हंतावायरस के मरीज 11 हुए, WHO ने दिया 42 दिन क्वारंटाइन का आदेश
दुनिया भर में हंतावायरस के खतरनाक प्रकोप से चिंता की लहर दौड़ गई है। क्रूज शिप पर सवार यात्रियों और क्रू सदस्यों में इस वायरस के संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अब तक इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है और तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं।
WHO के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, हंतावायरस से संक्रमित व्यक्तियों को कम से कम 42 दिनों तक क्वारंटाइन रखना अत्यंत आवश्यक है। यह अवधि इसलिए निर्धारित की गई है क्योंकि इस दौरान वायरस पूरी तरह से शरीर से निष्कासित हो जाता है। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अवधि के दौरान रोगियों की चिकित्सकीय निगरानी करना अति आवश्यक है।
हंतावायरस क्या है और कैसे फैलता है?
हंतावायरस एक बेहद खतरनाक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से कृंतकों यानी चूहों के माध्यम से फैलता है। यह वायरस संक्रमित जानवरों की लार, मूत्र और मल से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से मनुष्यों तक पहुंचता है। जब कोई व्यक्ति इन दूषित वस्तुओं के संपर्क में आता है या संक्रमित हवा में सांस लेता है, तो वह इस वायरस का शिकार बन जाता है।
क्रूज शिप जैसे बंद वातावरण में यह वायरस बेहद तेजी से फैलता है क्योंकि यहां लोग एक-दूसरे के बेहद करीब रहते हैं और हवा का संचार सीमित होता है। इसीलिए समुद्री जहाजों पर इस संक्रमण के फैलने का खतरा अधिक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जहाजों की सफाई और कीटाणुशोधन को अधिक सख्ती से किया जाना चाहिए।
संक्रमण के लक्षण और स्वास्थ्य जांच
हंतावायरस से संक्रमित व्यक्ति में आमतौर पर संक्रमण के 1-8 हफ्ते बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं। शुरुआती चरण में रोगी को तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और कमजोरी महसूस होती है। ये लक्षण फ्लू जैसे ही होते हैं जिससे इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, रोगी में श्वसन संबंधी समस्याएं, सांस लेने में कठिनाई और फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने के लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर मामलों में फेफड़ों की विफलता हो सकती है जो जानलेवा साबित हो सकती है। इसीलिए किसी भी संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
WHO के अनुसार, हंतावायरस का निदान रक्त परीक्षण के माध्यम से किया जा सकता है। विशेष एंटीबॉडी परीक्षण से इस वायरस की पहचान की जा सकती है। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद रोगी को तुरंत अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए ताकि उसे उचित चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा सके।
WHO के दिशानिर्देश और रोकथाम के उपाय
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हंतावायरस की रोकथाम के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सबसे पहली बात है कि चूहों और अन्य कृंतकों से दूर रहना चाहिए। घरों और कार्यस्थलों में नियमित रूप से सफाई करनी चाहिए और कीटाणुनाशकों का उपयोग करना चाहिए।
क्रूज शिप जैसे सार्वजनिक स्थानों पर अधिक कड़े स्वच्छता मानदंड अपनाए जाने चाहिए। सभी कर्मचारियों को संक्रमण के लक्षणों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। यात्रियों को चेक-इन के समय स्वास्थ्य स्क्रीनिंग से गुजरना चाहिए।
व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बार-बार हाथ धोना, खांसी और छींक के समय मुंह ढकना, और जनसंख्या वाले क्षेत्रों में मास्क पहनना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति संक्रमित है तो उसे दूसरों से अलग रखा जाना चाहिए।
इस गंभीर स्थिति में यह समय आ गया है कि हर देश और स्वास्थ्य संस्था इस समस्या को गंभीरता से लें। जनता को भी इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जाना आवश्यक है ताकि संक्रमण को रोका जा सके। WHO के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने से ही इस वायरस पर नियंत्रण पाया जा सकता है।




