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Saturday, 03 October 2026
अपराध

कोलकाता डीसीपी शांतनु सिन्हा गिरफ्तार ED ने

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Komal
संवाददाता
📅 15 May 2026, 5:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 581 views
कोलकाता डीसीपी शांतनु सिन्हा गिरफ्तार ED ने
📷 aarpaarkhabar.com

कोलकाता के डिप्टी पुलिस कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने एक बड़े वसूली रैकेट मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी राजनीतिक और कानूनी दोनों क्षेत्रों में एक बड़ी घटना मानी जा रही है क्योंकि शांतनु सिन्हा पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफी करीबी माने जाते थे। इस गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल मच गई है।

ईडी की जांच में पता चला है कि शांतनु सिन्हा इस वसूली नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण सदस्य थे। यह रैकेट कोलकाता और उसके आस-पास के इलाकों में काफी समय से सक्रिय था। कथित तौर पर शांतनु सिन्हा इस गैरकानूनी गतिविधि में अपनी पुलिस की शक्ति का दुरुपयोग कर रहे थे। उनके पास पुलिस विभाग में एक महत्वपूर्ण पद था जिसका वह गलत इस्तेमाल कर रहे थे।

ईडी की जांच और गिरफ्तारी की तफसील

प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने कई सप्ताह तक इस मामले की गहन जांच की। जांच के दौरान पता चला कि शांतनु सिन्हा अपराधी सोना पप्पू और व्यापारी जय कामदार के साथ मिलकर काम कर रहे थे। सोना पप्पू को कोलकाता के अंडरवर्ल्ड का एक प्रभावशाली नाम माना जाता है। जय कामदार एक धनी व्यापारी हैं जिनके कई कारोबारी हित हैं।

इस वसूली रैकेट में आमतौर पर व्यापारियों और जमींदारों से गैरकानूनी तरीकों से पैसे वसूल किए जाते थे। शांतनु सिन्हा के पद का लाभ उठाकर इस नेटवर्क ने लोगों को धमकाया जाता था। कई पीड़ितों ने बताया कि जब वह पुलिस के पास शिकायत करने जाते थे तो उन्हें खुद ही पुलिस की ओर से परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

ईडी ने शांतनु सिन्हा के विभिन्न बैंक खातों को ट्रेस किया और पाया कि उनके खातों में गैरकानूनी स्रोतों से विशाल राशि जमा हुई थी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार उनके नाम पर कई प्रॉपर्टी भी मिली हैं जिनका स्पष्ट स्रोत नहीं है। यह सब कुछ इस बात की ओर इशारा करता है कि वह काफी समय से इस गैरकानूनी कारोबार में शामिल थे।

राजनीतिक प्रभाव और ममता बनर्जी से संबंध

शांतनु सिन्हा का नाम पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ा हुआ है। उन्हें ममता बनर्जी का विश्वस्त अधिकारी माना जाता रहा है। पुलिस विभाग में उनकी तेजी से प्रमोशन को कुछ लोग उनके राजनीतिक संबंधों से जोड़ते हैं। हालांकि, ममता बनर्जी और उनकी सरकार अभी तक शांतनु सिन्हा की गिरफ्तारी पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है।

इस गिरफ्तारी से बंगाल की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है। विपक्षी दल इसे ममता सरकार के विरुद्ध एक प्रहार के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस का मानना है कि यह शांतनु सिन्हा का व्यक्तिगत अपराध है और सरकार इससे अलग है।

वसूली रैकेट की विस्तृत जांच

ईडी की टीम केवल शांतनु सिन्हा के साथ नहीं, बल्कि इस पूरे नेटवर्क के साथ जांच कर रही है। सोना पप्पू को पहले से ही कई अपराधों के लिए खोजा जा रहा था। जय कामदार से भी ईडी की टीम विस्तार से बातचीत कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ अन्य पुलिस अधिकारी भी इस जांच के दायरे में हो सकते हैं।

वसूली रैकेट की जांच में पाया गया है कि यह नेटवर्क न केवल कोलकाता बल्कि बंगाल के अन्य हिस्सों में भी सक्रिय था। कई राज्यों में जमींदार, व्यापारी और उद्योगपति इस रैकेट के शिकार बनाए गए थे। कुछ पीड़ितों ने बताया कि वह वर्षों तक इस डर के साथ जी रहे थे कि उन्हें कभी भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ईडी ने शांतनु सिन्हा के खिलाफ कई गंभीर अपराधों के तहत केस दर्ज किया है। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग, आपराधिक साजिश, और वसूली जैसे अपराध शामिल हैं। इस मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी नए खुलासे सामने आने की संभावना है। यह गिरफ्तारी पुलिस विभाग में सुधार और जवाबदेही की आवश्यकता को हाइलाइट करती है।