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Saturday, 06 June 2026
विश्व

ज्येष्ठ पूर्णिमा आज, दान के शुभ मुहूर्त

author
Komal
संवाददाता
📅 31 May 2026, 6:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 976 views
ज्येष्ठ पूर्णिमा आज, दान के शुभ मुहूर्त
📷 aarpaarkhabar.com

ज्येष्ठ पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण और पवित्र दिन माना जाता है। इस वर्ष यह पवित्र दिन आज मनाया जा रहा है। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को लेकर हमारे धर्मग्रंथों और परंपराओं में कई मान्यताएं और विश्वास जुड़े हुए हैं। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा, सेवा, दान और पूजा-पाठ के माध्यम से व्यक्ति न केवल आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकता है, बल्कि पारिवारिक सुख, स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना भी पूरी हो सकती है।

यह दिन विशेष रूप से वैष्णव परंपरा में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। इसी कारण से इस दिन को परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन को बहुत शुभ और फलदायक माना गया है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान की महत्ता

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन दान देने की परंपरा बहुत प्राचीन है। हमारे धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन किया गया दान सामान्य दिनों के दान से कई गुना अधिक फलदायक होता है। इस शुभ मुहूर्त में विभिन्न वस्तुओं का दान करने की सलाह दी जाती है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान देने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है जल का दान। गर्मी के इस मौसम में किसी प्यासे को जल देना परम पुण्य का काम माना जाता है। आप सड़कों पर प्याऊ लगा सकते हैं, मंदिरों में जलपात्र रख सकते हैं अथवा अपने घर के बाहर ठंडे पानी का प्याला रखकर राहगीरों को पानी पिला सकते हैं।

इसके अलावा इस दिन फल, अनाज और कपड़ों का दान भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। गरीब और असहाय लोगों को खाना खिलाना, उन्हें कपड़े देना और उनकी मदद करना इस दिन का मुख्य उद्देश्य होता है। ऐसा माना जाता है कि दान से न केवल दूसरों का भला होता है, बल्कि दानकारी को भी आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।

अन्न का दान भी इस दिन विशेष महत्व रखता है। चावल, दाल, गेहूं और अन्य अनाज दान करने से आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। गुड़ का दान भी इस पूर्णिमा के दिन बहुत शुभ माना जाता है। गुड़ खिलाने से मिठास और स्नेह रिश्तों में आता है।

पूजा और आरती का सही तरीका

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर नहा-धोकर पवित्र होना चाहिए। प्रतिदिन की तरह आरती का समय इस दिन भी महत्वपूर्ण है। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वाले लोगों को संभवतः फल, दूध और खीर का सेवन करना चाहिए।

इस दिन घर के पूजा स्थल को साफ-सुथरा करके पूजा की तैयारी करनी चाहिए। भगवान विष्णु और भगवान परशुराम की पूजा इस दिन विशेष रूप से की जाती है। अगर आप भगवान परशुराम को अपना आराध्य मानते हैं, तो उनके मंत्रों का जाप करना लाभदायक होता है।

पूजा के समय सूर्य पूजन भी बहुत महत्वपूर्ण है। सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद घंटियों को बजाकर आरती की जाती है। परिवार के सभी सदस्यों को पूजा में शामिल होना चाहिए।

शुभ मुहूर्त में करें ये विशेष कार्य

ज्येष्ठ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से लेकर पूर्णिमा तिथि समाप्त होने तक माना जाता है। इसी समयावधि में किए गए दान, पूजा और अन्य धार्मिक कार्य अधिक फलदायक होते हैं।

इस दिन कुओं की पूजा भी की जाती है। परंपरागत रूप से कुएं को जीवन का स्रोत माना जाता है। इसलिए इस दिन कुओं की साफ-सफाई और पूजा करना शुभ माना जाता है।

तुलसी के पौधों की पूजा भी इस दिन की जाती है। तुलसी को देवी का रूप माना जाता है। घर में तुलसी का पौधा लगाना और उसकी देखभाल करना बहुत शुभ माना जाता है।

इस पवित्र दिन पर रिश्तेदारों और मित्रों को मिठाई और उपहार देने की भी परंपरा है। ऐसा करने से रिश्ते मजबूत होते हैं और घर में खुशियां आती हैं। कुल मिलाकर ज्येष्ठ पूर्णिमा एक ऐसा दिन है जब हमें अपनी परंपराओं को निभाते हुए दूसरों की मदद करनी चाहिए और आध्यात्मिक विकास की ओर बढ़ना चाहिए।