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Tuesday, 18 August 2026
विश्व

सिंधु जल संधि: पाकिस्तान की बेचैनी और भारत की मजबूत स्थिति

author
Komal
संवाददाता
📅 01 July 2026, 7:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 666 views
सिंधु जल संधि: पाकिस्तान की बेचैनी और भारत की मजबूत स्थिति
📷 aarpaarkhabar.com

सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी अब पूरी तरह से खुलकर सामने आ गई है। भारत की तरफ से इस महत्वपूर्ण संधि को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों से गुहार लगा रहा है और अपनी व्यथा सुना रहा है। हाल ही में इस्लामाबाद में इस मामले पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें पाकिस्तानी मंत्रियों, सांसदों और अन्य राजनीतिक नेताओं ने भारत को धमकी देने और डराने-धमकाने की कोशिश की है। यह घटना साफ संकेत देती है कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि को लेकर कितना चिंतित और व्यग्र है।

सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का जीवनरक्त है। यह नदी पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र को सिंचित करती है और विद्युत उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला पाकिस्तान की राजनीति में एक तूफान ला गया है। पाकिस्तान के नेतृत्व को अब महसूस हो रहा है कि उसकी जल संबंधी सुरक्षा को लेकर कितना खतरा मंडरा रहा है।

इस्लामाबाद में आयोजित सम्मेलन में पाकिस्तान के विभिन्न मंत्रियों ने भारत के खिलाफ कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया है। उन्होंने दावा किया है कि भारत सिंधु जल संधि को तोड़कर पाकिस्तान को पानी से वंचित करने की साजिश रच रहा है। पाकिस्तानी सरकार के अधिकारियों का मानना है कि भारत पाकिस्तान को आर्थिक रूप से कमजोर करना चाहता है। यह आरोप बिल्कुल बेबुनियाद है क्योंकि भारत हमेशा से अंतरराष्ट्रीय संधियों का सम्मान करता रहा है।

पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति का खेल

पाकिस्तान में इस समय जो बेचैनी देखी जा रही है वह केवल सिंधु जल संधि तक सीमित नहीं है। दरअसल पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति बेहद गंभीर संकट में है। देश की अर्थव्यवस्था जर्जर हालत में है, महंगाई आसमान छू रही है और आम जनता का जीवन दुश्वार हो गया है। ऐसे में सरकार भारत को दुश्मन के तौर पर प्रस्तुत करके अपनी विफलताओं को छुपाने की कोशिश कर रही है। सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाकर पाकिस्तानी नेतृत्व जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति अपना रहा है।

पाकिस्तान के सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों के भाषण सुनने से लगता है कि वे घबराहट में हैं। उनकी इसी घबराहट का कारण है भारत की मजबूत और दृढ़ स्थिति। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तान के आतंकवादी कार्यक्रमों के विरुद्ध कड़े कदम उठाएगा। सिंधु जल संधि को स्थगित करना भारत का एक राजनीतिक निर्णय है जो पाकिस्तान की आतंकवादी नीतियों के जवाब में लिया गया है। यह निर्णय पूरी तरह से भारत के संविधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में है।

भारत की मजबूत जल सुरक्षा नीति

भारत में जल सुरक्षा को लेकर एक स्पष्ट और दीर्घकालिक नीति है। भारत को यह अधिकार है कि वह अपने जल संसाधनों का उपयोग अपनी जनता के कल्याण के लिए करे। सिंधु नदी भारत की धरती से निकलती है और भारत को इसके जल का उचित उपयोग करने का पूर्ण अधिकार है। भारत ने अपनी जल परियोजनाओं को विकसित करने के लिए जो कदम उठाए हैं वे बिल्कुल जायज हैं। पाकिस्तान को भारत की इन परियोजनाओं पर कोई आपत्ति उठाने का अधिकार नहीं है।

भारतीय जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि भारत सिंधु जल संधि की सभी शर्तों का पालन कर रहा है। भारत केवल अपने हिस्से के पानी का उपयोग कर रहा है। पाकिस्तान को दिए गए पानी की कोई कमी नहीं हुई है। भारत की सभी परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार तैयार की गई हैं। दुनिया के किसी भी विकसित देश को अपने जल संसाधनों के उपयोग में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है जैसी कि भारत पर लागू की गई है।

पाकिस्तान की जल चिंता का वास्तविक कारण

सच कहें तो पाकिस्तान की वास्तविक समस्या सिंधु जल नहीं है। पाकिस्तान की असली समस्या यह है कि वह अपनी आंतरिक कमजोरियों को समझ नहीं पाया है। पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी राजनीति का अभिन्न अंग बना लिया है। उसने सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवादी तनजीमें पाल-पोसकर बड़ी की हैं। ये आतंकवादी संगठन भारत के खिलाफ निरंतर हमले करते रहते हैं। भारत ने इसी आतंकवाद के विरुद्ध एक कड़ा रुख अपनाया है। सिंधु जल संधि को स्थगित करना भारत का इसी नीति का एक हिस्सा है।

पाकिस्तान को समझना चाहिए कि जब तक वह आतंकवाद पर अंकुश नहीं लगाएगा तब तक भारत के साथ किसी भी समझौते की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि से ऊपर मानता है। यदि पाकिस्तान चाहता है कि भारत सिंधु जल संधि के प्रति अपना रवैया बदले तो उसे सबसे पहले आतंकवाद को त्यागना होगा और सीमावर्ती इलाकों में शांति स्थापित करनी होगी।

पाकिस्तान के मंत्रियों और राजनेताओं की धमकियां सुनकर हंसी आती है क्योंकि पाकिस्तान के पास भारत को धमकाने के लिए कोई वास्तविक शक्ति नहीं है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगभग डूब चुकी है और सैन्य शक्ति भी अब पहले जैसी नहीं रही। ऐसे में पाकिस्तान केवल शब्दों की बौछार कर सकता है। भारत को पाकिस्तान की ये धमकियां गंभीरता से लेने की कोई जरूरत नहीं है।

भारत को अपनी मजबूत स्थिति पर विश्वास रखना चाहिए और अपनी जल सुरक्षा नीति को दृढ़ता के साथ लागू करना चाहिए। भारत की यह कड़ी रुख वास्तव में पूरे क्षेत्र के लिए शांति और स्थिरता लाएगा। जब पाकिस्तान को यह समझ आ जाएगा कि भारत अब किसी की धमकियों से नहीं डरता तो वह आतंकवाद का मार्ग छोड़ने के लिए बाध्य हो जाएगा। सिंधु जल संधि के संदर्भ में भारत की नीति पूरी तरह से उचित और न्यायसंगत है।