी और सावधानियां

WMO की इस चेतावनी के बाद भारत सहित विभिन्न देशों को कई महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए। भारत के कृषि विभाग को किसानों को सूखा-सहन करने वाली फसलों के बारे में सलाह देनी चाहिए। जल संसाधन विभाग को बांधों और जल संग्रहण के तरीकों को मजबूत करने की आवश्यकता है। बिजली उत्पादन पर विशेष ध्यान देना होगा क्योंकि कम वर्षा से जलविद्युत उत्पादन में कमी आ सकती है।

आम जनता को भी अल-नीनो के प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। पानी की बचत, खेती के तरीकों में सुधार और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने की जरूरत है। सरकार को दीर्घकालीन योजना बनानी चाहिए ताकि ऐसी परिस्थितियों में कम से कम नुकसान हो।

WMO की यह चेतावनी गंभीर है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। भारत को इस बार की अल-नीनो घटना के लिए तैयारी करनी चाहिए ताकि कृषि, जल संसाधन और आर्थिक क्षेत्र में कम से कम नुकसान हो सके। यह समय मॉनसून पूर्वानुमान में सुधार करने, बेहतर कृषि प्रणालियां विकसित करने और जल संरक्षण को लेकर गंभीर होने का है।