🔴 ब्रेकिंग
रांची छात्रों का हाई कोर्ट में विरोध, सीएम का पुतला फूंकेंगे|बक्करवाला एनकाउंटर: भाऊ गैंग के दो शूटर गिरफ्तार|आज की टॉप न्यूज: सीमा सुरक्षा और खाप समाचार|गोविंदा दूसरी शादी करने वाले थे: सुनीता आहूजा का खुलासा|पाकिस्तान से खतरा, चीन से असली टक्कर: नरवणे|यूपी शहीद परिवार छात्राओं को स्कूटी योजना|हरियाणा खाप लिव-इन रिलेशन के खिलाफ लव मैरिज समर्थक|ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और चीन की भूमिका|प्याज का रस से बालों का झड़ना रोकें – जावेद हबीब का नुस्खा|UP में 9 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, 7 जिलों के SP-SSP बदले|रांची छात्रों का हाई कोर्ट में विरोध, सीएम का पुतला फूंकेंगे|बक्करवाला एनकाउंटर: भाऊ गैंग के दो शूटर गिरफ्तार|आज की टॉप न्यूज: सीमा सुरक्षा और खाप समाचार|गोविंदा दूसरी शादी करने वाले थे: सुनीता आहूजा का खुलासा|पाकिस्तान से खतरा, चीन से असली टक्कर: नरवणे|यूपी शहीद परिवार छात्राओं को स्कूटी योजना|हरियाणा खाप लिव-इन रिलेशन के खिलाफ लव मैरिज समर्थक|ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और चीन की भूमिका|प्याज का रस से बालों का झड़ना रोकें – जावेद हबीब का नुस्खा|UP में 9 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, 7 जिलों के SP-SSP बदले|
Saturday, 03 October 2026
शिक्षा

आईआईटी डिग्री के बाद भी जिंदगी की उलझन

author
Komal
संवाददाता
📅 18 April 2026, 7:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
आईआईटी डिग्री के बाद भी जिंदगी की उलझन
📷 aarpaarkhabar.com

आजकल की प्रतिष्ठित संस्थाओं से निकलने वाले छात्रों की जिंदगी एक सपने से ज्यादा कुछ नहीं लगती। लेकिन क्या वाकई ऐसा ही होता है? आईआईटी बॉम्बे से पढ़ी एक छात्रा ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी सच्चाई दुनिया के सामने रखी है, जो न केवल उसके लिए बल्कि लाखों युवाओं के लिए एक दर्पण बन गई है।

इस छात्रा ने अपने एक वीडियो में बताया कि कैसे देश की सबसे मुश्किल परीक्षा को पास करने के बाद भी वह आत्म-संदेह, सामाजिक दबाव और लगातार तुलना के कारण तनाव में रहती है। उसकी यह कहानी केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि हजारों प्रतिभागियों की सामूहिक पीड़ा को व्यक्त करती है।

आईआईटी की डिग्री और सच्चाई के बीच का फासला

भारत में आईआईटी का नाम ही सफलता और सुरक्षित भविष्य का पर्याय माना जाता है। माता-पिता अपने बच्चों को आईआईटी में भेजने के लिए वर्षों तक मेहनत करते हैं, और समाज भी यह सोचता है कि आईआईटी की डिग्री लेने वाला व्यक्ति जीवन में सभी चीजें आसानी से हासिल कर लेगा। लेकिन यह छात्रा ने जो कहा है, वह इसी भ्रम को तोड़ता है।

उसने बताया कि डिग्री मिलने के बाद भी उसे एक बड़ा सवाल का सामना करना पड़ता है – अब क्या करूं? केवल डिग्री प्राप्त करना एक लक्ष्य हो सकता है, लेकिन उसके बाद की जिंदगी, करियर के विकल्प, सही नौकरी खोजना और जीवन में संतुलन बनाना ये सब कुछ उतना आसान नहीं होता जितना लगता है।

इस छात्रा के शब्दों में, डिग्री केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, लेकिन इसके साथ जो प्रत्याशाएं और दबाव आते हैं, वो कई बार उस डिग्री से भी बड़े हो जाते हैं। वह महसूस करती है कि समाज हमेशा यह सवाल पूछता है कि आप आईआईटी से हैं, तो आप इतना कम क्यों कर रहे हैं? यह तुलना, यह सवाल, यह दबाव ही असली चुनौती है।

सामाजिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य का संकट

आज का भारतीय समाज अपने युवाओं को एक निर्धारित पथ पर चलने के लिए मजबूर करता है। अगर आप आईआईटी में हैं, तो आपको शीर्ष स्थान पर होना चाहिए। अगर आप किसी बड़ी कंपनी में काम नहीं कर रहे हैं, तो आप असफल हो गए हैं। यह सोच ही युवाओं को मानसिक तकलीफ का कारण बनती है।

इस छात्रा ने अपने वीडियो में बताया कि कैसे वह हर दिन अवसाद, चिंता और आत्म-संदेह से जूझती है। उसके लिए आईआईटी की डिग्री मानो एक भारी बोझ बन गई है, न कि एक आशीर्वाद। वह दिन रात सोचती है कि क्या वह पर्याप्त अच्छी है? क्या उसने सही निर्णय लिए हैं? क्या उसका भविष्य सुरक्षित है?

यह केवल यह छात्रा की समस्या नहीं है। आईआईटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं से निकलने वाले बहुत से छात्र ऐसे ही मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्हें लगता है कि अगर वे अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो वे असफल हैं। यह एक गलत सोच है, और इसी गलत सोच के कारण इतने प्रतिभागी अवसाद का शिकार हो जाते हैं।

आत्म-स्वीकृति और नई सोच की जरूरत

इस छात्रा की कहानी से हमें एक महत्वपूर्ण संदेश मिलता है – डिग्री किसी की पूरी पहचान नहीं होती। जीवन केवल शीर्ष तक पहुंचने के बारे में नहीं है; यह अपने आप को समझने, अपनी खुशियां ढूंढने और एक संतुलित जीवन जीने के बारे में है।

हमारे समाज को यह बदलाव लाने की जरूरत है कि हम अपने बच्चों को केवल डिग्री के लिए नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रोत्साहित करें। माता-पिता को समझना होगा कि उनके बच्चे की खुशी और मानसिक स्वास्थ्य किसी भी डिग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

इसी तरह, प्रतिष्ठित संस्थाओं को भी अपने छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सेवाएं प्रदान करनी चाहिए। युवाओं को यह सिखाया जाना चाहिए कि असफलता जीवन का एक हिस्सा है, और इससे सीखना और आगे बढ़ना ही जीवन का असली अर्थ है।

आखिरकार, यह छात्रा की सच्चाई हमें याद दिलाती है कि भारी डिग्री और प्रतिष्ठा के पीछे भी एक साधारण इंसान होता है जो सामान्य चीजों से ही जूझता है। उसे भी प्यार, समर्थन, स्वीकृति और मानसिक शांति की जरूरत है – और ये चीजें किसी डिग्री से नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और करुणा से ही मिल सकती हैं।