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Thursday, 30 July 2026
विश्व

इजरायली हमलों से US-ईरान डील संकट में

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Komal
संवाददाता
📅 18 June 2026, 6:17 AM ⏱ 1 मिनट 👁 240 views
इजरायली हमलों से US-ईरान डील संकट में
📷 aarpaarkhabar.com

विश्व राजनीति के मंच पर एक बार फिर से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच जो शांति समझौता वार्ता चल रही थी, उसमें अब इजरायल के लगातार सैन्य हमलों के कारण बड़ी बाधा आ गई है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि यदि इजरायलि हमलों को तुरंत नहीं रोका गया, तो वह अपनी ओर से सैन्य जवाबी कार्रवाई शुरू कर देगा। इस चेतावनी के बाद पूरे क्षेत्र में एक नए युद्ध की आशंका का माहौल बन गया है।

दक्षिण-पश्चिम एशियाई क्षेत्र में जहां अभी शांति की बातचीत चल रही थी, वहीं इजरायल लेबनान के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर सैन्य ऑपरेशन कर रहा है। इन हमलों में हजारों नागरिक प्रभावित हुए हैं और लेबनान की बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ईरान, जो लेबनान में अपना सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभाव रखता है, को यह स्थिति बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रही है।

इजरायली कार्रवाई और अंतर्राष्ट्रिक समझौते में विरोधाभास

जब अमेरिका और ईरान ने शांति की बातचीत शुरू की थी, तो अंतर्राष्ट्रिक समुदाय को इससे बहुत सी उम्मीदें थीं। माना जा रहा था कि इससे पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में एक नया शांतिपूर्ण माहौल बनेगा। लेकिन इजरायल की ओर से होने वाले सैन्य हमले इन समझौतों पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। यह साफ दिख रहा है कि जहां एक ओर शांति की बातचीत हो रही है, वहीं दूसरी ओर युद्ध की तैयारी भी जारी है।

ईरानी नेतृत्व का मानना है कि इजरायल जानबूझकर इन शांति वार्ताओं को विफल करने की कोशिश कर रहा है। तेहरान के अधिकारियों ने कहा है कि इजरायल के हमलों को अंतर्राष्ट्रिय कानून के तहत गैरकानूनी माना जाना चाहिए। लेबनान पर किए जा रहे हमलों में हजारों मासूम लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिसके लिए इजरायल को जवाबदेही देनी चाहिए।

अमेरिकी प्रशासन भी इस स्थिति से काफी परेशान दिख रहा है। वॉशिंगटन ईरान के साथ एक मजबूत समझौता बनाना चाहता है, जिससे क्षेत्र में सैन्य तनाव कम हो सके। लेकिन इजरायल की ओर से आने वाली कार्रवाइयां इस लक्ष्य को हासिल करने में बाधा बन रही हैं। अमेरिकी राजदूत और विदेश नीति विशेषज्ञों ने लगातार इजरायल से आग्रह किया है कि वह हमलों को सीमित करे।

तेहरान की सैन्य तैयारी और जवाबी कार्रवाई की धमकी

ईरान ने अपनी चेतावनी को लेकर कोई लापरवाही नहीं दिखाई है। तेहरान के सैन्य प्रमुखों ने साफ संदेश दिया है कि यदि इजरायल के हमले जारी रहे, तो ईरान भी अपनी शक्तिशाली सैन्य क्षमता का इस्तेमाल करने में नहीं हिचकिचाएगा। ईरान के पास न केवल परंपरागत सशस्त्र बल हैं, बल्कि आधुनिक मिसाइल तकनीक भी है, जिससे वह दीर्घ दूरी के निशाने लगा सकता है।

इस बीच, ईरान ने लेबनान में अपनी सहायक शक्तियों को भी सक्रिय करने के संकेत दिए हैं। लेबनान में मौजूद कई संगठनों पर ईरान का अप्रत्यक्ष नियंत्रण है, और ये संगठन किसी भी समय इजरायल के खिलाफ सक्रिय हो सकते हैं। यह परिस्थिति पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत खतरनाक है।

ईरानी सरकार का यह रुख दिखाता है कि वह शांति वार्ता के दौरान भी अपनी सैन्य तैयारी को पूरी तरह से छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। ईरान के लिए यह आत्मरक्षा का सवाल है। यदि इजरायल लेबनान पर हमले करता रहेगा, तो ईरान को अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाने पड़ सकते हैं।

क्षेत्रीय शांति के लिए चुनौतियां और अंतर्राष्ट्रिय हस्तक्षेप

वर्तमान परिस्थिति में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रिक संगठन भी अपनी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि वे शांति वार्ताओं को जारी रखें और सैन्य कार्रवाई को कम करें। यूरोपीय संघ के नेताओं ने भी इसी बात पर जोर दिया है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करना सभी के लिए आवश्यक है।

लेकिन हकीकत यह है कि जब तक इजरायल अपने सैन्य अभियान को नहीं रोकता, तब तक ईरान और अन्य देशों के लिए शांतिपूर्ण रवैया बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच का शांति समझौता केवल तभी सफल हो सकता है, जब पूरे क्षेत्र में एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल हो।

इस समय पूरा विश्व यह देख रहा है कि अगले हफ्तों में क्या परिस्थिति होगी। क्या अमेरिका और अंतर्राष्ट्रिक समुदाय इजरायल को नियंत्रित करने में सफल हो सकेंगे, या फिर क्षेत्र में एक बड़ा संकट का सामना करना पड़ेगा। इस वक्त हर बात कुछ ही घंटों के अंतर पर निर्भर कर रही है। ईरान की चेतावनी को सिर्फ एक रूटीन धमकी नहीं माना जा सकता, क्योंकि तेहरान ने अतीत में भी अपनी धमकियों को अमल में लाया है।

सभी पक्षों के लिए यह समय बेहद गंभीर है। इजरायल को अपने सैन्य कार्यों को सीमित करना चाहिए, ईरान को अपनी सैन्य तैयारी के बारे में और अधिक सावधान रहना चाहिए, और अमेरिका को एक तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए। केवल इसी तरह से ही पूरे क्षेत्र के लिए एक स्थायी शांति संभव हो सकती है।