बस में 25 लाख का ठगी कांड, नकली CBI अधिकारी
महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक बार फिर से ठगों की एक नई और खतरनाक वारदात सामने आई है। इस घटना में दो युवकों ने बेहद चतुराई से एक 70 साल के बुजुर्ग व्यापारी को निशाना बनाया और उनसे 25 लाख रुपये की रकम ठग ली। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये दोनों आरोपी खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI के अधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे। लेकिन जब पुलिस की कार्रवाई हुई तो पता चला कि सभी दस्तावेज और पहचान पत्र पूरी तरह से नकली थे। इस बीच सकारात्मक बात यह है कि स्थानीय पुलिस ने बेहद तेजी से कार्रवाई करते हुए मात्र 12 घंटे के अंदर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और पूरी बरामद राशि को भी बरामद कर लिया गया है।
नकली आईडी से की गई धोखाधड़ी
इस ठगी की घटना में सबसे अलर्ट बात यह है कि अपराधियों ने गूगल से बनाई गई पूरी तरह नकली पहचान पत्र का इस्तेमाल किया था। ये दोनों युवक अकोला में एक बस में सवार थे जब उन्होंने 70 साल के इस बुजुर्ग कारोबारी को देखा। बुजुर्ग के पास बड़ी रकम होने का अंदाजा शायद आरोपियों को उनके कपड़ों, व्यवहार और सामान से लग गया था। फिर क्या था, दोनों ने तुरंत अपनी योजना को अमल में लाना शुरू कर दिया।
आरोपियों ने पहले बुजुर्ग के पास जाकर अपने आप को CBI का अधिकारी बताया। उन्होंने गूगल से बनाई गई नकली आईडी बुजुर्ग को दिखाई जो देखने में बिल्कुल असली लगती थी। आईडी पर एक असली जैसा नाम, पद, और विभाग का नाम लिखा हुआ था। बुजुर्ग, जो शायद इस तरह की धोखाधड़ी से अनजान थे, वे तुरंत घबरा गए। आरोपियों ने फिर कहा कि उनके पास संदिग्ध गतिविधियों की जांच के सिलसिले में कुछ सवाल हैं।
डर और धमकी से ली हुई रकम
यह तो मानो एक फिल्मी दृश्य जैसा था जहां पर असली की नकल करने वाले अपराधी एक मासूम बुजुर्ग को डराना शुरू कर देते हैं। आरोपियों ने बुजुर्ग को बताया कि उनके खिलाफ कुछ गंभीर आर्थिक अपराध की जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास जो भी नकदी है, वह संदिग्ध स्रोत से प्राप्त है। फिर उन्होंने धमकाया कि अगर बुजुर्ग सहयोग नहीं करेंगे तो उन्हें गिरफ्तार कर दिया जाएगा। ये सब बातें सुनकर बेचारे बुजुर्ग को बेहद असहज महसूस होने लगा।
डर के मारे और अपने ऊपर झूठे आरोपों से बचने के लिए, बुजुर्ग ने अपनी जेब से 25 लाख रुपये निकाल कर आरोपियों को दे दिए। केवल यही नहीं, बल्कि उन्होंने अपना मोबाइल फोन भी आरोपियों को सौंप दिया। आरोपियों की इसी मकसद था कि बुजुर्ग किसी को संदेश या कॉल न कर सकें। हालांकि, जब बुजुर्ग को थोड़ी देर बाद होश आया, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया और पूरी घटना को विस्तार से बताया।
तेजी से गिरफ्तारी और रकम बरामद
अकोला की पुलिस ने इस घटना की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। कोई भी समय बर्बाद न करते हुए, पुलिस के सभी दल एलर्ट मोड पर आ गए। जिला पुलिस के प्रमुख अधिकारियों ने तुरंत एक विशेष दल का गठन किया जो इन दोनों अपराधियों को ढूंढने के लिए निकल पड़े। पुलिस के पास जो भी CCTV फुटेज, फोन डेटा और अन्य साक्ष्य मिले, उन सभी को तुरंत विश्लेषण किया गया।
मात्र 12 घंटे के अंदर पुलिस को दोनों आरोपियों का ठिकाना पता चल गया। उन्हें एक छोटे से रिहायशी इलाके में पकड़ा गया जहां वे नकली दस्तावेजों को तैयार करने के लिए एक अड्डा चलाते थे। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को बुजुर्ग का सारा नकद पैसा, मोबाइल फोन, और कुछ अन्य संदिग्ध दस्तावेज भी मिल गए। आश्चर्यजनक बात यह है कि इन दोनों अपराधियों के पास असली CBI के अधिकारी की तरह दिखने वाली कई नकली आईडी और पहचान पत्र बरामद किए गए हैं।
इस पूरे मामले में पुलिस की तेजी और कुशलता काबिले तारीफ है। उन्होंने न केवल आरोपियों को गिरफ्तार किया बल्कि बुजुर्ग की पूरी रकम भी उन्हें वापस लौटाई। यह घटना एक बार फिर से सावधान करती है कि कैसे ये ठग अपनी चतुराई और नकली दस्तावेजों के जरिए मासूम लोगों को ठग लेते हैं। अगर आप भी ऐसी किसी संदिग्ध घटना का सामना करें, तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें और किसी भी अजनबी को पैसे या व्यक्तिगत जानकारी न दें।




