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Saturday, 13 June 2026
समाचार

गुड फ्राइडे 2026: जीसस के बलिदान के दिन को गुड क्यों कहते हैं

author
Komal
संवाददाता
📅 02 April 2026, 7:29 PM ⏱ 1 मिनट 👁 305 views
गुड फ्राइडे 2026: जीसस के बलिदान के दिन को गुड क्यों कहते हैं
📷 Aaj Tak

क्यों कहलाता है 'गुड' फ्राइडे? जानें ईसा मसीह के बलिदान दिवस का रहस्य

कल 3 अप्रैल को दुनियाभर के ईसाई समुदाय द्वारा गुड फ्राइडे मनाया जाएगा। यह दिन ईसाई धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन एक सवाल जो अक्सर लोगों के मन में आता है वह यह है कि जिस दिन ईसा मसीह को इतनी यातना दी गई और सूली पर चढ़ाया गया, उस दुखद दिन को आखिर 'गुड' क्यों कहते हैं?

ईसाई मान्यता के अनुसार, करीब 2000 साल पहले इसी दिन ईसा मसीह को यरूशलेम में हजारों लोगों के सामने सूली पर चढ़ाया गया था। यह दिन दुख और शोक का होने के बावजूद भी 'गुड फ्राइडे' कहलाता है, जिसके पीछे गहरे धार्मिक कारण छुपे हुए हैं।

गुड फ्राइडे 2026: जीसस के बलिदान के दिन को गुड क्यों कहते हैं

गुड फ्राइडे कहने के पीछे का धार्मिक दर्शन

ईसाई धर्मशास्त्र के अनुसार, इस दिन को 'गुड' इसलिए कहा जाता है क्योंकि ईसा मसीह ने मानवता के पापों के लिए अपना बलिदान दिया था। उनका मानना है कि जीसस ने अपनी मृत्यु के द्वारा समस्त मानवजाति को पाप से मुक्ति दिलाई। इस नजरिए से देखें तो यह दिन मानवता के लिए 'अच्छा' या 'कल्याणकारी' था, इसीलिए इसे गुड फ्राइडे कहते हैं।

कई धर्मशास्त्रियों का मत है कि 'गुड' शब्द पुराने अंग्रेजी शब्द 'गॉड' से आया है, जिसका मतलब होता है 'पवित्र'। इस तरह गुड फ्राइडे का मतलब 'पवित्र शुक्रवार' होता है। समय के साथ यह 'गुड फ्राइडे' बन गया।

कैसे मनाते हैं गुड फ्राइडे?

गुड फ्राइडे के दिन ईसाई समुदाय के लोग विशेष तरीके से इस दिन को मनाते हैं:

प्रार्थना और उपवास: अधिकतर ईसाई इस दिन व्रत रखते हैं और चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाओं में भाग लेते हैं। यह दिन गंभीर चिंतन और मनन का होता है।

मौन धारण: कई लोग इस दिन मौन व्रत रखते हैं और ईसा मसीह के बलिदान को याद करते हुए शांति से समय बिताते हैं।

चर्च सेवाएं: चर्चों में विशेष सेवाएं आयोजित की जाती हैं जहां ईसा मसीह के जीवन और उनके बलिदान की कहानी सुनाई जाती है।

दुनियाभर में गुड फ्राइडे की मान्यताएं

विभिन्न देशों में गुड फ्राइडे को अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। कुछ जगहों पर यह राष्ट्रीय अवकाश होता है, जबकि कहीं-कहीं लोग इसे व्यक्तिगत तौर पर मनाते हैं।

भारत में गुड फ्राइडे: भारत में भी ईसाई समुदाय इस दिन को बड़ी श्रद्धा से मनाता है। गोवा, केरल, तमिलनाडु और उत्तर-पूर्वी राज्यों में जहां ईसाई आबादी अधिक है, वहां इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

यूरोप में परंपराएं: यूरोपीय देशों में इस दिन को बेहद गंभीरता से मनाया जाता है। इटली, स्पेन और फिलीपींस में तो कुछ लोग वास्तविक सूली पर चढ़ने तक की नकल करते हैं।

ईस्टर से जुड़ाव

गुड फ्राइडे का गहरा संबंध ईस्टर त्योहार से है। ईसाई मान्यता के अनुसार, गुड फ्राइडे के तीन दिन बाद ईसा मसीह पुनर्जीवित हुए थे, जिसे ईस्टर के रूप में मनाया जाता है। इस तरह गुड फ्राइडे का दुख ईस्टर की खुशी में बदल जाता है।

यह चक्र मृत्यु से जीवन, अंधकार से प्रकाश, और निराशा से आशा के संदेश को दर्शाता है। ईसाई धर्म में इसे मानवता के लिए सबसे बड़े उपहार के रूप में देखा जाता है।

आधुनिक समय में गुड फ्राइडे का महत्व

आज के समय में गुड फ्राइडे सिर्फ ईसाई समुदाय तक सीमित नहीं है। यह दिन त्याग, बलिदान और मानवता के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की भावना का प्रतीक बन गया है। यह हमें सिखाता है कि कभी-कभी सबसे कठिन और दुखदायी घड़ियां भी हमारे लिए कल्याणकारी हो सकती हैं।

गुड फ्राइडे का संदेश यह है कि प्रेम, करुणा और बलिदान की शक्ति किसी भी अंधकार को प्रकाश में बदल सकती है। यही कारण है कि एक दुखद दिन को भी 'गुड' कहा जाता है - क्योंकि इसके पीछे छुपा है मानवता के कल्याण का महान उद्देश्य।