आईआईटियन बाबा अभय सिंह की शादी, IIT से कनाडा तक का सफर
आईआईटियन बाबा अभय सिंह की अनोखी प्रेम कहानी: IIT से कनाडा और फिर शादी के मंडप तक
प्रयागराज महाकुंभ 2025 में अपनी अलग पहचान बनाने वाले आईआईटियन बाबा अभय सिंह की जिंदगी में एक नया मोड़ आया है। जिस शख्स ने IIT मुंबई से पढ़ाई की, कनाडा में नौकरी की और फिर आध्यात्म की राह चुनी, वह अब शादी के बंधन में बंध गया है। अभय सिंह ने इंजीनियर युवती प्रतीका से शादी की है और यह खबर उनके फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं है।
2023 में अपना घर छोड़ने के बाद पहली बार आईआईटियन बाबा अपने परिवार के पास वापस आए हैं। इस बार वह दूल्हे के रूप में घर लौटे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शादी की रस्में पूरी कीं। दूल्हा-दुल्हन के साथ भाभियों ने भी संटा-संटी की रस्में निभाईं, जिससे पूरा माहौल खुशियों से भर गया।
महाकुंभ से शुरू हुई प्रेम कहानी
अभय सिंह और प्रतीका की मुलाकात महाकुंभ 2025 के दौरान हुई थी। जब अभय सिंह प्रयागराज में आध्यात्मिक गतिविधियों में व्यस्त थे, तब उनकी मुलाकात इंजीनियर प्रतीका से हुई। दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। महाकुंभ का यह अनोखा प्रसंग दिखाता है कि कैसे आध्यात्म और व्यक्तिगत खुशियों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।
प्रतीका भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुकी हैं और तकनीकी क्षेत्र में काम करती हैं। दोनों की समान शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके रिश्ते को और भी मजबूत बनाया। महाकुंभ के बाद दोनों ने एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जाना और परिवार वालों से मिलवाया।
IIT मुंबई से कनाडा तक का सफर
| शिक्षा/करियर चरण | विवरण |
| --- | --- | |
|---|---|---|
| शिक्षा | IIT मुंबई से इंजीनियरिंग | |
| प्रारंभिक करियर | कनाडा में तकनीकी नौकरी | |
| जीवन परिवर्तन | 2023 में घर छोड़कर आध्यात्म की राह | |
| वर्तमान स्थिति | शादी के बाद नई शुरुआत |
अभय सिंह का जीवन एक प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT मुंबई से अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह कनाडा चले गए जहां उन्होंने तकनीकी क्षेत्र में काम किया। एक सफल इंजीनियर के रूप में उनका करियर अच्छा चल रहा था, लेकिन 2023 में उन्होंने एक अलग राह चुनी।
कनाडा में रहते हुए अभय सिंह के मन में आध्यात्म के प्रति रुझान बढ़ता गया। वह महसूस करने लगे कि उनकी जिंदगी का मकसद सिर्फ तकनीकी करियर नहीं है। इसी सोच के साथ उन्होंने 2023 में अपना घर छोड़ा और आध्यात्मिक खोज में निकल पड़े।
पारंपरिक शादी की रस्में
अभय सिंह की शादी पूरी तरह से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई। हरियाणा के झज्जर में हुई इस शादी में परिवार के सभी सदस्य शामिल हुए। दूल्हे के रूप में अभय सिंह ने सभी रस्में बड़े उत्साह से निभाईं। उनकी भाभियों ने भी संटा-संटी की परंपरा के अनुसार सभी रस्में पूरी कीं।
शादी का यह अवसर अभय सिंह के परिवार के लिए खुशी का था क्योंकि 2023 के बाद पहली बार वह घर आए थे। परिवार वालों का कहना है कि वह बहुत खुश नजर आ रहे हैं और अब एक नई जिंदगी की शुरुआत करने को तैयार हैं।
आध्यात्म और व्यक्तिगत जिंदगी में संतुलन
अभय सिंह की शादी यह दिखाती है कि आध्यात्मिक जीवन और व्यक्तिगत खुशियों के बीच संतुलन संभव है। महाकुंभ में उन्होंने जो आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किए, वह उनकी जिंदगी का हिस्सा रहेंगे। साथ ही अब वह एक नई जिम्मेदारी के साथ जीवन जी सकेंगे।
प्रतीका भी अभय सिंह की आध्यात्मिक यात्रा को समझती हैं और उनका साथ देने को तैयार हैं। दोनों ने तय किया है कि वह आध्यात्म और व्यावहारिक जिंदगी के बीच संतुलन बनाए रखेंगे।
अभय सिंह की यह कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने दिखाया है कि सफल करियर के बाद भी व्यक्ति अपनी आंतरिक खोज कर सकता है। महाकुंभ में मिली यह प्रेम कहानी भी यह बताती है कि जीवन में अप्रत्याशित मोड़ खुशियां ला सकते हैं।
अब आईआईटियन बाबा अभय सिंह और प्रतीका अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं। उनकी यह अनोखी प्रेम कहानी लोगों को यह संदेश देती है कि सच्चे प्यार की कोई निश्चित जगह या समय नहीं होता। महाकुंभ जैसे आध्यात्मिक स्थान पर भी जीवन के सबसे खूबसूरत रिश्ते बन सकते हैं।




