पारिजात और हिमांशु की कविता – आओ लिखें दीप
आज का शब्द: पारिजात की महिमा
हिंदी साहित्य में पारिजात एक ऐसा शब्द है जो केवल एक पौधे का नाम नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, धर्म और काव्य का एक महत्वपूर्ण अंग है। पारिजात, जिसे हरसिंगार भी कहते हैं, भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पौधा रात भर में अपने सफेद और पीले फूलों को खिलाता है और सुबह होते ही उन्हें गिरा देता है। इसी विशेषता के कारण यह कवियों और लेखकों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है।
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार पारिजात को देवताओं के बगीचे से लाया गया था। महाभारत के अनुसार, इस पौधे को भगवान कृष्ण ने स्वर्ग से नीचे लाया था। पारिजात का फूल देवताओं को पसंद है और इसे भगवान को चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। इसकी खुशबू बहुत सुगंधित होती है और इसके औषधीय गुण भी अनेक हैं।
काव्य में पारिजात का प्रयोग क्षणभंगुरता, अनित्यता और सौंदर्य को दर्शाने के लिए किया जाता है। जब कोई भी चीज रातभर के सुंदरता के बाद सुबह को मिट्टी में गिर जाती है, तो यह हमें जीवन की नश्वरता सिखाता है। कवि इसी बहाने से अपनी गहरी भावनाओं और दार्शनिक विचारों को व्यक्त करते हैं।
रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' और उनकी रचनाएं
रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' आधुनिक हिंदी साहित्य के एक प्रमुख और सम्मानित कवि हैं। उनका जन्म पंजाब में हुआ था और उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। हिमांशु जी की कविताएं सरल, सुबोध और हृदयस्पर्शी होती हैं। वे आम आदमी की भावनाओं को अपनी कविताओं में बड़ी खूबसूरती से उतारते हैं।
'आओ लिखें दीप' हिमांशु जी की एक महत्वपूर्ण कविता है जो काव्य लेखन और सृजनशीलता के बारे में बात करती है। इस कविता में वे पाठकों को अपनी रचनात्मक शक्ति का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करते हैं। दीप का प्रतीक प्रकाश, ज्ञान और सच्चाई का है। हिमांशु जी अपनी कविता के माध्यम से कह रहे हैं कि हम सभी को अपने अंदर की रचनात्मक शक्ति को जगाना चाहिए और अपने विचारों को शब्दों के रूप में प्रकट करना चाहिए।
हिमांशु जी की कविताओं में सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों का बोलबाला है। उनकी रचनाएं न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे हमारे जीवन में एक नई दिशा और प्रेरणा देती हैं। उन्होंने अपनी कविताओं में परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत मिश्रण किया है।
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