लखनऊ में इनामी बदमाश का एनकाउंटर, STF की गोली से मौत
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को एक बड़ी घटना सामने आई है। यहां की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक खतरनाक इनामी बदमाश को एनकाउंटर में मार गिराया है। पुलिस विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह बदमाश संजय उर्फ संजीव के नाम से जाना जाता था और उसके सिर पर एक लाख रुपए का इनाम रखा हुआ था।
पुलिस की जांच से पता चला है कि यह बदमाश मई 2026 में लखनऊ के पीजीआई इलाके में होने वाली एक बेहद गंभीर घटना का मुख्य शूटर था। उस घटना में एक प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे शहर में तहलका मचा दिया था और सुरक्षा को लेकर लोगों में खौफ का माहौल बन गया था।
संजय का आपराधिक इतिहास और गंभीर मामले
गिरफ्तारी रिकॉर्ड के अनुसार, संजय उर्फ संजीव के खिलाफ कई जिलों में हत्या सहित गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। उसकी पुलिस डायरी में कई हिंसक अपराध का उल्लेख मिलता है। स्थानीय पुलिस एवं STF के विशेष दल ने महीनों तक इस बदमाश को पकड़ने के लिए तीव्र कार्रवाई की थी। उसके आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने के लिए कई छापे मारे गए थे।
इस अपराधी के साथ कई सशस्त्र लूटपाट की घटनाएं भी जुड़ी हुई थीं। विभिन्न इलाकों में दुकानों, आवासीय इलाकों और यहां तक कि सार्वजनिक परिवहन में लूटपाट की घटनाओं में उसका नाम सामने आया था। महिलाओं के आभूषण छीनने की घटनाएं भी उसके नाम दर्ज थीं। समाज में आतंक फैलाने वाले इस अपराधी के विरुद्ध पुलिस पूरी गंभीरता से काम कर रही थी।
संदीप सिंह हत्याकांड की पृष्ठभूमि
मई 2026 में पीजीआई इलाके में संदीप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या दिन के उजाले में की गई थी, जिससे जनता में भय का माहौल बन गया था। संदीप सिंह एक जाने-माने प्रॉपर्टी डीलर थे और शहर के व्यापारिक समाज में उनकी पहचान थी। उनकी अचानक और हिंसक मौत सभी को चौंकाने वाली थी।
पुलिस की शुरुआती जांच में संकेत मिले थे कि यह हत्या किसी व्यक्तिगत विवाद या संपत्ति से संबंधित विवाद के कारण की गई थी। हालांकि, बाद में पता चला कि यह एक सुनियोजित हत्या थी। गिरफ्तार किए गए संजय ने माना कि उसने ही संदीप सिंह को गोली मारी थी। यह बात पुलिस के लिए बड़ी सफलता थी क्योंकि इससे एक लंबे समय से लंबित केस को सुलझाने में मदद मिली।
STF की सतर्कता और एनकाउंटर ऑपरेशन
यूपी की स्पेशल टास्क फोर्स ने अपनी गुप्तचर जानकारी के आधार पर संजय को खोज निकाला। लंबी निगरानी के बाद जब उसके ठिकाने का पता चला, तो STF की टीम ने तुरंत कार्रवाई की। एनकाउंटर के दौरान संजय ने पुलिस पर गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस मुठभेड़ में संजय गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी मृत्यु हो गई।
स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस एनकाउंटर को कानूनी ढांचे के अंतर्गत सही कार्रवाई बताया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संजय एक बेहद खतरनाक अपराधी था और उसे जीवित पकड़ना पुलिस जवानों के लिए जोखिम भरा था। संजय के पास बदमाशों का एक पूरा गिरोह था जो विभिन्न गंभीर अपराधों में उसके साथ काम कर रहा था।
इस एनकाउंटर के बाद पुलिस ने संजय के साथियों को पकड़ने की कार्रवाई तेज कर दी है। संजय के फोन रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों से उसके नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। पुलिस आशा करती है कि आने वाले दिनों में संजय के अन्य साथियों को भी गिरफ्तार किया जा सकेगा।
लखनऊ में इस एनकाउंटर की घटना से एक बड़े अपराधी गिरोह को तोड़ने में मदद मिली है। यह पुलिस विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का परिणाम है। नागरिकों में इस कार्रवाई के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। सामाजिक माध्यमों पर लोग पुलिस की इस कार्रवाई की प्रशंसा कर रहे हैं क्योंकि इससे शहर की सुरक्षा को मजबूती मिली है।




