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Sunday, 05 July 2026
समाचार

आईटी इंजीनियर किसान की बिजली से मौत

author
Komal
संवाददाता
📅 29 May 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 683 views
आईटी इंजीनियर किसान की बिजली से मौत
📷 aarpaarkhabar.com

बेंगलुरु के एक आईटी इंजीनियर ने कॉर्पोरेट दुनिया की चकाचौंध को छोड़कर खेती का सपना देखा था। उन्होंने सोचा था कि मिट्टी से जुड़ा जीवन उन्हें सच्ची खुशी दे सकता है। लेकिन किस्मत को उनके इस फैसले से कोई मतलब न था। मैसूर के अपने खेत में एक दर्दनाक हादसे में रोशन बालकृष्ण की जान चली गई। आकाशीय बिजली ने उनके सभी सपनों को राख में बदल दिया।

रोशन बालकृष्ण का नाम आज बेंगलुरु और मैसूर में हर किसी की जुबान पर है, लेकिन दुर्भाग्य के साथ। वह एक सफल आईटी प्रोफेशनल थे। उनके पास एक अच्छी नौकरी थी, एक सुविधाजनक जीवन था। लेकिन कई लोगों की तरह, रोशन को भी कॉर्पोरेट जीवन की चकाचौंध से निकलकर कुछ अलग करने का जुनून था। उन्होंने अपनी सारी बचत लगाई और मैसूर जिले में एक बड़ा आम का बाग खरीदा।

यह फैसला उनके परिवार के लिए अचानक आया था। उनके माता-पिता को शुरुआत में यह विचार पसंद नहीं आया। लेकिन रोशन दृढ़ निश्चयी व्यक्ति थे। वह मानते थे कि खेती से देश को आगे ले जाया जा सकता है। वह चाहते थे कि आधुनिक तरीकों से खेती की जाए, ताकि किसानों को बेहतर उपज मिल सके। उन्होंने अपने बाग में नई तकनीकें इस्तेमाल कीं, ड्रिप सिंचाई लगाई, और जैविक खेती पर ध्यान दिया।

नई शुरुआत और खेती के सपने

रोशन बालकृष्ण की यह यात्रा शुरुआत में काफी प्रेरणादायक लग रही थी। वह हर दिन अपने खेतों में समय बिताते थे, पौधों की देखभाल करते थे, और अन्य किसानों से सीखते थे। उन्होंने महसूस किया कि असली खुशी मिट्टी में है, न कि एयर कंडीशनर्ड ऑफिसों में। उनके साथी उन्हें देखकर प्रेरित हो रहे थे। कई लोगों ने उनसे पूछा कि वह भी खेती कैसे शुरू कर सकते हैं।

रोशन का खेत मैसूर में एक हरा-भरा स्वर्ग बन गया था। उनके आम के बागों में हजारों पेड़ लगे थे। हर मौसम में वह अच्छी फसल पाते थे। स्थानीय बाजार में उनके आमों की बहुत मांग थी। किसान समुदाय ने उन्हें अपनाया था। गांव के लोग उन्हें प्रशंसा से देखते थे क्योंकि एक शिक्षित, प्रतिभाशाली व्यक्ति ने खेती को अपना जीवन बना लिया था।

लेकिन एक बात जो रोशन हमेशा भूल जाते थे, वह था मौसम की अप्रत्याशितता और प्रकृति की निर्ममता। भारतीय मानसून के दिनों में गरज और आकाशीय बिजली एक आम बात है। लेकिन हर बार किसी का ध्यान नहीं जाता इन चेतावनियों की ओर।

दुर्भाग्यपूर्ण घटना और अचानक मौत

बीते हफ्ते रविवार की दोपहर थी। मौसम खराब था। आसमान में काले बादल छाए थे। गरज की आवाज बार-बार सुनाई दे रही थी। लेकिन रोशन को अपने खेतों की चिंता थी। मई के महीने में आमों की तुड़ाई का समय होता है। उन्हें लगा कि एक बार और खेत चेक कर लें।

रोशन अपने खेतों में गए और अपने पसंदीदा आम के पेड़ के पास खड़े हो गए। वह आम तोड़ रहे थे कि अचानक एक तेज गरज की आवाज आई। फिर क्या हुआ, किसी ने सटीक रूप से नहीं देखा। लेकिन आसमान से एक तेज बिजली गिरी। रोशन जहां खड़े थे, वहीं गिर गए। उनके शरीर पर बिजली के गहरे निशान थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रोशन बालकृष्ण की मौके पर ही मौत हो गई।

सीख और संदेश

यह घटना हमें एक अहम सबक सिखाती है। खेती एक सम्मानजनक पेशा है, लेकिन यह खतरों से खाली नहीं है। प्रकृति अप्रत्याशित है। गरमी, सर्दी, ओले, बाढ़, सूखा, और बिजली - सभी कुछ किसानों को परेशान करते हैं। रोशन ने अपना सपना पूरा किया था, लेकिन प्रकृति के सामने वह असहाय साबित हुए। उनके माता-पिता, उनके परिवार का दर्द किसी से छिपा नहीं है।

आज जब हम रोशन बालकृष्ण की बात करते हैं, तो हमें न केवल उनका साहस याद आता है, बल्कि यह भी याद आता है कि कितने किसान हर दिन ऐसे खतरों का सामना करते हैं। बिजली गिरना, हिंसक तूफान, और अन्य प्राकृतिक आपदाएं भारतीय खेतों में हर साल सैकड़ों लोगों की जान लेती हैं। सरकार को इस दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए। खेतों में बिजली रोधी उपकरण लगवाने चाहिए। किसानों को मौसम की चेतावनी के बारे में समय पर सूचित किया जाना चाहिए।

रोशन बालकृष्ण का सपना शायद अधूरा रह गया, लेकिन उनकी याद हमेशा रहेगी। उनका बलिदान एक अनुस्मारक है कि कितना महत्वपूर्ण है कि हम प्रकृति का सम्मान करें और सुरक्षा उपायों को गंभीरता से लें। उम्मीद है कि उनके जैसी दुर्घटनाएं भविष्य में न हों।