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Sunday, 05 July 2026
समाचार

नौतपा 2026: 9 दिन के नियम और सावधानियां

author
Komal
संवाददाता
📅 25 May 2026, 7:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 982 views
नौतपा 2026: 9 दिन के नियम और सावधानियां
📷 aarpaarkhabar.com

नौतपा का समय शुरू हो चुका है। आज से सूर्य देव के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही यह नौ दिनों की अवधि शुरू हो जाती है। यह वह समय होता है जब सूर्य की किरणें अत्यधिक तीव्र और प्रभावशाली हो जाती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार नौतपा ग्रीष्म ऋतु का सबसे गर्म समय माना जाता है। इन नौ दिनों में तापमान अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाता है। इसलिए इन दिनों में शरीर की देखभाल करना बेहद जरूरी होता है।

नौतपा शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है - नव जिसका मतलब नौ है और तपा जिसका मतलब ताप या गर्मी है। यह वह समय होता है जब प्रकृति अपनी सबसे कठोर अवस्था में होती है। भारतीय ऋषियों और आयुर्वेद विशेषज्ञों ने इन दिनों में विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी है। नौतपा के दौरान शरीर को ज्यादा से ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है।

इस समय में सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। सूर्य को हिंदू धर्म में सर्वोच्च शक्ति का स्रोत माना जाता है। सूर्य की किरणें जीवन को ऊर्जा प्रदान करती हैं, लेकिन अत्यधिक ताप से बचना भी जरूरी होता है। नौतपा के दौरान सूर्य की पूजा करने से मनुष्य को आशीर्वाद मिलता है।

नौतपा में क्या करें

नौतपा के 9 दिनों में सुबह जल्दी उठना चाहिए। सूर्योदय से पहले ही नहा लेना चाहिए। ठंडे पानी से नहा-धोकर शरीर को तरोताजा रखना चाहिए। नौतपा में सूर्य देव को अर्घ्य देना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने से सूर्य की नकारात्मक शक्तियां कम होती हैं।

इन 9 दिनों में हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। गुनगुने दूध, छाछ, मट्ठा, तरबूज, खरबूज और खीरे का सेवन करना लाभकारी है। दही और दूध की लस्सी पीना शरीर को ठंडा रखता है। हरी सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए।

नौतपा में योग और ध्यान का विशेष महत्व है। सुबह के समय शवासन में बैठकर ध्यान करना चाहिए। नियमित व्यायाम नहीं करना चाहिए, बल्कि हल्के-फुल्के व्यायाम करने चाहिए। पूर्व की ओर मुंह करके बैठना और सूर्य मंत्र का जाप करना बहुत लाभकारी है।

इन दिनों में सूर्य देव को समर्पित मंत्रों का जाप करना चाहिए। "ॐ ह्रीं सूर्याय नमः" का प्रतिदिन 108 बार जाप करना चाहिए। यह मंत्र शरीर को ऊर्जा देता है और मन को शांति प्रदान करता है। नौतपा में धर्म और आध्यात्मिकता का विशेष स्थान है।

नौतपा में क्या न करें

नौतपा के दिनों में दोपहर में घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। दोपहर की तीव्र धूप में जाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यदि बाहर जाना पड़े तो सिर पर कपड़े लपेटकर जाएं और छाता जरूर लें।

तीखा, मसालेदार और तैलीय भोजन से परहेज करना चाहिए। आइसक्रीम, ठंडे पेय पदार्थ और फास्ट फूड का सेवन नहीं करना चाहिए। चाय और कॉफी की मात्रा कम कर देनी चाहिए। शराब और धूम्रपान का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

नौतपा में अधिक शारीरिक परिश्रम नहीं करना चाहिए। भारी व्यायाम से बचना चाहिए। क्रोध, चिंता और तनाव से दूर रहना चाहिए। इन भावनाओं से शरीर में गर्मी बढ़ती है। रात को देर तक जागने से बचना चाहिए। कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेना आवश्यक है।

नौतपा में स्वास्थ्य सुझाव

नौतपा के दौरान नियमित रूप से तेल की मालिश करनी चाहिए। नारियल का तेल या बादाम का तेल सर्वश्रेष्ठ है। इस तेल को सिर और शरीर पर लगाकर धीरे-धीरे मालिश करनी चाहिए। यह त्वचा को ठंडक देता है और शरीर को स्वस्थ रखता है।

नौतपा में आयुर्वेदिक उपचार भी महत्वपूर्ण हैं। त्रिफला का सेवन करना चाहिए। आंवला का रस पीना बहुत लाभकारी है। मुलेठी का सेवन करने से कफ और पित्त को संतुलन मिलता है। घृत और दूध का सेवन वात को शांत करता है।

इन 9 दिनों में मानसिक शांति भी जरूरी है। प्रार्थना और पूजा-पाठ करने से मन को शांति मिलती है। परिवार के साथ समय बिताना चाहिए। सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। नौतपा के इन दिनों में धर्म पालन से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

नौतपा की समाप्ति के बाद मौसम में बदलाव आता है। इसलिए इन 9 दिनों में अपना ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। सूर्य देव को समर्पित होकर इन दिनों को बिताने से शरीर और आत्मा दोनों को शांति मिलती है। नौतपा एक आध्यात्मिक और स्वास्थ्य संबंधी समय है जो हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सिखाता है।