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Tuesday, 14 July 2026
विश्व

ईरान सक्रिय मोड में, अराघची ने जयशंकर को किया फोन

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Komal
संवाददाता
📅 30 April 2026, 6:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
ईरान सक्रिय मोड में, अराघची ने जयशंकर को किया फोन
📷 aarpaarkhabar.com

ईरान अपनी सक्रिय कूटनीति के साथ विश्व मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत की है। इस संवाद में क्षेत्रीय सुरक्षा, द्विपक्षीय संबंधों और हारमुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई है।

भारत और ईरान के बीच के संबंध एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों देश सदियों से सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंधों से जुड़े हुए हैं। हारमुज जलडमरूमध्य, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है, दोनों देशों की साझा हित का विषय है। इस क्षेत्र से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल की आपूर्ति विश्व के विभिन्न हिस्सों तक की जाती है।

ईरान की सक्रिय कूटनीति रणनीति

ईरान के विदेश मंत्री अराघची का भारतीय विदेश मंत्री को फोन करना ईरान की सक्रिय विदेश नीति का प्रमाण है। अराघची पिछले कुछ महीनों में कई देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं। वह विश्व के विभिन्न हिस्सों में ईरान के राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने में व्यस्त हैं। भारत के साथ संवाद ईरान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत इस क्षेत्र में एक प्रभावशाली शक्ति है।

फोन कॉल में दोनों विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के बारे में विस्तृत बातचीत की होगी। हारमुज जलडमरूमध्य के माध्यम से भारत की अधिकांश तेल आपूर्ति होती है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता का भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। ईरान और भारत दोनों इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में रुचि रखते हैं।

हारमुज जलडमरूमध्य का महत्व

हारमुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। प्रतिदिन लगभग 21 प्रतिशत विश्व के तेल उत्पादन इसी मार्ग से होकर गुजरता है। भारत सहित कई एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य पर निर्भर है।

पिछले कुछ सालों में हारमुज जलडमरूमध्य के चारों ओर अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा है। विभिन्न देशों के बीच भू-राजनीतिक संघर्ष इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को अस्थिर बना रहे हैं। ईरान, भारत, सऊदी अरब, अमेरिका और अन्य देश इस क्षेत्र में अपने हित बचाने के लिए सक्रिय हैं। ऐसी स्थिति में भारत और ईरान के बीच संवाद अत्यंत महत्वपूर्ण है।

द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना

भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध बहुत गहरे हैं। दोनों देश अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों में कई समानताएं साझा करते हैं। व्यापार, विज्ञान, प्रযुक्ति और शिक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की असीम संभावनाएं हैं। अराघची और जयशंकर की बातचीत इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान के बीच आर्थिक सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है। भारत ने इस बंदरगाह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह बंदरगाह भारत को मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के साथ व्यापार संबंध बढ़ाने में मदद करेगा। इसके अलावा, दोनों देश आतंकवाद विरोधी गतिविधियों में भी सहयोग कर रहे हैं।

अराघची और जयशंकर के बीच की इस फोन कॉल से संकेत मिलता है कि भारत और ईरान अपने संबंधों को और गहरा करना चाहते हैं। दोनों देश क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस तरह की उच्च स्तरीय बातचीत दोनों देशों के बीच समझदारी को बढ़ाती है और भविष्य में और अधिक सहयोग के रास्ते खोलती है।

ईरान की सक्रिय कूटनीति और भारत की रणनीतिक दूरदर्शिता इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच और भी ज्यादा संवाद और सहयोग की उम्मीद की जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और ईरान का मजबूत रिश्ता एशिया के संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए यह फोन कॉल सिर्फ एक कूटनीतिक बातचीत नहीं है, बल्कि दोनों देशों की बेहतर भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।