गुरुग्राम: बिजली गुल से रैपिड मेट्रो थमी
दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम शहर में शुक्रवार को एक ऐसी घटना घटी जिसने हजारों यात्रियों को भारी परेशानी में डाल दिया। भीषण गर्मी के बीच सेक्टर-72 में स्थित 220 KVA क्षमता वाले पावर हाउस का मुख्य ट्रांसफार्मर अचानक जल गया। इस एक ट्रांसफार्मर के जलने से पूरे शहर के सात बड़े बिजली घर एक साथ ठप हो गए। परिणामस्वरूप पूरा शहर अंधकार में डूब गया और बिजली से चलने वाली सभी सुविधाएं ठप हो गईं।
इस विद्युत संकट का सबसे भीषण और दुःखद असर गुरुग्राम की रैपिड मेट्रो सेवा पर पड़ा। जब अचानक बिजली चली गई तो रैपिड मेट्रो की ट्रेनें पटरियों के बीच ही रुक गईं। ट्रेन के अंदर सवार सैकड़ों यात्री अचानक अंधेरे में बंद हो गए। ट्रेन के अंदर का तापमान तेजी से बढ़ने लगा क्योंकि एयर कंडीशनिंग सिस्टम भी बिजली के बिना काम करना बंद कर गया। यह स्थिति बेहद नाजुक और खतरनाक थी।
जब तक बिजली वापस नहीं आई, तब तक ट्रेन के अंदर फंसे यात्रियों को अंधेरे में बैठना पड़ा। कुछ यात्रियों को ट्रेन से बाहर निकालने के लिए आपातकालीन दरवाजे खोले गए। पटरियों पर रेंगते हुए यात्रियों के दृश्य देखने में आए। बुजुर्ग महिलाएं, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं सब अंधेरे में भटक रहे थे। रेलवे कर्मचारियों को तत्काल यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम करना पड़ा। यह पूरा दृश्य बेहद हृदयविदारक था।
बिजली व्यवस्था की विफलता
गुरुग्राम की बिजली व्यवस्था पिछले कुछ सालों से लगातार समस्याओं का सामना कर रही है। शहर की तेजी से बढ़ती आबादी के साथ बिजली की मांग भी बहुत तेजी से बढ़ी है लेकिन बिजली आपूर्ति का बुनियादी ढांचा उसी अनुपात में विकसित नहीं हुआ है। सेक्टर-72 का ट्रांसफार्मर जो शहर के एक बड़े हिस्से को बिजली सप्लाई करता था, वह पुराना पड़ गया था। गर्मी के मौसम में अधिकतम बिजली लोड के कारण यह ट्रांसफार्मर अक्सर ओवरहीट हो जाता था।
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह ट्रांसफार्मर कई महीने से संभावित समस्या का संकेत दे रहा था लेकिन रखरखाव और मरम्मत में देरी की गई। बिजली विभाग के पास पर्याप्त बजट नहीं था और स्पेयर पार्ट्स की कमी थी। इसी कारण जब गर्मी का शिखर आया तो ट्रांसफार्मर पूरी तरह जल गया। यह घटना बिजली विभाग की लापरवाही और नियोजन की कमी का जीवंत उदाहरण है।
आपातकालीन प्रबंधन और यात्रियों की मुश्किलें
जब यह आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हुई तो शहर के सभी अस्पतालों के पास भी बैकअप पावर सिस्टम नहीं थे। कई निजी अस्पतालों को आपातकालीन जनरेटर चलाने पड़े। सरकारी अस्पतालों में बेहद गंभीर हालत हो गई। आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती थी। सौभाग्य से कुछ घंटों में बिजली बहाल हो गई लेकिन इस बीच कई मरीजों की स्थिति बिगड़ गई।
शहर के विभिन्न इलाकों में बसे लोगों को भी भारी परेशानी हुई। गर्मी के इस मौसम में बिना बिजली के रहना आसान नहीं है। लोगों के घरों में पानी की सप्लाई भी रुक गई क्योंकि वाटर पंप भी बिजली से चलते हैं। बहुत से लोगों के घरों का खाना भी खराब हो गया। दुकानदार अपने सामान को बचाने के लिए व्यस्त रहे। कई जगह चोरियों की भी घटनाएं हुईं क्योंकि अंधेरे का फायदा उठाकर बदमाश सक्रिय हो गए।
भविष्य की तैयारी और सुझाव
इस घटना के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि गुरुग्राम को अपनी बिजली व्यवस्था को तुरंत ठीक करना होगा। पुराने ट्रांसफार्मरों को बदलना होगा और बैकअप सिस्टम लगाने होंगे। रैपिड मेट्रो को अपनी आपातकालीन व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। ट्रेनों में बैटरी चालित आपातकालीन रोशनी और वेंटिलेशन सिस्टम लगाए जाने चाहिए।
शहर के सभी महत्वपूर्ण संस्थानों में सौर ऊर्जा आधारित बैकअप सिस्टम लगाए जाने चाहिए। बिजली विभाग को अपनी कार्यक्षमता बढ़ानी चाहिए और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना चाहिए। यह घटना गुरुग्राम को एक गंभीर चेतावनी है कि अगर समय पर ध्यान न दिया गया तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।




