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Saturday, 18 July 2026
धर्म

निर्जला एकादशी 2026: भद्रा, शुभ योग और पूजा मुहूर्त

author
Komal
संवाददाता
📅 18 June 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 355 views
निर्जला एकादशी 2026: भद्रा, शुभ योग और पूजा मुहूर्त
📷 aarpaarkhabar.com

निर्जला एकादशी 2026: तारीख और समय

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस दिन भक्त बिना जल पिए पूरे दिन का व्रत रखते हैं। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून 2026 को रात 8 बजकर 9 मिनट से आरंभ होगी और 25 जून 2026 को रात 9 बजकर 14 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा।

यह तिथि निर्धारण बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि व्रत को सही तिथि पर रखने से ही उसका पूरा फल मिलता है। उदया तिथि वह तिथि है जो सूर्योदय के समय प्रभावी होती है। इसी आधार पर व्रत की तारीख तय की जाती है। निर्जला एकादशी की परंपरा बहुत पुरानी है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है।

भद्रा काल: सावधानी बरतें

निर्जला एकादशी पर भद्रा का भी प्रभाव रहेगा, जिसके कारण कुछ कार्यों को करने में सावधानी बरतनी होगी। भद्रा को समय की एक विशेष अवधि माना जाता है जब कोई भी शुभ या महत्वपूर्ण कार्य करना अशुभ माना जाता है। इसलिए पूजा का समय भद्रा से बाहर निर्धारित करना चाहिए।

भद्रा के दौरान प्रवेश, गृह निर्माण, विवाह, मंदिर में प्रवेश और अन्य धार्मिक कार्यों को टालने की परंपरा है। हालांकि, व्रत को रखने में कोई बाधा नहीं आती। व्रत तो पूरे दिन रखा जा सकता है, लेकिन पूजा का मुहूर्त भद्रा काल से अलग होना चाहिए। यह जानकारी लोगों को सही समय पर पूजा करने में मदद करती है।

भद्रा काल की गणना करना एक तकनीकी काम है जो पंचांग विशेषज्ञ ही सही तरीके से कर सकते हैं। आमतौर पर भद्रा दो प्रकार की होती है - पूर्व भद्रा और उत्तर भद्रा। इसी आधार पर समय निर्धारित किया जाता है। निर्जला एकादशी 2026 पर भद्रा होने के बावजूद चार शुभ योग भी बनने जा रहे हैं जो कि बहुत शुभ संकेत हैं।

चार शुभ योग: आशीर्वाद की बहुतायत

निर्जला एकादशी पर भद्रा के अलावा चार शुभ योग भी बनने वाले हैं। ये शुभ योग व्रत को और भी महत्वपूर्ण बना देते हैं। शुभ योग का मतलब है कि दो ग्रहों या नक्षत्रों का एक साथ शुभ स्थिति में होना। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब शुभ योग बनते हैं तो उस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

ये चार शुभ योग निर्जला एकादशी के व्रत को अत्यंत शुभकारी बनाते हैं। भक्तों का मानना है कि इस दिन व्रत रखने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। शुभ योग की उपस्थिति से व्रत का फल गुणा हो जाता है। यह एक दुर्लभ संयोग है जब एकादशी, शुभ योग और भद्रा सभी एक साथ आते हैं।

यह पूरा संयोग दिखाता है कि भगवान विष्णु का आशीर्वाद इस दिन विशेष रूप से प्रवाहित हो रहा है। इसलिए भक्तों को पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ व्रत रखना चाहिए। शुभ योगों की संख्या जितनी अधिक हो, उतना ही शुभ फल प्राप्त होता है।

पूजा का सही मुहूर्त और व्रत विधि

निर्जला एकादशी पर पूजा का सही मुहूर्त जानना बहुत आवश्यक है। जैसा कि पहले बताया गया है, भद्रा काल के दौरान पूजा नहीं करनी चाहिए। पूजा को भद्रा काल से बाहर किसी शुभ समय में करना चाहिए। साधारणतः सूर्योदय के समय या दोपहर का समय पूजा के लिए अच्छा माना जाता है।

निर्जला एकादशी का व्रत पूरी रात सोने से पहले और पूरे दिन रखा जाता है। इस व्रत में न केवल भोजन बल्कि जल का भी त्याग किया जाता है। व्रत को तोड़ने का समय द्वादशी तिथि के दौरान निर्धारित किया जाता है। व्रत के दौरान लोग भगवान विष्णु का ध्यान और पूजन करते हैं।

व्रत की विधि के अनुसार, सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है, फिर पूजा की तैयारी की जाती है। मंदिर या घर के पूजा स्थान को साफ किया जाता है और फूल, धूप, दीप आदि से सजाया जाता है। भगवान विष्णु और विशेषकर भगवान कृष्ण को पूजा का मुख्य देवता माना जाता है। व्रत के दौरान भगवान की स्तुति, भजन गायन और पूजा की जाती है।

निर्जला एकादशी पर व्रत रखने वाले भक्तों को समय का पालन करना चाहिए। सही मुहूर्त पर पूजा करने से व्रत का फल पूरी तरह मिलता है। यह एक पवित्र दिन है जो भगवान विष्णु के प्रति समर्पण का प्रतीक है। लाखों भक्त इस दिन को बेहद महत्व के साथ मनाते हैं और अपनी मनौती पूरी करने के लिए व्रत रखते हैं।