भारत-पाक महिला टी20 मैच में फिर नो हैंडशेक
आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए ऐतिहासिक महामुकाबले में एक बार फिर से 'नो हैंडशेक' पॉलिसी सुर्खियों में आ गई है। टॉस के समय भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना से हाथ नहीं मिलाया। यह घटना क्रिकेट जगत में एक बार फिर से राजनीतिक तनाव और खेल के बीच के संबंध को उजागर करती है।
भारत और पाकिस्तान के बीच के क्रिकेट मैचों में यह पहली बार नहीं है कि ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। पिछले कई वर्षों से दोनों देशों के क्रिकेटर्स के बीच हैंडशेक न करने की परंपरा देखी जा रही है। यह माना जाता है कि यह राजनीतिक तनाव का ही एक परिणाम है जो दोनों देशों के बीच विद्यमान है।
हरमनप्रीत कौर की नीति और विवाद
हरमनप्रीत कौर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एक दिग्गज कप्तान हैं। उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट का चेहरा माना जाता है। हालांकि, पाकिस्तानी कप्तान से हाथ न मिलाने का उनका यह कदम विवाद का विषय बन गया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए। दूसरी ओर, कई लोगों का तर्क है कि यह एक व्यक्तिगत निर्णय है और प्रत्येक खिलाड़ी को यह अधिकार है कि वह किससे हाथ मिलाए और किससे नहीं।
यह विवाद सिर्फ हरमनप्रीत कौर तक सीमित नहीं है। पुरुष क्रिकेट में भी भारतीय और पाकिस्तानी खिलाड़ियों के बीच ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। विराट कोहली, रोहित शर्मा और पाकिस्तानी कप्तान जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के बीच भी कई बार हैंडशेक न करने की बात सामने आई है।
भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंध
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट के माध्यम से एक खास रिश्ता बना हुआ है। यह खेल दोनों देशों में राजनीति और भावनाओं का एक मिश्रण है। जब भी ये दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरते हैं, तो पूरा देश जुड़ जाता है। क्रिकेट मैच की चर्चा सिर्फ खेल के आधार पर नहीं होती, बल्कि राजनीतिक और आवेगात्मक पहलुओं को भी शामिल किया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने कई बार ऐसी घटनाओं पर चिंता जताई है। आईसीसी का मानना है कि खेल को सद्भावना और शांति का माध्यम होना चाहिए, न कि राजनीतिक तनाव का। हालांकि, व्यावहारिकता में यह बहुत कठिन साबित हुआ है क्योंकि दोनों देशों के बीच कई दशकों से भू-राजनीतिक विवाद बने हुए हैं।
खेल की भावना बनाम राजनीति
क्रिकेट को खेल की भावना के साथ खेला जाना चाहिए। हैंडशेक का प्रचलन ही इसी भावना का प्रतीक है। यह परंपरा प्रतिद्वंद्वी के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका है। जब खिलाड़ी हैंडशेक नहीं करते, तो इससे संदेश जाता है कि वे एक दूसरे के प्रति बुरा महसूस कर रहे हैं। हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि क्या एक व्यक्तिगत निर्णय को सार्वजनिक करने से क्या हासिल होता है?
इस मुद्दे को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों के अलग-अलग विचार हैं। कुछ का मानना है कि हरमनप्रीत कौर को ऐसा करने का अधिकार है क्योंकि वह एक स्वतंत्र व्यक्ति हैं। दूसरी ओर, कुछ का मानना है कि एक टीम की कप्तान के रूप में उनकी जिम्मेदारी खेल की भावना को बनाए रखना है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है। हालांकि, यह प्रश्न अवश्य उठता है कि क्या ऐसी नीतियों का समर्थन किया जाना चाहिए या इसे निरुत्साहित किया जाना चाहिए।
भारत-पाकिस्तान के महामुकाबले हमेशा से ही विवादों का केंद्र रहे हैं। यह विवाद न सिर्फ मैदान पर होता है, बल्कि मैदान से बाहर भी होता है। आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में यह घटना फिर से इसी बात को दोहराती है कि क्रिकेट और राजनीति कितनी करीब से जुड़ी हुई हैं।
यह विवाद भले ही छोटा लगे, लेकिन यह एक बड़े मुद्दे का प्रतीक है। खेल को सद्भावना का माध्यम बनाने के लिए दोनों देशों को अपने मतभेदों को अलग रखना होगा। तब तक, ऐसी घटनाएं भारत-पाकिस्तान मैचों का एक अभिन्न हिस्सा बने रहेंगी।




