मुंबई के नालों में मिली अजीब चीजें, बीएमसी स्तब्ध
मुंबई शहर में मानसून की बारिश होने से पहले नालों और गटरों की सफाई का काम शुरू होता है। लेकिन इस बार जब बीएमसी की सफाई टीम नालों को साफ करने में जुटी, तो उन्हें जो कुछ मिला वह सचमुच अविश्वसनीय था। पानी के बहाव को रोकने वाली चीजों की सूची इतनी लंबी थी कि अनुभवी अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
शहर के विभिन्न इलाकों से आने वाली सफाई टीमें जब नालों में उतरीं, तो उन्हें कचरे के साथ-साथ कुछ ऐसी वस्तुएं भी मिलीं जिन्हें कोई भी सोचते हुए नहीं सोच सकता था। पुरानी कार के पार्ट्स से लेकर टूटे-फूटे फर्नीचर, सीमेंट की बालियां, कंस्ट्रक्शन का मलबा और न जाने क्या-क्या। मरीन ड्राइव से लेकर धारावी के नालों तक, हर जगह ऐसी ही दुर्दांत हालत मिली।
बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि इस बार की सफाई अभियान में जो चीजें निकलीं, वह पिछले पांच सालों में कभी नहीं देखी गईं। लोहे की जंजीरें, टूटे हुए डिब्बे, प्लास्टिक की थैलियों का ढेर, बर्तन, और भी बहुत कुछ। एक जगह तो एक पूरी साइकिल ही नाले से निकलीं। कुछ नालों से तो ऐसी दुर्गंध आ रही थी कि सफाई कर्मचारियों को मास्क लगाकर भी काम करना मुश्किल हो रहा था।
नालों में कबाड़ का भंडार
मुंबई के दक्षिण क्षेत्र के नालों की सफाई करते समय जो दृश्य सामने आया, वह काफी भयावह था। कोलकाता क्षेत्र के एक नाले में तो निर्माण कार्य का पूरा मलबा भरा हुआ था। सीमेंट की बोरियां, लकड़ी के तख्ते, और पत्थरों का ढेर। बीएमसी के अधिकारियों को लगता है कि आस-पास के निर्माण स्थलों से लोग अवैध रूप से अपना कूड़ा नालों में डाल रहे हैं।
दूसरी ओर, आवासीय इलाकों के नालों में घरेलू सामानों का अंबार था। टूटे हुए दरवाजे, खिड़कियों के फ्रेम, पुराने कपड़ों के गठ्ठर, और जानवरों की लाश भी मिली कई जगहों पर। महालक्ष्मी और वर्ली के इलाकों में तो ऐसी स्थिति थी कि नाले पूरी तरह बंद हो गए थे। बारिश का एक-दो इंच पानी भी गली में भर जाता था क्योंकि नाले का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा था।
बीएमसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बार की सफाई अभियान में करीब पचास टन से ज्यादा कचरा निकाला गया। और इसमें सिर्फ साधारण गंदगी नहीं थी। प्लास्टिक के पोल, विद्युत उपकरण, और भी न जाने क्या-क्या कुछ था। कुछ नालों में तो इतनी मोटी गंदगी जमी थी कि पानी का बहाव रुक गया था।
लोगों की लापरवाही का नतीजा
यह सब कुछ मुंबई के नागरिकों की लापरवाही और असंवेदनशीलता का ही परिणाम है। जब लोग अपने घर और दुकानों का कचरा सीधा नालों में डालने लगते हैं, तो इसी तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। निर्माण स्थलों पर तो यह समस्या और भी गंभीर है। ठेकेदार और निर्माण कंपनियां अपना मलबा यूं ही नालों में डाल देती हैं क्योंकि इसे सही तरीके से निपटाना मंहगा पड़ता है।
बीएमसी के अधिकारियों का कहना है कि वे बार-बार लोगों को चेतावनी देते हैं कि नालों में कचरा न डालें, लेकिन कोई सुनता नहीं है। जनता को लगता है कि नाले में डाला गया कचरा कहीं चला जाएगा, पर असल में वह पानी की निकासी में बाधा डालता है। बारिश के दिनों में यही कचरा जलभराव की समस्या बन जाता है।
बीएमसी की चिंताएं और भविष्य की योजना
बीएमसी के अधिकारियों के लिए यह एक चिंता का विषय बन गया है। मानसून आने से पहले नालों को पूरी तरह साफ करना जरूरी है, वरना बारिश के दौरान भीषण जलभराव हो सकता है। लेकिन जब हर दिन लोग नालों में कचरा डालते रहेंगे, तो सफाई का काम कभी पूरा नहीं हो सकेगा।
इसी समस्या से निपटने के लिए बीएमसी ने कुछ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। वे अब नालों में कचरा डालने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही, नागरिकों में जागरूकता लाने के लिए भी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। स्कूलों और कॉलेजों में भी इस बारे में शिक्षा दी जाएगी कि नालों की सफाई क्यों महत्वपूर्ण है।
निर्माण स्थलों पर नियंत्रण बढ़ाने के लिए भी नई व्यवस्थाएं की जाएंगी। प्रत्येक निर्माण स्थल पर कचरे के लिए अलग से डिब्बे रखने की अनिवार्यता की जाएगी। इसके अलावा, संबंधित अधिकारी नियमित रूप से साइटों का निरीक्षण भी करेंगे।
मुंबई शहर की बेहतरी के लिए जरूरी है कि हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे। नाले हमारे शहर की जीवन रक्त हैं। अगर हम इन्हें साफ-सुथरा नहीं रखेंगे, तो बारिश का मौसम हर बार हमारे लिए आपदा बन जाएगा। इसलिए हर किसी को चाहिए कि वह अपना कचरा सही जगह पर डाले और दूसरों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रोत्साहित करे।




