मटन खाने के बाद रेबीज का डर, पूरा परिवार अस्पताल
गाजियाबाद के एक अस्पताल में एक असामान्य घटना सामने आई है। एक परिवार के सात सदस्य इसलिए आए कि उन्होंने उस बकरे का मांस खा लिया था, जिसे तीन दिन पहले एक कुत्ते ने काटा था। परिवार को डर था कि कहीं वह रेबीज से संक्रमित न हो जाएं। यह घटना गाजियाबाद के एक मध्यम वर्गीय इलाके में घटी और तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
परिवार के मुखिया ने बताया कि उन्हें स्थानीय बाजार से एक बकरा खरीदा था। बकरे को घर लाने के कुछ घंटे बाद ही उसे एक आवारा कुत्ते ने काट दिया। कुत्ते के काटने के बाद परिवार ने सोचा कि बकरे को पशु चिकित्सक के पास ले जाएं, लेकिन गांव में ऐसी सुविधा नहीं थी। तीन दिन बाद परिवार को भूख लगी और उन्होंने उसी बकरे को रसोई घर में भेज दिया। मांस को अच्छी तरह पकाया गया और पूरा परिवार ने मिलकर खाना खा लिया।
मांस खाने के अगले दिन ही परिवार के मन में एक सवाल उठा कि क्या रेबीज की बीमारी मांस खाने से भी फैल सकती है। इसी शंका के कारण वह तुरंत अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में डॉग बाइट क्लीनिक के प्रभारी थे डॉ. नितिन प्रियदर्शी। डॉक्टर ने परिवार के सदस्यों को विस्तार से समझाया कि रेबीज का वायरस लार और तंत्रिका ऊतकों में पाया जाता है, न कि मांस में।
डॉक्टर की व्याख्या और परिवार की चिंता
डॉ. नितिन प्रियदर्शी ने काफी देर तक परिवार को समझाया कि रेबीज का संक्रमण तब होता है जब संक्रमित जानवर की लार सीधे खुले घाव या म्यूकस मेम्ब्रेन के संपर्क में आती है। अगर मांस को अच्छी तरह पकाया जाए तो रेबीज का वायरस नष्ट हो जाता है। डॉक्टर ने बताया कि रेबीज वायरस गर्मी के प्रति बेहद संवेदनशील होता है और 70 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर तुरंत मर जाता है।
डॉक्टर ने परिवार को आश्वस्त किया कि उन्हें कोई खतरा नहीं है। लेकिन परिवार के सदस्य अपनी चिंता से मुक्त नहीं हो सके। उनके मन में लगातार डर था कि कहीं कोई समस्या न हो जाए। डॉक्टर की सभी व्याख्याओं और वैज्ञानिक तर्कों के बाद भी परिवार के लोग पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। इस स्थिति में डॉक्टर ने निर्णय लिया कि परिवार की मानसिक शांति के लिए सभी सात सदस्यों को एंटी रेबीज वैक्सीन की एक-एक डोज दे दी जाए।
रेबीज से जुड़े मिथ्स और तथ्य
यह घटना रेबीज से जुड़े कई भ्रांतियों को उजागर करती है। आम जनता के बीच रेबीज को लेकर बहुत सारी गलत धारणाएं हैं। लोग सोचते हैं कि संक्रमित जानवर से कोई भी चीज खतरनाक हो सकती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि रेबीज का संक्रमण केवल लार के माध्यम से होता है और वह भी तभी जब संक्रमित लार सीधे खुले घाव में जाती है।
डॉक्टर प्रियदर्शी के अनुसार, अगर कोई संक्रमित जानवर किसी को काटे तो तुरंत घाव को साबुन और पानी से धोना चाहिए। इसके बाद जल्दी से जल्दी एंटी रेबीज वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबुलिन लगवाना चाहिए। रेबीज की घटना में समय ही सबसे महत्वपूर्ण होता है। अगर 48 घंटे के अंदर वैक्सीन लग जाए तो 99 प्रतिशत तक सुरक्षा मिल जाती है।
सार्वजनिक जागरूकता की जरूरत
यह घटना स्पष्ट करती है कि रेबीज के बारे में सार्वजनिक जागरूकता की बहुत ज्यादा जरूरत है। भारत में हर साल हजारों लोग रेबीज से मर जाते हैं, लेकिन यह एक निवारणीय बीमारी है। स्वास्थ्य विभाग को स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए।
इसके अलावा आवारा कुत्तों की समस्या भी गंभीर है। शहरों और गांवों में भटकते कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन कुत्तों को टीका लगवाना भी जरूरी है। अगर सभी पालतू जानवरों को रेबीज का टीका दिया जाए तो यह बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
गाजियाबाद की इस घटना के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने इलाके में जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है। वह जनता को रेबीज के सही तथ्यों से अवगत कराना चाहते हैं। इसके अलावा पशु चिकित्सा विभाग भी आवारा कुत्तों को पकड़कर उन्हें टीका लगवाने की योजना बना रहा है।
अंत में, डॉ. नितिन प्रियदर्शी का सुझाव है कि अगर किसी को कोई जानवर काटे तो घबराहट में न पड़कर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। रेबीज एक गंभीर बीमारी है, लेकिन यह पूरी तरह से रोकी जा सकती है। सावधानी, जागरूकता और सही समय पर इलाज ही इससे बचाव की कुंजी है।




