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Thursday, 05 November 2026
व्यापार

भारत विदेशी सोना वापसी में क्यों आगे

author
Komal
संवाददाता
📅 02 May 2026, 6:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 553 views
भारत विदेशी सोना वापसी में क्यों आगे
📷 aarpaarkhabar.com

विश्व अर्थव्यवस्था में एक नई प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। देश-विदेश सोने को अपनी तिजोरियों से बाहर निकालकर अपने घर वापस ला रहे हैं। भारत इस रेस में सबसे आगे दिख रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अपने विदेशी सोने का 77 प्रतिशत हिस्सा पहले ही अपने देश में वापस ले आया है। यह कदम विश्वव्यापी राजनीतिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता के बीच उठाया जा रहा है। आइए समझते हैं कि भारत यह कदम क्यों उठा रहा है और इसके क्या मायने हैं।

विदेशों में सोना रखने की परंपरा

भारत लंबे समय से अपने सोने का एक बड़ा हिस्सा विदेशी बैंकों की तिजोरियों में रखता आया है। यह परंपरा अंग्रेजों के समय से शुरू हुई थी। आजादी के बाद भी भारत ने यह व्यवस्था जारी रखी। सोना मुख्य रूप से लंदन, न्यूयॉर्क और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में रखा जाता था। इसके पीछे का कारण यह था कि सोने को संभालना महंगा और जोखिम भरा काम होता है। विदेशों में रखने से भारत को सुरक्षा और लचीलापन मिलता था। लेकिन हाल के दशकों में स्थिति बदल रही है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह देश की आर्थिक ताकत का प्रतीक माना जाता है। सोने का भंडार देश की साख को बढ़ाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की क्रेडिट रेटिंग सुधारने में भी सोना अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जब तक यह सोना विदेशों में पड़ा होता है, तब तक वह भारत की संपत्ति तो होता है लेकिन उसका पूरा लाभ नहीं उठाया जा सकता।

राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चिंताएं

पिछले कुछ सालों में विश्व राजनीति में बहुत बदलाव आया है। रूस-यूक्रेन संकट, अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध और अन्य भू-राजनीतिक तनाव ने देशों को अपनी संपत्ति पर नियंत्रण रखने के लिए प्रेरित किया है। कई देशों ने देखा कि आर्थिक प्रतिबंधों के माध्यम से विरोधी देशों की विदेशी संपत्ति को जब्त किया जा सकता है। रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों ने यह बात स्पष्ट कर दी कि विदेशों में रखा सोना और विदेशी संपत्ति कितनी असुरक्षित हो सकती है।

इसी डर के मद्देनजर भारत समेत कई देश अपने सोने को वापस अपने देश में लाना चाहते हैं। भारत के लिए यह बेहद जरूरी था। भारत एक विकासशील देश है जो विश्व शक्ति के रूप में उभर रहा है। ऐसे में देश की संपत्ति पर पूर्ण नियंत्रण होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सोना न केवल आर्थिक संपत्ति है बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। भारत के लिए अपने सोने को अपनी तिजोरी में रखना सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का संदेश देता है।

भारत का तेजी से आगे बढ़ना

भारतीय रिजर्व बैंक ने सोने को वापस लाने की प्रक्रिया को काफी तेजी से आगे बढ़ाया है। 77 प्रतिशत सोना पहले ही देश में आ चुका है। यह संख्या बेहद प्रभावशाली है। भारत के पास वर्तमान में लगभग 848 टन सोना है। यह दुनिया के सबसे बड़े सोने के भंडार में से एक है। केवल अमेरिका, जर्मनी, इटली और फ्रांस के पास भारत से ज्यादा सोना है।

भारत सोने को वापस लाने के लिए काफी सावधानी से काम कर रहा है। देश में सोने को संभालने के लिए आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था बनाई जा रही है। मुंबई में सोने की तिजोरी को अपग्रेड किया गया है। भारत ने विदेशों से सोना लाने के लिए विशेष प्रक्रियाएं अपनाई हैं। सोना विमान द्वारा सुरक्षित तरीके से लाया जा रहा है। प्रत्येक सोने के टुकड़े का सत्यापन और रिकॉर्ड रखा जा रहा है।

इस प्रक्रिया से भारत को कई लाभ मिल रहे हैं। पहला, देश की संपत्ति पर पूर्ण नियंत्रण मिल रहा है। दूसरा, किसी भी आर्थिक प्रतिबंध का असर नहीं पड़ेगा। तीसरा, सोने को अपनी जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है। चौथा, यह कदम भारत की वित्तीय आत्मनिर्भरता का संकेत देता है।

भविष्य की ओर नजर

भारत की यह पहल एक बड़ा संदेश देती है। यह दिखाता है कि भारत अपनी आर्थिक संप्रभुता को लेकर गंभीर है। विश्व अर्थव्यवस्था में अस्थिरता के बीच सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। अपने सोने को अपने पास रखना भारत की ताकत बढ़ाता है। आने वाले समय में और भी देश अपने सोने को वापस लाएंगे। भारत के इस कदम से विश्वव्यापी एक नई प्रवृत्ति शुरू हो सकती है। यह आर्थिक स्वतंत्रता और राजनीतिक सार्वभौमिकता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।